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प्रौद्योगिकी में प्रगति कर महाशक्ति बन सकता है भारत : राजनाथ

By भाषा | Updated: August 27, 2021 20:47 IST

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को कहा कि अगर भारत प्रौद्योगिकी में प्रगति कर लेता है तो वह महाशक्ति बन सकता है।वह यहां रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के ‘मानद्’ विश्वविद्यालय डिफेंस इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस टेक्नोलॉजी (डीआईएटी) में छात्रों और शोधकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे। सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश को नवाचार और अनुसंधान में प्रगति के पथ पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा, "सशस्त्र बलों, उद्योगों और शिक्षाविदों के सामूहिक प्रयासों के जरिए अनुसंधान और नवाचार में प्रगति के लिए रक्षा मंत्रालय द्वारा कुछ पहल शुरू की गई हैं तथा यह केवल परस्पर समझ और ज्ञान और बेहतर प्रथाओं को साझा करके ही हो सकता है।’’सिंह ने कहा कि रक्षा मंत्रालय ने नयी प्रतिभाओं को जोड़ने और आकर्षित करने तथा क्षेत्र से सशस्त्र बलों के कर्मियों से अनुभव और जानकारी प्राप्त करने के लिए "आईडीईएक्स" (रक्षा उत्कृष्टता के लिए नवाचार) नामक एक मंच बनाया है क्योंकि इसका सुरक्षा महत्व है। उन्होंने कहा कि केंद्र ने "आईडीईएक्स" के लिए 1,000 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। इसके अलावा, सरकार ने 300 स्टार्टअप को समर्थन देकर ‘एयरोस्पेस’ और रक्षा में अनुसंधान तथा नवाचार को बढ़ावा देने के लिए 500 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। सिंह ने पांच महीने में एक निजी कंपनी द्वारा भारतीय सेना को एक लाख हथगोलों की सफल आपूर्ति किए जाने का भी उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि कंपनी ने इंडोनेशिया को इसी तरह के हथगोले उच्च कीमत पर निर्यात किए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक हथगोले की भारत में कीमत 3,400 रुपये है और कंपनी ने इसी तरह के हथगोले इंडोनेशिया को 7,000 रुपये से अधिक कीमत पर निर्यात किए हैं। रक्षा मंत्री ने कहा, "मेरा कहना है कि अगर हम प्रौद्योगिकी में आगे बढ़ते हैं, तो भारत एक महाशक्ति बन सकता है। देश एक आर्थिक महाशक्ति बन सकता है।" सिंह ने कोविड अनुसंधान क्षेत्र में नौ पेटेंट प्राप्त करने के लिए संस्थानों के प्रयासों की भी सराहना की।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजन देश को आत्मानिर्भर बनाने का है। रक्षा मंत्री ने कहा, "इस लक्ष्य की ओर, हमने रक्षा प्रौद्योगिकी और विनिर्माण के स्वदेशीकरण के लिए कई कदम उठाए हैं। इन पहलों के लिए भविष्य के युद्ध के कौशल से सज्जित प्रौद्योगिकीविदों की बड़ी संख्या की आवश्यकता है।"सिंह ने डीआईएटी के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि इसे "राष्ट्रीय महत्व के संस्थान" का दर्जा मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह संस्थान राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए प्रौद्योगिकी के महत्व पर गौर करते हुए भविष्य की प्रौद्योगिकियों की पहचान करने और मानव संसाधन को प्रशिक्षित कर रहा है।उन्होंने कहा, मैं केवल सुरक्षा के बारे में बात नहीं कर रहा हूं। अगर हम अगले कुछ वर्षों में भारत को महाशक्ति बनाना चाहते हैं, तो यह उन्नत तकनीक के बिना संभव नहीं है और अगर इस प्रयास में कोई योगदान दे सकता है, तो ये आप जैसे लोग हैं जो ऐसा कर सकते हैं।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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