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छत्तीसगढ़ में निजी अस्पतालों को अनुदान, स्वास्थ्य मंत्री ने जताया असंतोष

By भाषा | Updated: June 29, 2021 17:56 IST

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रायपुर, 29 जून छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधा के विस्तार के लिए निजी अस्पतालों को अनुदान देने के राज्य सरकार के फैसले पर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री ने ही असंतोष जताया है।

राज्य के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा कि यदि ग्रामीण क्षेत्रों में अनुदान प्राप्त निजी अस्पताल मरीजों से चिकित्सा शुल्क लेते हैं तब यह निशुल्क स्वास्थ्य सेवा की अवधारणा के खिलाफ है।

इस महीने की 26 तारीख को राज्य के जनसंपर्क विभाग ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया था कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूती प्रदान करनेके लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अब निजी क्षेत्र का भी सहयोग लेने का निर्देश दिया है।

विज्ञप्ति के अनुसार मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण इलाकों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएं उपलब्ध हो सके, इसके लिए सभी शासकीय अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ ही स्वास्थ्य बुनियादी ढांचा के निर्माण में निजी क्षेत्र का सहयोग भी लिया जाएगा। विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में अस्पताल निर्माण के लिए निजी क्षेत्रों को राज्य सरकार द्वारा अनुदान भी दिया जाएगा। यह अनुदान राज्य सरकार द्वारा सेवा क्षेत्र के उद्योगों को दिए जा रहे अनुदान के तहत होगा।

सिंहदेव से संवाददाताओं ने सोमवार को राज्य सरकार के इस फैसले के बारे में सवाल किया तब उन्होंने कहा कि वह इस तरह की योजना के पक्ष में नहीं हैं तथा इस संबंध में उनसे कोई चर्चा नहीं की गई है। वहीं मंगलवार को मंत्री ने भाषा से बातचीत के दौरान कहा कि इस संबंध में उनसे कोई चर्चा नहीं हुई है तथा उन्हें इसके बारे में समाचार माध्यमों से ही जानकारी मिली है।

मंत्री ने कहा कि वह मान रहे हैं कि यह केवल एक प्रस्ताव है, क्योंकि इस संबंध में मंत्रिमंडल स्तर पर कोई चर्चा नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि वह इससे सहमत नहीं हैं और उनसे यदि इस संबंध में राय मांगी जाएगी तब वह लिखित में अपनी राय देंगे।

सिंहदेव ने कहा कि वह शुरू से ही सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवा योजना के पक्ष में रहे हैं। कांग्रेस पार्टी ने वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान अपने घोषणापत्र में स्वास्थ्य का अधिकार योजना का जिक्र किया था। छत्तीसगढ़ की कांग्रेस इकाई और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव और वर्ष 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान अपने घोषणा पत्र में सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवा योजना शुरू करने का उल्लेख किया है।

मंत्री ने कहा कि सरकार यदि शासकीय अनुदान के माध्यम से निजी अस्पतालों को बढ़ावा दे रही है और अस्पताल मरीजों से शुल्क ले रहे हैं तब यह निशुल्क स्वास्थ्य सेवा की अवधारणा के खिलाफ है। यदि निजी अस्पताल मरीजों से इलाज का शुल्क नहीं लेते हैं तब उन्हें अनुदान देने में कोई आपत्ति नहीं है।

सिंहदेव ने कहा कि यदि जनता का पैसा निजी क्षेत्र को दिया जाता है और फिर वह जनता से भी पैसा लेंगे तब यह नीति बिल्कुल उचित नहीं है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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