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Article 370: फिलहाल दो निशान जारी हैं कश्मीर में! राज्यपाल का पद भी उप-राज्यपाल में तब्दील नहीं हुआ

By सुरेश डुग्गर | Updated: August 7, 2019 15:38 IST

कुछ सोशल मीडिया पर आई तस्वीरों में यह स्पष्ट दिख रहा है कि श्रीनगर स्थित सचिवालय पर राष्ट्रीय ध्वज के साथ-साथ कश्मीर का झंडा लगा हुआ है। जानकारी के लिए अब तक जम्मू कश्मीर का अलग झंडा और संविधान था जो कि अनुच्छेद 370 और 35 ए हटने के बाद रद्द हो गया।

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ठळक मुद्देअनुच्छेद 370 और 35 ए हटने से पहले भारत में सिर्फ जम्मू कश्मीर को औपचारिक तौर पर देश के साथ अपना अलग झंडा फहराने की आजादी थी।कश्मीर के झंडे में गहरा लाल रंग श्रम का परिचायक था जिसके ऊपर बना हल कृषि का प्रतिनिधित्व करता था।

जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35 ए हटने के बाद सभी को बदलाव की उम्मीद तो थी लेकिन अभी तक श्रीनगर स्थित सचिवालय पर भारत के राष्ट्रध्वज के साथ-साथ जम्मू कश्मीर का झंडा भी लगा हुआ है जो संसद द्वारा पारित प्रस्ताव को चिढ़ा रहा था। यही नहीं केंद्र शासित प्रदेश के नियमों के अनुसार, यहां पर राज्यपाल का कोई पद नहीं है पर अभी भी सत्यपाल मलिक राज्यपाल के पद पर बने हुए हैं और राजभवन द्वारा उनके नाम से जारी की जाने वाली प्रेस विज्ञप्तियों में उन्हें राज्यपाल संबोधित किया जा रहा है न कि उप-राज्यपाल।

कुछ सोशल मीडिया पर आई तस्वीरों में यह स्पष्ट दिख रहा है कि श्रीनगर स्थित सचिवालय पर राष्ट्रीय ध्वज के साथ-साथ कश्मीर का झंडा लगा हुआ है। जानकारी के लिए अब तक जम्मू कश्मीर का अलग झंडा और संविधान था जो कि अनुच्छेद 370 और 35 ए हटने के बाद रद्द हो गया।

अनुच्छेद 370 और 35 ए हटने से पहले भारत में सिर्फ जम्मू कश्मीर को औपचारिक तौर पर देश के साथ अपना अलग झंडा फहराने की आजादी थी। कश्मीर के झंडे में गहरा लाल रंग श्रम का परिचायक था जिसके ऊपर बना हल कृषि का प्रतिनिधित्व करता था। इस पर बनी तीन धारियां प्रदेश के तीन भौगोलिक क्षेत्रों (जम्मू, कश्मीर व लद्दाख) को प्रदर्शित करती थीं। अब जम्मू कश्मीर को दो टुकड़ों में बांट कर उसके राज्य के अस्तित्व को ही खत्म कर दो केंद्र शासित प्रदेशों में बदल दिया गया है साथ ही उसके झंडे को समाप्त कर दिया गया है।

यही नहीं केंद्र शासित प्रदेश की बागडोर उप राज्यपाल के हाथों में होती है और फिलहाल सत्यपाल मलिक राज्यपाल के बतौर कार्य कर रहे हैं। कानून बन जाने के 24 घंटों के बाद भी उनके पद को बदला नहीं गया है। यह इसी से साबित होता है कि राजभवन द्वारा जारी किए जाने वाले प्रेस नोट्स पर फिलहाल उन्हें राज्यपाल संबोधित किया जा रहा है न कि उप-राज्यपाल।

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