लाइव न्यूज़ :

फोकस ऐप्स: उत्पादकता का समाधान या सिर्फ़ एक भ्रम?

By संदीप दाहिमा | Updated: January 1, 2026 15:51 IST

यह कोई नई बात नहीं है कि मौजूदा दौर ध्यान भटकने और स्मार्टफोन की लत का है। मोबाइल फोन बार-बार ध्यान भंग करते हैं और स्क्रॉल करने का लालच देते हैं।

Open in App

यह कोई नई बात नहीं है कि मौजूदा दौर ध्यान भटकने और स्मार्टफोन की लत का है। मोबाइल फोन बार-बार ध्यान भंग करते हैं और स्क्रॉल करने का लालच देते हैं। यहां तक कि जब हम फोन का इस्तेमाल नहीं कर रहे होते, तब भी उसकी मौजूदगी एकाग्रता में बाधा बनती है। इसी समस्या से निपटने के लिए ऐप डेवलपर्स ने उत्पादकता और फोकस ऐप्स की भरमार कर दी है, जो टाइमर, ऐप ब्लॉकिंग, आदतों की याद दिलाने वाली सूचनाओं और रिवॉर्ड सिस्टम के जरिए ध्यान केंद्रित रखने का वादा करते हैं। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि ध्यान बनाए रखना इतना मुश्किल क्यों होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, फोकस की कमी मुख्य रूप से आत्म-नियमन की कठिनाइयों से जुड़ी है-यानी लक्ष्य हासिल करने के लिए अपने विचारों, भावनाओं और व्यवहार को नियंत्रित करने की क्षमता। जब कोई काम उबाऊ या तनावपूर्ण लगता है, तो असहजता पैदा होती है और इससे राहत पाने के लिए लोग अक्सर स्मार्टफोन की ओर रुख करते हैं, भले ही इससे काम में बाधा आए।

वैज्ञानिक शोध यह जरूर संकेत देते हैं कि मल्टीटास्किंग और लगातार डिजिटल व्यवधान जैसी तकनीकी आदतें कुछ लोगों में ध्यान भटकने की प्रवृत्ति बढ़ाती हैं। यानी फोकस करने की क्षमता भले कम न हुई हो, लेकिन आधुनिक जीवन उस पर ज्यादा दबाव डाल रहा है। इन्हीं चुनौतियों के बीच फोकस ऐप्स तेजी से लोकप्रिय हुए हैं। ये ऐप्स गेम और आकर्षक पात्रों का उपयोग कर उपयोगकर्ताओं को केंद्रित होकर काम करने के लिए प्रेरित करते हैं। ऐसे ही एक ऐप ‘फोकस फ्रेंड’ ने अगस्त में ऐप स्टोर पर लॉन्च के पहले महीने में सबसे ज्यादा डाउनलोड होने वाले ऐप्स में जगह बनाई। यह ऐप उपयोगकर्ताओं को फोकस टाइमर सेट करने के लिए प्रोत्साहित करता है। इस दौरान एक वर्चुअल कैरेक्टर पृष्ठभूमि में बुनाई करता रहता है। यदि उपयोगकर्ता प्रतिबंधित ऐप्स खोलता है तो बुनाई उधड़ जाती है, जबकि फोकस बनाए रखने पर डिजिटल इनाम मिलते हैं।

मनोवैज्ञानिक दृष्टि से ये ऐप्स तात्कालिक इनाम, प्रतिबद्धता और निरंतरता जैसे सिद्धांतों का उपयोग करते हैं। हालांकि, शोध बताते हैं कि ऐसे ऐप्स के प्रभाव पर पर्याप्त वैज्ञानिक साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। एक अध्ययन में पाया गया कि गेम आधारित फोकस ऐप्स उपयोगकर्ताओं को पसंद तो आते हैं, लेकिन वे सरल उपायों-जैसे फोन को ग्रेस्केल मोड में रखने-की तुलना में कम प्रभावी साबित होते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि फोकस ऐप्स का समझदारी से इस्तेमाल किया जाना चाहिए। सीमित समय के लिए स्पष्ट कार्यों के साथ इनका उपयोग करना और एक सप्ताह बाद यह समीक्षा करना जरूरी है कि क्या ऐप वास्तव में उत्पादकता बढ़ा रहा है। अंततः, विशेषज्ञों का मानना है कि फोकस ऐप्स ध्यान भटकने से कुछ हद तक बचा सकते हैं, लेकिन वे आंतरिक कारणों को हल नहीं कर सकते। बेहतर एकाग्रता के लिए सबसे अहम कदम आत्म-विश्लेषण और यह समझना है कि ध्यान भटकता क्यों है-क्योंकि समाधान डाउनलोड से नहीं, समझ से आता है।

Open in App

संबंधित खबरें

भारतपरीक्षा पे चर्चाः 9वें एडिशन और 3.56 करोड़ पंजीकरण, बच्चे, शिक्षक और अभिभावक से संवाद करेंगे पीएम मोदी

कारोबारनए साल पर तोहफा, सीएनजी, घरेलू पीएनजी की कीमतें कम, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड, झारखंड, छत्तीसगढ़, राजस्थान और ओडिशा में लागू

कारोबार6,37,90,68,254 रुपये का जीएसटी जुर्माना, वोडाफोन आइडिया पर शिकंजा

कारोबार21वां सदस्य बुल्गारिया, 2026 के पहले दिन से यूरो मुद्रा अपनाया, 19 साल बाद...

क्राइम अलर्टहोम वर्क के बहाने बुलाकर मोबाइल पर आपत्तिजनक चीजें दिखाकर गलत तरीके से छूना?, तीसरी-चौथी कक्षा के छात्र-छात्राओं का यौन उत्पीड़न करता था शिक्षक नवल किशोर

भारत अधिक खबरें

भारतगर्भ में 16 सप्ताह और 1 दिन का जीवित भ्रूण, गर्भपात कराने के लिए पत्नी की सहमति ही मायने?, पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने कहा-पति का कोई हक नहीं

भारतभारत और पाकिस्तान ने परमाणु प्रतिष्ठानों की सूची का आदान-प्रदान किया, देखिए लिस्ट

भारत2026 में मानवरहित गगनयान मिशन और निजी रॉकेट लांचर, अंतरिक्ष क्षेत्र की प्रमुख बातें

भारतPMC Election 2026: भाजपा को बड़ा झटका, विवाद के बीच उम्मीदवार पूजा मोरे ने नामांकन लिया वापस

भारतMost Dangerous Rivers: विलुप्त होने के कगार पर 32 नदियां, गंभीर संकट में 60 नदी?, खड़ी सौरा, दुहवा, सिर्मनिया, किऊल, हरोहर, बदुआ, चांदन, ओढ़नी, चीर और चंद्रभागा बेहाल