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द्रमुक ने तमिलनाडु में अन्नाद्रमुक को निशाने पर ले अपना चुनाव अभियान शुरू किया

By भाषा | Updated: December 20, 2020 18:38 IST

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चेन्नई, 20 दिसंबर तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव होने से कुछ महीने पहले, प्रमुख विपक्षी दल द्रमुक ने अपनी चिर प्रतिद्वंद्वी एवं राज्य में सत्तारुढ़ अन्नाद्रमुक के खिलाफ रविवार को मोर्चा खोलने के साथ ही अपना चुनाव अभियान शुरू कर दिया और पलानीस्वामी सरकार पर “शासन क्षमता की कमी” का आरोप लगाया।

द्रमुक ने राष्ट्रीय पात्रता व प्रवेश परीक्षा (नीट) से जुड़ी छात्रों की आत्महत्याओं जैसे संवेदनशील मुद्दे उठाए।

ट्विटर पर “वीरिजेक्टएडीएमके” यानी ‘हम अन्नाद्रमुक को अस्वीकार करते हैं’ के शीर्षक से एक अभियान चलाया गया, जिसमें कृषि और शिक्षा जैसे क्षेत्रों के संवेदनशील मुद्दों को उठाकर अप्रैल-मई में होने वाले विधानसभा चुनावों में लोगों से अन्नाद्रमुक को हराने का आग्रह किया गया।

द्रमुक के जिला सचिवों सहित मुख्य पदाधिकारियों की बैठक के दौरान जारी किए गये एक वीडियो में पार्टी प्रमुख एम के स्टालिन ने कहा, ‘‘ पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी 16,000 से अधिक गांवों और वार्डों का दौरा करेंगे, ताकि ‘ग्राम सभाएं’ आयोजित की जा सकें और अभियान के हिस्से के रूप में अन्नाद्रमुक सरकार के खिलाफ प्रस्ताव स्वीकार किये जाएंगे।

बैठक में स्टालिन ने 200 सीटें जीतने का पार्टी पदाधिकारियों के लिए लक्ष्य निर्धारित किया। उन्होंने दावा किया कि द्रमुक कई मोर्चे पर हमले का सामना कर रहा है, जिनमें कुछ लोगों द्वारा साजिश के तहत अपनी खुद की राजनीतिक पार्टी बनाना भी शामिल है।

2011 से सत्ता से बाहर द्रमुक सत्ता में वापस आने और अन्नाद्रमुक को गद्दी से उतारने के लिए पूरी तरह से प्रयास कर रही है।

उल्लेखनीय है कि एक दिल पहले ही मुख्यमंत्री के. पनानीस्वामी ने अपने गृह जिले सलेम से अपना चुनाव अभियान शुरू किया है।

स्टालिन ने वीडियो में दावा किया, ‘‘अन्नाद्रमुक सरकार के कुशासन से समूचा तमिलनाडु प्रभावित हुआ है। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक पूरी शासन व्यवस्था ध्वस्त हो गई है। ’’

पार्टी ने कहा कि ग्राम सभा की बैठकें 23 दिसंबर से 10 जनवरी तक होने का कार्यक्रम है।

विपक्षी पार्टी नीट से जुड़ी छात्रों की आत्महत्याओं के मुद्दे को प्रमुखता से उठाएगी। इन घटनाओं के चलते इस परीक्षा के खिलाफ राज्य में रोष छा गया था।

द्रमुक नेता उदयनिधि स्टालिन और कनीमोई पहले ही चुनाव प्रचार करने के लिए मैदान में उतर चुके हैं, जबकि स्टालिन चुनाव से पहले डिजिटिल माध्यमों से बैठकों को संबोधित करते रहे हैं।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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