तमिलनाडु के तीन जिलों में 2016 तक हुआ था अवैध खनन, अदालत को बताया गया
By भाषा | Updated: November 13, 2021 20:41 IST2021-11-13T20:41:59+5:302021-11-13T20:41:59+5:30

तमिलनाडु के तीन जिलों में 2016 तक हुआ था अवैध खनन, अदालत को बताया गया
चेन्नई, 13 नवंबर मद्रास उच्च न्यायालय को ‘एमिकस क्यूरी’ ने सूचित किया है कि तमिलनाडु के दक्षिण में स्थित तीन तटवर्ती जिलों में 2016 तक कई हजार करोड़ रुपये के खनिजों का अवैध खनन हुआ और इस पर किसी ने ध्यान नहीं दिया।
मुख्य न्यायाधीश संजीब बनर्जी और न्यायमूर्ति पी डी ऑडिकेसवालु की पीठ द्वारा शुक्रवार को इस मुद्दे के संबंध में विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई के समय अधिवक्ता वी सुरेश ने अदालत को अपनी रिपोर्ट सौंप दी। अधिवक्ता सुरेश को मामले में अदालत का सहयोग करने के लिए पूर्व में न्याय मित्र (एमिकस क्यूरी) नियुक्त किया गया था।
‘एमिकस क्यूरी’ की रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि तिरुनलवेली, तूतीकोरिन और कन्याकुमारी ऐसे तीन जिले हैं जहां मूल्यवान खनिजों का बेरोकटोक अवैध खनन किया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि खनन संचालकों ने बड़ी मात्रा में रेत, गार्नेट, इल्मेनाइट, रूटाइल, जिरकोन, सिलीमेनाइट और ल्यूकोक्सिन जैसे खनिजों का खनन किया और इसका एक बड़ा हिस्सा गुप्त या गैरकानूनी तरीके से खनन किया गया।
महाधिवक्ता आर शणमुगसुंदरम ने सुरेश द्वारा दाखिल रिपोर्ट पर गौर करने के लिए समय मांगा। खनन कंपनी ‘वी वी मिनरल्स’ के वकील ने भी रिपोर्ट पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए समय दिए जाने का अनुरोध किया।
पीठ ने कहा कि कोई भी खनन संचालक जो रिपोर्ट पर आपत्ति जताना चाहता है, उसे एक सप्ताह के भीतर अपना जवाबी हलफनामा दाखिल करना चाहिए। राज्य तीन सप्ताह के भीतर खनन संचालकों द्वारा दाखिल जवाबी हलफनामों पर जवाब देगा। राज्य को यह भी बताना होगा कि तीनों जिलों में अवैध खनन रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए।
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