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गूगल ने डूडल बनाकर किया कमला दास की "माई स्टोरी" को याद

By स्वाति सिंह | Updated: February 1, 2018 09:28 IST

कमला दास की आत्मकथा माई स्टोरी ने प्रकाशित होते ही साहित्यिक जगत में हलचल मचा दी थी। किताब में उन्होंने अपने निजी जीवन से जुड़ी बातों को सार्वजनिक किया था जो उस जमाने में हिम्मत की बात समझी गयी।

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भारत की प्रमुख कवियत्री और मलयालम लेखक कमला दास, जिन्होंने महिलाओं के यौन जीवन और वैवाहिक समस्याओं के बारे में लिखने की हिम्मत की थी।  गुरुवार (01 फरवरी) को गूगल ने उनका डूडल बनाकर सम्मानित किया है। कमला दास अपनी मातृभाषा मलयालम और अंग्रेजी में लिखती थीं। कमला दास महिला के मुद्दों, बच्चों की देख-रेख और राजनीति के विषयों पर लेख भी लिखा करती थीं।  

कमला दास की कल्ट क्लासिक आत्मकथा माई स्टोरी (मेरी कहानी) एक फ़रवरी 1977 को प्रकाशित हुई थी।  वह हिन्दू परिवार में पैदा हुई लेकिन 68 की उम्र में उन्होंने अपना धर्म परिवर्तन किया और इस्लाम धर्म अपनाया।  इन्हें कमला सुरैया के नाम से भी जाना जाता है।

कमला दास का जन्म 31 मार्च, 1934 को केरल में हुआ था।  अपने स्थानीय पाठकों के लिए उन्होंने अपना नाम कलम नाम माधवी कुट्टी अपनाया।   वह घरेलू और यौन उत्पीड़न के खिलाफ संघर्ष कर रही महिलाओं को प्रेरित करती थी।  उन्होंने 20 से अधिक किताबें लिखी हैं।  हमारे देश में कविता में उनके बहुत बड़ा योगदान है।  

कमला दास 15 साल की उम्र से ही कवितायें लिखने लगी थीं। उनकी मा बालमणि अम्मा भी एक अच्छी कवयित्री थीं और उनके लेखन का कमला दास पर बहुत असर पड़ा। इसी वजह से उन्होंने भी कविताएँ लिखना शुरू किया। वह विवादों में तब आईं जब उन्होंने अपनी आत्मकथा को 'माय स्टोरी' नाम से लिखा। यह किताब बहुत विवादास्पद रही और इस किताब का पंद्रह विदेशी भाषाओं में अनुवाद हुआ। 

कमला दास की अंग्रेजी में 'द सिरेंस', 'समर इन कलकत्ता', 'दि डिसेंडेंट्स', 'दि ओल्डी हाउस एंड अदर पोएम्स ', 'दि अन्ना'मलाई पोएम्सल' और 'पद्मावती द हारलॉट एंड अदर स्टोरीज' इसके अलावा कई पुस्तकें प्रकाशित हुईं।  मलयालम में 'पक्षीयिदू मानम', 'नरिचीरुकल पारक्कुम्बोल', 'पलायन', 'नेपायसम', 'चंदना मरंगलम' और थानुप्पू' आदि कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।  कमला दास की मौत 31 मई, 2009 में पुणे में हुई हुई।

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