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गुजरात दंगा: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- एसआईटी और आरोपियों के बीच मिलीभगत जैसा शब्द बेहद कड़ा, आज भी जारी रहेगी सुनवाई

By विशाल कुमार | Updated: November 17, 2021 07:40 IST

शीर्ष अदालत ने जकिया जाफरी के वकील कपिल सिब्बल से पूछा कि क्या वे एसआईटी के इरादे को इसके लिए जिम्मेदार ठहरा रहे हैं? और कहा कि मिलीभगत जैसा शब्द, शीर्ष अदालत द्वारा गठित एसआईटी के लिए बेहद कड़ा शब्द है।

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ठळक मुद्देजकिया जाफरी के वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि मिलीभगत के स्पष्ट उदाहरण हैं।सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मिलीभगत जैसा शब्द, शीर्ष अदालत द्वारा गठित एसआईटी के लिए बेहद कड़ा शब्द है।बुधवार को भी जारी रहेगी सुनवाई।

नई दिल्ली:सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को जकिया जाफरी के उन आरोपों पर आपत्ति जताई गई जिनमें हिंसा की जांच कर रही एसआईटी और गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कुछ आरोपियों के बीच सांठगांठ का आरोप लगाया गया और उन्हें क्लीन चिट दे दी गई।

शीर्ष अदालत ने जकिया जाफरी के वकील कपिल सिब्बल से पूछा कि क्या वे एसआईटी के इरादे को इसके लिए जिम्मेदार ठहरा रहे हैं? और कहा कि मिलीभगत जैसा शब्द, शीर्ष अदालत द्वारा गठित एसआईटी के लिए बेहद कड़ा शब्द है।

सिब्बल ने पीठ से कहा कि ''मिलीभगत के स्पष्ट उदाहरण'' हैं जोकि रिकॉर्ड से सामने आए हैं लेकिन एसआईटी ने दंगों में कथित व्यापक स्तर की साजिश को लेकर जांच नहीं की।

जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस सीटी रविकुमार की पीठ ने सिब्बल से पूछा, '' अब तक जमीनी स्तर पर स्थानीय पुलिस की मिलीभगत के बारे में आपकी शिकायत को हम समझ सकते हैं और हम इसे देखेंगे। आप यह एसआईटी के बारे में कैसे कह सकते हैं जिसका गठन अदालत द्वारा किया गया।'' 

पीठ ने सिब्बल से पूछा कि क्या याचिकाकर्ता एसआईटी द्वारा की गई जांच के तौर-तरीकों पर ''हमला'' कर रहा है। इस पर, वरिष्ठ वकील ने कहा, '' हां, ये ऐसा कुछ है जो मुझे परेशान करता है।'' 

इसके बाद पीठ ने कहा, ''आप एसआईटी के इरादों को जिम्मेदार कैसे ठहरा सकते हैं? ये वही एसआईटी है जिसने आरोपपत्र दाखिल किये और लोगों को सजा हुई। ऐसे मामलों में कोई शिकायत नहीं जतायी गई और इन मामलों में आपने एसआईटी द्वारा किये गए कार्य की सराहना की।'' 

सिब्बल ने कहा कि उन मामलों में भी शिकायत जतायी गई जिनमें आरोपपत्र दाखिल किये गए और रिकॉर्ड में राज्य तंत्र के गठजोड़ के संकेत मिले। 

सिब्बल ने कहा, '' मैं यह दिखाउंगा कि साबरमती एक्सप्रेस त्रासदी के बाद, जो हुआ वह यह था कि अपराधियों की जांच करने के बजाय जांचकर्ता वास्तव में अपराध के सहयोगी बन गए। इसका यह मतलब नहीं है कि पूरा पुलिस तंत्र सहयोग कर रहा था।'' उन्होंने पीठ से कहा, ''मिलीभगत के ऐसे उदाहरण हैं जोकि रिकॉर्ड से सामने आते हैं। नौकरशाही, राजनीतिक वर्ग, वीएचपी, आरएसएस और अन्य के बीच गठजोड़ हो गया था। वहां मजूबत गठजोड़ था।'' 

सिब्बल ने कहा कि एसआईटी को ''स्टिंग ऑपरेशन'' के बारे में जानकारी थी, जिसका उपयोग दंगे के अन्य मामलों में किया गया और दोषियों को सजा हुई, लेकिन उन लोगों की जांच नहीं की गई। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या एसआईटी उन लोगों को बचाने का प्रयास कर रही थी। 

इस पर, पीठ ने कहा, ''आप अपनी दलीलें दे सकते हैं कि ये एसआईटी को करना था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। हो सकता है कि निर्णय में त्रुटि हुई हो और इसे स्पष्ट करना होगा।''

जकिया जाफरी ने वर्ष 2002 के दंगों के दौरान गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी सहित 64 लोगों को एसआईटी की क्लीनचिट को चुनौती दी है। 

जकिया दिवंगत कांग्रेस नेता एहसान जाफरी की पत्नी हैं जिनकी 28 फरवरी 2002 को सांप्रदायिक हिंसा के दौरान अहमदाबाद की गुलबर्ग सोसाइटी में हत्या कर दी गई थी। 

हिंसा में एहसान जाफरी सहित 68 लोगों की मौत हुयी थी। इस घटना से एक दिन पहले गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस के एक डिब्बे में आग लगने से 59 लोगों की मौत हो गई थी और गुजरात में दंगे हुए थे।

इस मामले में मंगलवार को सुनवायी पूरी नहीं हो सकी जोकि बुधवार को भी जारी रहेगी।

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