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असम में बाढ़ः सात और की मौत, जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 33, 15 लाख निवासी प्रभावित

By भाषा | Updated: July 1, 2020 21:38 IST

असम में बाढ़ से हालात खराब हो रहा है। 33 में से 21 जिलों में स्थिति खराब है। अभी तक 33 लोगों की मौत हुई है। 15 लाख लोग प्रभावित हैं।

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ठळक मुद्देरिपोर्ट के अनुसार बारपेटा जिले में तीन लोगों की जान चली गई और धुबरी, नागांव, नलबारी और कचर जिलों में एक-एक व्यक्ति को अपनी जान गंवानी पड़ी।असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने एक रिपोर्ट में बताया कि राज्य के 33 में से 21 जिलों में रहने वाले लगभग 15 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।उत्तर भारत में मौसम मुख्य रूप से उमसभरा रहा, जबकि पश्चिमी, मध्य, पूर्वी और पूर्वोत्तर क्षेत्रों के कई इलाकों में मानसून की बारिश हुई।

गुवाहाटीः असम के विभिन्न हिस्सों में बारिश और भूस्खलन से सात लोगों की मौत हो गई। इन्हें मिलाकार राज्य में अब तक 33 लोगों की मौत हो चुकी है। असम में बाढ़ और इसकी वजह से विभिन्न स्थानों पर भूस्खलन होने के कारण सात और लोगों की मौत हो गई जिसके बाद इस प्राकृतिक आपदा से संबंधित घटनाओं से जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 33 हो गई।

सरकार की ओर से बुधवार को जारी एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने एक रिपोर्ट में बताया कि राज्य के 33 में से 21 जिलों में रहने वाले लगभग 15 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार बारपेटा जिले में तीन लोगों की जान चली गई और धुबरी, नागांव, नलबारी और कचर जिलों में एक-एक व्यक्ति को अपनी जान गंवानी पड़ी।

असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) की रिपोर्ट के मुताबिक असम के विभिन्न इलाकों में बारिश और भूस्खलन से सात और लोगों की मौत हो गई। इसके साथ ही राज्य में इस प्राकृतिक आपदा में जान गंवाने वालों की संख्या 33 हो गई है। असम के 33 में से 21 जिलों के करीब 15 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। राज्य के बारपेटा जिले में तीन लोगों की मौत बारिश और भूस्खलन की वजह से हुई। वहीं धुबरी, नौगांव, नलबाड़ी और कछार जिले में भी एक-एक व्यक्ति की मौत दर्ज की गयी है।

21 जिलों में हालात खराब

असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने कहा कि धेमाजी, लखीमपुर, विश्वनाथ, चिरांग, नलबाड़ी, बारपेटा, बोंगईगांव, कोकराझार, धुबरी, दक्षिण सालमारा, गोलपारा, कामरूप, मोरीगांव, होजई, नौगांव, गोलाघाट, जोरघाट, माजुली, शिवसागर, डिब्रूगढ़, तिनसुकिया और पश्चिम कार्बी आंगलोंग जिलों में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है।

मामूली सुधार हुआ लेकिन स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है। उत्तर भारत में मौसम मुख्य रूप से उमसभरा रहा, जबकि पश्चिमी, मध्य, पूर्वी और पूर्वोत्तर क्षेत्रों के कई इलाकों में मानसून की बारिश हुई। असम में एक आधिकारिक बुलेटिन के अनुसार, बाढ़ से प्रभावित कुल 25 जिलों में से दो जिले- उदलगुरी और कामरूप (शहर) में बाढ़ का पानी कम हुआ। बाढ़ ने 15 लाख से अधिक लोगों को प्रभावित किया है और 33 लोगों की जान ले ली।

जून में हुई ‘अत्यधिक’ बारिश, जुलाई में भी अच्छी बरसात के आसार : मौसम विभाग

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने मंगलवार को कहा कि जून महीने में अत्यधिक बारिश हुई और जुलाई में भी अच्छी वर्षा का अनुमान है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जून महीने में दीर्घकालिक आवधिक औसत (एलपीए) की 118 प्रतिशत वर्षा हुई जिसे अत्यधिक बारिश माना जाता है। विभाग ने कहा कि पिछले 12 साल में, इस साल जून सबसे अधिक भीगा रहा। मानसून के सीजन में 1961-2010 के बीच देश में दीर्घकालिक आवधिक औसत (एलपीए) बारिश 88 सेंटीमीटर रही।

90-96 फीसदी के बीच बारिश ‘‘सामान्य से कम’’ मानी जाती है और 96-104 फीसदी बारिश ‘‘सामान्य’’ मानी जाती है। एलपीए की 104 -110 फीसदी वर्षा ‘‘सामान्य से अधिक’’ और 110 फीसदी से अधिक वर्षा ‘‘अत्यधिक’’ मानी जाती है। मौसम विभाग के मध्य भारत उपसंभाग में जून में हुई वर्षा एलपीए की 131 फीसदी रही। इस क्षेत्र में गोवा, कोंकण, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ आते हैं। पूर्वी और पूर्वोत्तर उप संभाग में हुई वर्षा एलपीए की 116 फीसदी रही। असम में बाढ़ आई और बिहार में भी अत्यधिक बरसात हुई।

हालांकि मौसम विभाग के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने कहा कि इन इलाकों में अगले पांच से दस दिन के भीतर बरसात में कमी आएगी। उत्तरपश्चिम उप संभाग में वर्षा एलपीए की 104 फीसदी रही और दक्षिण में यह एलपीए की 108 फीसदी रही। मौसम विभाग ने जुलाई माह में एलपीए की 103 फीसदी वर्षा का अनुमान जताया है। महापात्र ने कहा, ‘‘जुलाई में अच्छी बारिश होने की उम्मीद है।’’ उन्होंने बताया कि गुजरात के तट के निकट तथा पूर्वी-मध्य भारत के ऊपर दो चक्रवात बन रहे हैं। इससे मध्य तथा दक्षिण भारत में अगले पांच से दस दिन में अच्छी बारिश होगी। 

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