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भारतीय मछुआरों के हत्यारे नौसैनिकों के खिलाफ इटली की अदालत ने केस खारिज किया, सुप्रीम कोर्ट ने की थी मुकदमा चलाने की सिफारिश

By विशाल कुमार | Updated: February 1, 2022 07:50 IST

इटली के दो नौसैनिकों सल्वाटोर गिरोन और मासिमिलियानो लातोरे ने समुद्री डकैती रोधी मिशन के हिस्से के रूप में एक इतालवी तेल टैंकर की रक्षा करते हुए फरवरी 2012 में दक्षिणी भारतीय तट पर निहत्थे मछुआरों की गोली मारकर हत्या कर दी थी।

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ठळक मुद्देफरवरी 2012 में दक्षिणी भारतीय तट पर निहत्थे मछुआरों की गोली मारकर हत्या कर दी थी। भारत ने अप्रैल 2021 में 10 करोड़ रुपये के मुआवजे के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया था।सुप्रीम कोर्ट ने इतालवी सरकार से नौसैनिकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने की सिफारिश की थी।

रोम: साल 2012 में केरल में दो भारतीय मछुआरों की हत्या करने वाले इटली के दो नौसैनिकों के खिलाफ हत्या की जांच को रोम की अदालत ने सोमवार को खारिज कर दिया। एक बयान में इटली के रक्षा मंत्री लोरेंजो गुएरिनी ने सल्वाटोर गिरोन और मासिमिलियानो लातोरे के लिए इस सकारात्मक नतीजे का स्वागत किया।

पिछले महीने सरकारी वकीलों ने अपने एक आकलन में पाया था कि दोनों नौसैनिकों के खिलाफ सुनवाई के लिए पर्याप्त सबूत नहीं थे, जिसके बाद अदालत इस नतीजे पर पहुंची है।

गुएरिनी ने कहा कि यह एक साल की लंबी चली कार्रवाई को समाप्त करता है जिसके दौरान रक्षा मंत्रालय ने कभी भी दो नौसैनिकों और उनके परिवारों को अकेला नहीं छोड़ा।

गिरोने और लातोरे ने समुद्री डकैती रोधी मिशन के हिस्से के रूप में एक इतालवी तेल टैंकर की रक्षा करते हुए फरवरी 2012 में दक्षिणी भारतीय तट पर निहत्थे मछुआरों की गोली मारकर हत्या कर दी थी।

इस मामले में चली कानूनी कार्रवाई के कारण लगभग एक दशक तक इटली और भारत के बीच संबंधों में उतार-चढ़ाव आया और आखिरकार भारत ने अप्रैल 2021 में 10 करोड़ रुपये के मुआवजे के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया था।

जून में मामले को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि प्रत्येक परिवार को 4 करोड़ रुपये दिए जाएंगे और शेष 2 करोड़ रुपये मछुआरों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली नाव के मालिक को दिए जाएंगे।

लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इतालवी सरकार को अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले दो नौसैनिकों के खिलाफ तुरंत आपराधिक कार्यवाही शुरू करनी चाहिए और भारतीय अधिकारी मामले में सबूत मुहैया कराएंगे।

इटली का कहना था कि नौसैनिक अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में थे और उन्होंने चेतावनी देने के बाद भी मछुआरों के पीछे न हटने के कारण मछली पकड़ने वाली नाव पर गोलीबारी की थी।

भारत ने इसे समुद्र में दोहरी हत्या बताया था और इटली के कुलीन सैन मार्को मरीन रेजिमेंट के सदस्यों गिरोने और लातोरे को गिरफ्तार किया था और उन पर हत्या का आरोप लगाया था।

2015 में इटली मामले को हेग में स्थायी पंचाट न्यायालय (पीसीए) में ले गया, जिसने पिछले साल फैसला सुनाया कि नौसैनिक प्रतिरक्षा के हकदार थे।

2016 में उसी ट्रिब्यूनल ने गिरोन को इटली लौटने की अनुमति दी, जो नई दिल्ली में इतालवी दूतावास में रखे गए थे। वहीं, लातोरे दो साल पहले ही इलाज के लिए घर लौट चुके थे।

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