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धर्म संसद में हेट स्पीच पर सशस्‍त्र बलों के पूर्व प्रमुख भड़के, कहा जाति विशेष को टारगेट कर 'हिंदू राष्‍ट्र' बनाने की कवायद

By आजाद खान | Updated: January 1, 2022 11:54 IST

सशस्‍त्र बलों के पूर्व प्रमुखों ने हिरद्वार धर्म संसद पर बोलते हुए कहा कि इसमें एक जाति के खिलाफ हथियार उठाने और 'हिंदू राष्‍ट्र' को बनाने की बात कही गई है।

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ठळक मुद्दे हिरद्वार के धर्म संसद में हुए हेट स्पीच के खिलाफ सशस्‍त्र बलों के पूर्व प्रमुखों ने नाराजगी जताई है। उन लोगों ने पत्र लिखकर पीएम मोदी और राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद से अपनी बात कही है।उन्होंने इस धर्म संसद में ईसाइयों, दलितों और सिखों को निशाना बनाने का आरोप लगाया है।

नई दिल्‍ली: हिरद्वार में आयोजित धर्म संसद में हेट स्पीच को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए सशस्‍त्र बलों के पांच पूर्व प्रमुखों और सौ से अधिक अन्य प्रमुख ने इस पर सवाल उठाया है। उन लोगों ने राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद और पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अपनी बात रखी है। इन लोगों ने अपने पत्र में यह जिक्र किया है कि कैसे धर्म संसद में एक विशेष जाति को टारगेट किया गया है और खुलेआम मुस्लिमों के नरसंहान का आह्वान किया गया था। उनका यह भी कहना है कि देश में केवल मुसलमान ही नहीं बल्कि ईसाइयों, दलितों और सिखों पर भी अन्य अन्य रुप और रंग में निशाना बनाया जा रहा है। 

क्या कहा सशस्त्र बलों के 5 पूर्व प्रमुखों ने खत में

राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद और पीएम नरेंद्र मोदी को लिखे गए पत्र में सशस्त्र बलों के 5 पूर्व प्रमुखों कहा, 'हम 17 से 19 दिसंबर के बीच उत्‍तराखंड के हरिद्वार में आयोजित हिंदु साधुओं और अन्‍य नेताओं की धर्मसंसद में दिए गए भाषणों की सामग्री (कंटेट) से आहत है। इसमें लगातार हिंदू राष्‍ट्र की स्‍थापना के लिए आव्‍हाने किया गया और इसके लिए जरूरत पड़ने पर हथियार उठाने और हिंदू धम की रक्षा के लिए भारत के मुस्लिमों को मारने की भी बात कही गई। इन लोगों ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि धर्म संसद में जाति विशेष पर निशाना साधा गया है और हिंसा की पैरवी की गई है। उनका यह भी कहना था कि सभा में 'हिंदू राष्‍ट्र' के लिए संघर्ष करने की भी बात कही गई है।

धर्म संसद के वक्‍ताओं पर पहले से ही कई मामले दर्ज

आपको बता दें कि इन पूर्व प्रमुखों ने धर्म संसद के वक्‍ताओं के 'कड़वे बोल' एतराज जताया और कहा कि इससे देश में नफरत ही फैलेंगे। यही नहीं धर्म संसद के वक्‍ताओं को अपने दिए गए भाषणों पर कोई एतराज नहीं है और इस पर उनका कोई पछतावा भी नहीं है। इस धर्म संसद में कई वक्‍ताओं ने हिस्सा लिया था जिसमें से कई ऐसे वक्ता भी थे जिन पर पहले से ही कई मामले दर्ज हैं।  

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