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जानिए कैबिनेट मंत्री , राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और राज्य मंत्री में अंतर, किसे मिलता है कितना वेतन

By शिवेन्द्र कुमार राय | Updated: June 11, 2024 12:36 IST

अपने तीसरे कार्यकाल में नरेंद्र मोदी ने कुल 71 मंत्रियों के साथ पीएम पद की शपथ ली। मोदी 3.0 में 30 कैबिनेट मिनिस्टर, 5 राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार और 36 राज्य मंत्री हैं।

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ठळक मुद्देनरेंद्र मोदी ने कुल 71 मंत्रियों के साथ पीएम पद की शपथ लीकैबिनेट मंत्री एक ताकतवर पद है ये अपने विभाग के प्रमुख होते हैं और पीएम को सीधे रिपोर्ट करते हैं

नई दिल्ली: अपने तीसरे कार्यकाल में नरेंद्र मोदी ने कुल 71 मंत्रियों के साथ पीएम पद की शपथ ली। मोदी 3.0 में 30 कैबिनेट मिनिस्टर, 5 राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार और 36 राज्य मंत्री हैं। अक्सर लोगों को इस बारे में कंन्फ्यूजन होता है कि कैबिनेट मंत्री, राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार और राज्य मंत्री में अंतर क्या होता है। लोग ये भी जानना चाहते हैं कि इनकी ताकत और वेतन भत्तों में क्या अंतर होता है। इस आर्टिकल में हम आपको ये विस्तार से बताने वाले हैं। 

कैबिनेट मंत्री

कैबिनेट मंत्री एक ताकतवर पद है। ये अपने विभाग के प्रमुख होते हैं और पीएम को सीधे रिपोर्ट करते हैं। प्रधानमंत्री जब भी अहम मामलों और योजना बनाने पर बैठक करते हैं तो इसमें कैबिनेट मंत्री शामिल होते हैं। 1 लाख रुपये इनका मूल वेतन होता है, 70 हजार रुपये निर्वाचन भत्ता और 60 हजार रुपये ऑफिस खर्च के रूप में मिलते हैं। जब संसद का सत्र चलता है तब रोजाना 2 हजार रुपये अलाउंस मिलते हैं। भत्ते पर कोई टैक्स नहीं लगता। कैबिनेट मंत्री 2 लाख 32 हजार की सैलरी मिलती है। 

राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार

राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार भी अपने विभाग के प्रमुख होते हैं और सीधे प्रधानमंत्री को रिपोर्ट करते हैं। लेकिन ये कैबिनेट की बैठक में शामिल नहीं होते हैं। तमाम भत्तों के साथ लगभग 2 लाख 30 हजार रुपये महीने की सैलरी मिलती है। 

राज्य मंत्री

राज्य मंत्री एक तरह से कैबिनेट मंत्री के सहायक होते हैं। ये अपने विभाग के मंत्री को रिपोर्ट करते हैं। ये भी कैबिनेट की बैठक में शामिल नहीं हो सकते हैं। इनकी सैलरी भी तमाम भत्तों को मिलाकर लगभग 2 लाख 30 हजार रुपये महीने होती है।

इन सभी में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) मंत्रालय सबसे अहम होते हैं। CCS या केंद्रीय मंत्रिमंडल की सुरक्षा संबंधी समिति में गृह, रक्षा, वित्त और विदेश मंत्रालय शामिल होते हैं। देश की सुरक्षा और सामरिक मामलों पर अहम फैसले यही समिति लेती है। भारत के प्रधानमंत्री इस समिति के अध्यक्ष होते हैं। बड़े रक्षा खरीद हो या राष्ट्र की सुरक्षा की सुरक्षा से जुड़े मामले, ये समिति ही प्रमुख नीतियां तय करती है। 

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