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अभियान चलाकर विश्वविद्यालयों के रिक्त पदों को भरें : प्रधान ने कुलपतियों से कहा

By भाषा | Updated: September 3, 2021 18:52 IST

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केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने शुक्रवार के केंद्रीय विश्वविद्यालयों में अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्य पिछड़े वर्गो, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गो आदि के 6,229 रिक्त पदों को अगले कुछ महीनों में अभियान चलाकर भरने की आवश्यकता पर बल दिया और इसके लिए संबंधित कुलपतियों से अगले सप्ताह विज्ञापन जारी करने को कहा । केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने 45 केंद्रीय विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के साथ डिजिटल माध्यम से बैठक में यह बात कही । प्रधान ने कहा कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों में रिक्तियों को भरा जाना एक महत्वपूर्व विषय है। उन्होंने कहा कि इन विश्वविद्यालयों में कुल 6,229 पद रिक्त हैं जिसमे अनुसूचित जाति के 1,012 पद, अनुसूचित जाति के 592 पद, अन्य पिछड़ा वर्ग के 1,767 पद, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के 805 पद, दिव्यांग श्रेणी के 350 पद तथा अन्य सामान्य वर्ग के पद रिक्त हैं । शिक्षा मंत्री ने कहा कि सितंबर महीना महत्वपूर्ण है । इस महीने में शिक्षक पर्व मनाया जायेगा । पांच सितंबर को राष्ट्रपति और सात सितंबर को प्रधानमंत्री का संबोधन होगा । उन्होंने कहा, ‘‘ हम इस अवसर पर केंद्रीय विश्वविद्यालयों में रिक्तियों को अभियान के रूप में भरने की दिशा में कार्य करें । सितंबर, अक्तूबर महीने में इन छ हजार से अधिक रिक्तियों को भरें । ’’ धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा, ‘‘ सभी रिक्तियों के संबंध में अगले सप्ताह विज्ञापन आ जाना चाहिए, तभी इस अभियान को पूरा किया जा सकेगा ।’’ प्रधान ने 45 केंद्रीय विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के साथ राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का क्रियान्वयन, अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट, खुली और ऑनलाइन शिक्षा, अकादमिक सत्र 2021-22 की शुरूआत, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के शिक्षकों की बकाया रिक्तियों को भरा जाना एवं आजादी के अमृत महोत्सव जैसे विषयों पर चर्चा की । उच्च शिक्षा के महत्व को रेखांकित करते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों का दायित्व है कि अनुसंधान एवं विकास कार्यो को भारत की जरूरतों के हिसाब से आगे बढ़ाया जाए। नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उल्लेख करते हुए प्रधान ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू होना शुरू हो गया है । कुछ विश्वविद्यालयों ने अपनी जिम्मेदारी निभायी भी है और नयी नीति के अनुरूप पाठ्यक्रम तैयार करने सहित अन्य कार्यो पर काम शुरू किया है। उन्होंने इस संदर्भ में दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) द्वारा वर्तमान तीन साल के पाठ्यक्रम के साथ चार वर्षीय कोर्स शुरू करने के कार्य का जिक्र किया । शिक्षा मंत्री ने कहा कि पठन पाठन विश्वविद्यालयों का प्राथमिक कार्य है । हम सभी छात्र रहे हैं और छात्र का स्वभाव विरोधी होता है । संस्थान में अनुशासन होना चाहिए लेकिन लोकतंत्र में रूख साथ लेकर चलने वाला रहना पड़ेगा । धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा, ‘‘ उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नयी नीति को आमसहमति के आधार पर लागू करना चाहिए । इसमें रचनात्मकता एवं नवाचार पर जोर देने के साथ नियमित रूप से एवं समयबद्ध तरीके से पाठ्यक्रम को अद्यतन करना जरूरी है। ’’ उन्होंने केंद्रीय विश्वविद्यालयों के कुलपतियों से कहा, ‘‘ यह तभी संभव होगा जब सभी इस दिशा में प्रयास करेंगे । आप सभी को इसे अपने तरीके से लागू करना है।’’ उन्होंने जर्मन एवं विभिन्न यूरोपीय भाषाओं, अरबी, जापानी भाषा पढ़ने के महत्व पर जोर दिया।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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