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लद्दाख में तनावः गलवान वैली से दो किमी पीछे हटी चीनी सेना, भारतीय सेना सतर्क, इंडियन आर्मी भी पीछे

By सुरेश एस डुग्गर | Updated: July 6, 2020 18:41 IST

पहली बार नहीं है कि चीनी सेना अपनी शर्तें मनवा कर भारतीय इलाका खाली कर रही हो। सूत्रों के मुताबिक गलवान घाटी में चीनी सैनिकों ने जो अस्थाई निर्माण किए थे उन्हें हटाया जा रहा है। भारतीय सैनिक भी पीछे हटे हैं और बीच में एक ‘नो मैंस लैंड’ या बफर जोन बनाया जा रहा है।

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ठळक मुद्देचीनी सैनिकों ने गलवान नदी के मोड़ से हटना शुरू कर दिया है और इस इलाके से अस्थायी ढांचों और टेंट को हटा दिया गया है।सूत्रों ने कहा कि हमें यह देखना होगा कि क्या पीछे हटने और तनाव कम करने की यह एक स्थायी, वास्तविक प्रक्रिया है।सूत्रों ने बताया कि चीन की सेना पेट्रालिंग प्वाइंट 14, 15 और 17 पर टेंट और स्ट्रक्चर हटाते दिखाई दी है।

जम्मूः लद्दाख के मोर्चे पर गलवान वैली से चीनी सेना कुछ किमी पीछे हट गई है। गलवान वैली के कुछ इलाकों को बफर जोन बनाने की शर्त मनवाने के बाद ही चीनी सेना ने पीछे कदम हटाए तो सही पर साथ ही उसने भारतीय सेना को भी कुछ किमी पीछे हटने पर मजबूर कर दिया।

यह कोई पहली बार नहीं है कि चीनी सेना अपनी शर्तें मनवा कर भारतीय इलाका खाली कर रही हो। सूत्रों के मुताबिक गलवान घाटी में चीनी सैनिकों ने जो अस्थाई निर्माण किए थे उन्हें हटाया जा रहा है। भारतीय सैनिक भी पीछे हटे हैं और बीच में एक ‘नो मैंस लैंड’ या बफर जोन बनाया जा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, चीनी सैनिकों ने गलवान नदी के मोड़ से हटना शुरू कर दिया है और इस इलाके से अस्थायी ढांचों और टेंट को हटा दिया गया है। हालांकि सूत्रों ने कहा कि हमें यह देखना होगा कि क्या पीछे हटने और तनाव कम करने की यह एक स्थायी, वास्तविक प्रक्रिया है।

चीन की सेना पेट्रालिंग प्वाइंट 14, 15 और 17 पर टेंट और स्ट्रक्चर हटाते दिखाई दी

सूत्रों ने बताया कि चीन की सेना पेट्रालिंग प्वाइंट 14, 15 और 17 पर टेंट और स्ट्रक्चर हटाते दिखाई दी है। चीनी सेना ने अपने वाहनों को भी करीब 1.5 किलोमीटर पीछे हटा लिया। हालांकि चीनी सैनिक कितना पीछे हटे हैं ये वेरिफिकेशन के बाद ही कंफर्म हो पाएगा।

वेरिफिकेशन में तीन दिन का समय लग सकता है। चीन की सेना गलवान घाटी के कुछ हिस्सों से तंबू हटाते और पीछे हटती दिखी है। भारतीय सेना के सूत्रों ने सोमवार को यह जानकारी दी। सूत्रों ने कहा कि दोनों पक्षों के कोर कमांडरों के बीच हुए समझौते के तहत चीनी सैनिकों ने पीछे हटना शुरू किया है।

गलवान घाटी को अब बफर जोन बना दिया गया है

गलवान घाटी को अब बफर जोन बना दिया गया है ताकि आगे फिर से कोई हिंसक घटना न हो। सूत्रों के मुताबिक अभी वेरिफिकेशन की प्रकिया पूरी नहीं हुई है। एक सीनियर अधिकारी ने इसकी पुष्टि की कि सैनिक पीछे हटे हैं लेकिन कहा कि कितना पीछे हटे हैं यह वेरिफिकेशन के बाद कंफर्म हो पाएगा।

30 जून को कोर कमाडंर स्तर की मीटिंग में वेरिफेकेशन की प्रक्रिया भी तय की गई थी। जिसमें तय किया गया था कि एक कदम उठाने के बाद प्रूफ देखकर ही दूसरा कदम बढ़ाया जाएगा। वेरिफिकेशन में तीन दिन का समय लग सकता है। एक अधिकारी ने कहा कि जैसे चीन ने एक टैंट हटाया तो तीन दिन के अंदर यूएवी से उसकी फोटो ली जाएगी और फिर पेट्रोलिंग पार्टी जाकर फिजिकल वेरिफिकेशन भी करेगी। जब वेरिफिकेशन हो जाएगा उसके बाद दूसरा कदम उठाया जाएगा।

सूत्रों के मुताबिक, चीन सेना ने शर्त रखी है कि भारतीय सेना को भी  दुर्बुक-शयोक-दौलतबेग ओल्डी रोड पर गश्त को छोड़ना होगा और उसे कुछ किमी पीछे जाना होगा। फिलहाल भारतीय सेना पीछे हटने को राजी हो गई है लेकिन वह गश्त छोड़ने को इसके लिए राजी नहीं हुई है। रक्षा सूत्र कहते थे कि चीनी सेना अन्य करीब 6 इलाकों में भी डेरा जमाए बैठी है और वह वहां से कदम पीछे हटाने को राजी नहीं है। इनमें उत्तरी लद्दाख में गलवान घाटी और देपसांग, मध्य लद्दाख में हाट स्प्रिंग्स, पेंगोंग सो और चुशूल तक तो दक्षिणी लद्दाख में दमचोक और चुमार शामिल हैं।

सूत्रों ने इसकी पुष्टि की है कि चीनी सेना ने इन सभी इलाको में मजबूत मोर्चाबंदी करते हुए पिल बाक्स अर्थात मजबूत जमीन के भीतर बंकर बना लिए हुए हैं। एक अधिकारी का दावा था कि इनमें से कुछेक बंकरों के बारे में कहा जा रहा है कि वे परमाणु हमला तक सहन करने की शक्ति रखते हैं।

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