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दिल्ली: 1000 लो फ्लोर बसों की खरीद में गड़बड़ी का मामला, गृहमंत्रालय ने दिए CBI जांच के आदेश, जानें क्या है आरोप

By सतीश कुमार सिंह | Updated: August 19, 2021 15:52 IST

दिल्ली में 6,693 बसें हैं - 3,760 डीटीसी और 2,933 क्लस्टर बसें। डीटीसी द्वारा नई बसों की आखिरी खरीद 2008 में की गई थी।

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ठळक मुद्देदिल्ली सरकार ने सीबीआई जांच के गृह मंत्रालय के आदेश की आलोचना की।भाजपा विधायक विजेंद्र गुप्ता ने एलजी से शिकायत की थी। 

नई दिल्लीः गृह मंत्रालय ने दिल्ली सरकार द्वारा 1000 लो-फ्लोर बसों की खरीद की सीबीआई जांच का आदेश दिया है। गृह मंत्रालय ने दिल्ली के मुख्य सचिव को यह जानकारी दी। इस मामले में भाजपा विधायक विजेंद्र गुप्ता ने एलजी से शिकायत की थी। 

एलजी अनिल बैजल ने मामले को गृह मंत्रालय के पास भेजा था। अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार ने सीबीआई जांच के गृह मंत्रालय के आदेश की आलोचना की और कहा कि इन आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है। 

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दिल्ली सरकार द्वारा 1000 लो फ्लोर बसों की खरीद की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से प्राथमिक जांच कराने की सिफारिश की है। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) द्वारा की गयी इन बसों की खरीद के वार्षिक रखरखाव अनुबंध (एएमसी) में ‘‘भ्रष्टाचार’’ का मामला इस साल मार्च में विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी ने उठाया था।

उपराज्यपाल अनिल बैजल द्वारा गठित तीन सदस्यीय समिति ने एएमसी में प्रक्रियागत ‘‘खामियां’’ पायी थीं और उसने उसे निरस्त करने की सिफारिश की थी। अधिकारियों ने बताया कि जुलाई में उपराज्यपाल ने इस मामले को विचारार्थ गृह मंत्रालय के पास भेज दिया था।

भाजपा विधायक विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि जल्द से जल्द परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत को बर्खास्त कर देना चाहिए। गुप्ता ने आप सरकार पर 5000 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। केजरीवाल सरकार पर हमला बोला है। वर्तमान में दिल्ली में 6,693 बसें हैं - 3,760 डीटीसी और 2,933 क्लस्टर बसें। डीटीसी द्वारा नई बसों की आखिरी खरीद 2008 में की गई थी।

आप ने केंद्र सरकार पर हमला बोला। आप ने कहा कि भाजपा दिल्ली के लोगों को नई बसें लेने से रोकना चाहती है। पूर्व में भी केंद्र सरकार ने सीबीआई का इस्तेमाल कर दिल्ली सरकार को परेशान करने की कोशिश की है, लेकिन एक बार भी उनका प्रयास सफल नहीं हुआ है, क्योंकि कभी कोई सच्चाई नहीं रही।

आप सरकार और केंद्र विभिन्न मुद्दों पर बार-बार आमने-सामने रहे हैं। गणतंत्र दिवस किसान विरोध मामले में घर-घर राशन वितरण योजना से लेकर वकीलों की नियुक्ति तक, केंद्र और आप सरकार के बीच हमेशा नोकझोंक होती रही है।

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