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"मैं कांग्रेस की बालिका वधू हूं....शमशान जाना मंजूर है लेकिन कांग्रेस से अलग नहीं", AAP के सीएम कैंडिडेट नहीं बनने पर हरीश रावत ने कही यह बात

By आजाद खान | Updated: December 29, 2021 08:18 IST

पूर्व सीएम हरीश रावत ने आम आदमी पार्टी की ओर से उत्तराखंड के सीएम उम्मीदवार के पद देने की बात को इंकार किया और कहा कि वे कांग्रेस की बालिका वधू है।

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ठळक मुद्देएक कार्यक्रम के दौरान पूर्व सीएम हरीश रावत ने खूद को कांग्रेस की बालिका वधू बताया है।उन्होंने बीजेपी पर भी हमला बोला और कहा सीबीआई, इनकम टैक्स और ईडी के जरिए नेताओं को डराया जाता है।पूर्व सीएम हरीश रावत ने अरविंद केजरीवाल को उत्तराखंड की राजनीति को समझने के लिए तपस्या करने की बात कही है।

भारत: उत्तराखंड के पूर्व सीएम हरीश रावत ने खूद को कांग्रेस की बालिका वधू बताया है और कहा कि वे पार्टी के लिए बालिका वधू के रुप में शमशान जाना मंजूर है, लेकिन कांग्रेस से अलग होना मंजूर नहीं है। हरीश रावत ने यह बयान तब दिया जब वे एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे और उनसे जब आम आदमी पार्टी की ओर से उत्तराखंड के सीएम के उम्मीदवार होने की बात कही गई थी। इस कार्यक्रम में रावत ने बीजेपी पर भी हमला बोला और कहा कि जहां पर चुनाव होने वाले होते हैं, वहां सीबीआई और ईडी का डर दिखाया जाता है। कार्यक्रम में रावत यह भी बोले की राज्य में चुनाव को लेकर कांग्रेस की पूरी तैयारी है और उनकी पार्टी 2022 में जीत हासिल करेगी।

पूर्व सीएम हरीश रावत ने खूद को ऐसे बताया कांग्रेस की बालिका वधू

इस कार्यक्रम में हरीश रावत से जब यह सवाल पूछा गया कि आपको आम आदमी पार्टी की ओर से उत्तराखंड के सीएम के उम्मीदवार पद देने की पेशकश की गई थी तो उन्होंने इस पर कहा कि वे कांग्रेस की बालिका वधू है। उन्होंने कहा कि पार्टी उन्हें कुछ दे या न दे, लेकिन वे अपने बात हमेशा निर्भीक होकर कहते हैं। हरीश रावत ने यह भी कहा कि बालिका वधू के रुप में उन्हें शमशान जाना मंजूर है लेकिन कांग्रेस से अलग होना मंजूर नहीं है। हरीश रावत ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि जिस भी राज्य में चुनवा होने वाला होता है, वहां के नेताओं पर सीबीआई, इनकम टैक्स और ईडी जैसे मगरमच्छ छोड़े जाते हैं, लेकिन उनका सामना हमें तैर कर पार करना चाहिए। 

दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल को दी यह सलाह

पूर्व सीएम हरीश रावत ने दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल को सलाह देते हुए कहा उन्हें अपनी पार्टी पर वोट कटवा का निशान नहीं लगाना चाहिए। उन्होंने आगे भी कहा कि उत्तराखंड की विभिन्ना तो समझने के लिए केजरीवाल को 5-7 साल की तपस्या की जरूरत पड़ेगी। इसके साथ रावत ने यह भी कहा कि हम अटल बिहारी और राजीव गांधी के जमाने के लोग हैं, जब दलबदल को जलत और पाप माना जाता था। हम लोकतंत्र के जरिए जनता का विश्वास जीतकर सरकार बनाने में विश्वास ही रखते है।

टॅग्स :भारतहरीश रावतकांग्रेसBJPअरविंद केजरीवाल
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