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संक्रमणमुक्त हुए कोविड-19 रोगी कर सकते हैं किडनी दान: अध्ययन

By भाषा | Updated: August 20, 2021 19:59 IST

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कोरोना वायरस संक्रमण से स्वस्थ हुए लोग सुरक्षित तरीके से अपनी किडनी दान कर सकते हैं। गुर्दा प्रतिरोपण के 31 मामलों पर किये गये एक अध्ययन में यह बात सामने आई है। पिछले साल महामारी की पहली लहर के बाद जुलाई से सितंबर के बीच ये प्रतिरोपण सर्जरी की गयी थीं। इन सभी मामलों में अंगदान करने वाले लोग वो थे जिन्हें हल्का संक्रमण रहा था। वसंत कुंज स्थित फोर्टिस अस्पताल के नेफ्रोलॉजी विभाग के निदेशक डॉ संजीव गुलाटी ने कहा कि कोविड-19 से स्वस्थ हुए व्यक्ति द्वारा अंगदान करने की स्थिति में प्रतिरोपण सर्जरी को लेकर कोई जानकारी उपलब्ध नहीं होने की वजह से अध्ययन कराया गया। अध्ययन में शामिल रहे गुलाटी ने कहा कि गुर्दा दान करने वाले लोगों की बहुत कमी है। उन्होंने कहा, ‘‘ऐसा इसलिए है क्योंकि इन दिनों परिवार छोटे-छोटे हैं और अनेक मामलों में परिवार के अनेक सदस्यों को मधुमेह होता है। इसके बाद कोरोना वायरस का डर जुड़ जाता है। अगर कोरोना वायरस से संक्रमणमुक्त हुए लोग अंगदान करना चाहें तो हम क्या कर सकते हैं?’’ गुलाटी ने कहा कि इस तरह की आशंका थी कि यदि कोविड-19 से स्वस्थ हुआ कोई व्यक्ति किडनी देता है तो सर्जरी के दौरान प्रतिरोपण कराने वाले व्यक्ति में मामूली स्तर का कोरोना वायरस संक्रमण पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि जिस मरीज के शरीर में किडनी प्रतिरोपित की जाती है उसे प्रतिरोपण प्रक्रिया के दौरान प्रतिरोधक क्षमता कम करने के लिए इम्युनोसप्रेसेंट दवाएं दी जाती हैं और इससे उन्हें संक्रमण का जोखिम होता है। गुलाटी ने कहा, ‘‘दुनियाभर में कोरोना वायरस महामारी शुरू होने पर किडनी प्रतिरोपण रोक दिये गये थे। बाद में हमने किडनी प्रतिरोपण के लिए मानक परिचालन प्रक्रिया का पालन करना शुरू किया जिसमें अंगदान करने वाले व्यक्ति की दो बार कोविड जांच करना शामिल है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमने अन्य संक्रामक बीमारियों पर भी ध्यान दिया। कोरोना वायरस से मिलता-जुलता सबसे आम संक्रमण फ्लू है। हमने कोरोना वायरस संक्रमण की अवधि पर ध्यान दिया। संक्रमणमुक्त हुए रोगियों की हमने एक महीने के अंदर दो बार आरटी-पीसीआर जांच की ताकि पता लग सके कि वे संक्रमण से पूरी तरह स्वस्थ हुए हैं या नहीं।’’ गुलाटी ने कहा कि अंगदान करने वालों की इस बात की भी जांच की गयी कि कोरोना वायरस की वजह से उनके किसी अन्य अंग को तो नुकसान नहीं पहुंचा। उन्होंने कहा, ‘‘हमने उनकी ईसीजी जांच, एचआरसीटी और अल्ट्रासाउंड किया और सुनिश्चित किया कि वे पूरी तरह स्वस्थ हों।’’ उन्होंने कहा, ‘‘रोगियों पर छह महीने तक नजर रखी गयी और हमने देखा कि प्रतिरोपण कराने वालों में सर्जरी के बाद कोविड-19 के लक्षण नहीं उभरे।’’ गुलाटी ने बताया कि यह अध्ययन चिकित्सा जगत की पत्रिका ‘ट्रांसप्लांटेशन’ में प्रकाशित किया गया है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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