लाइव न्यूज़ :

'इतिहास में सावरकर का स्थान गांधी से कम नहीं', संस्कृति मंत्रालय की पत्रिका का ताजा अंक आया चर्चा में

By विनीत कुमार | Updated: July 17, 2022 08:16 IST

गांधी स्मृति और दर्शन स्मृति (जीएसडीएस) की ओर से प्रकाशित पत्रिका 'अंतिम जन' का ताजा अंक विनायक दामोदर सावरकर पर आधारित है। इसकी प्रस्तावना में सावरकर की तुलना महात्मा गांधी से की गई है।

Open in App
ठळक मुद्देगांधी स्मृति और दर्शन स्मृति (जीएसडीएस) द्वारा प्रकाशित पत्रिका 'अंतिम जन' का ताजा अंक सावरकर पर आधारित।पत्रिका की प्रस्तावना में लिखा गया है- सावरकर का कद महात्मा गांधी से कम नहीं है

नई दिल्ली: संस्कृति मंत्रालय के तहत काम करने वाले गांधी स्मृति और दर्शन स्मृति (जीएसडीएस) द्वारा प्रकाशित एक मासिक पत्रिका 'अंतिम जन' का नवीनतम अंक विनायक दामोदर सावरकर को समर्पित है। इसमें पत्रिका की प्रस्तावना में लिखा गया है कि इतिहास में सावरकर का कद महात्मा गांधी से कम नहीं है। जीएसडीएस के चेयरपर्सन प्रधानमंत्री होते हैं।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार जीएसडीएस के उपाध्यक्ष और भाजपा नेता विजय गोयल द्वारा लिखे गए इस प्रस्तावना में सावरकर को 'महान देशभक्त' कहा गया है। साथ ही लिखा है, 'यह दुखद है कि जिन्होंने जेल में (स्वतंत्रता संग्राम के दौरान) एक दिन भी नहीं बिताया, और समाज के लिए योगदान नहीं दिया, वे सावरकर जैसे देशभक्त की आलोचना करते हैं। सावरकर का इतिहास में स्थान और स्वतंत्रता आंदोलन में उनका सम्मान महात्मा गांधी से कम नहीं है।'

गोयल ने लिखा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि उनके योगदान के बावजूद सावरकर को 'कई वर्षों तक स्वतंत्रता के इतिहास में उनका उचित स्थान' नहीं मिला।

जीएसडीएस के अधिकारियों ने कहा कि जून का अंक सावरकर को 28 मई को उनकी जयंती के अवसर पर समर्पित था और जीएसडीएस स्वतंत्रता के 75 साल पूरे होने के मौके पर स्वतंत्रता सेनानियों को समर्पित अंक निकालता रहेगा।

जीएसडीएस की स्थापना 1984 में की गई थी। इसका मूल उद्देश्य महात्मा गांधी के जीवन, मिशन और विचारों को विभिन्न सामाजिक-शैक्षिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से प्रचारित करना है। गांधीवादियों का एक मनोनीत निकाय और विभिन्न सरकारी विभागों के प्रतिनिधि इसके कार्यक्रमों के लिए मार्गदर्शन देते हैं।

पत्रिका के जून के कवर पेज पर सीताराम द्वारा बनाया सावरकर का एक स्केच है। इस पत्रिका के 68 पन्नों के लगभग एक तिहाई पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, मराठी रंगमंच और फिल्म लेखक श्रीरंग गोडबोले, राजनीतिक टिप्पणीकार उमेश चतुर्वेदी और लेखक कन्हैया त्रिपाठी आदि के हिंदुत्व विचार पर आर्टिकल और लेख हैं।

पत्रिका में हिंदुत्व पर एक निबंध भी है जिसे सावरकर की अपनी इसी नाम की किताब से लिया गया है। गोयल की प्रस्तावना के बाद भारत में धार्मिक सहिष्णुता पर महात्मा गांधी का एक लेख है।

वहीं, वाजपेयी के लेख में सावरकर को 'व्यक्तित्व नहीं बल्कि एक विचार' कहा गया है, और इस बात का जिक्र है कि सावरकर ने गांधी से पहले 'हरिजन' समुदाय के लोगों के उत्थान की बात की थी। गोडबोले ने सावरकर और गांधी की हत्या के मुकदमे (वीर सावरकर और महात्मा गांधी हत्या अभियोगा) पर लेख लिखा है। लेखक मधुसूदन चेरेकर ने गांधी और सावरकर के बीच के संबंधों के बारे में लिखा है।

इस अंक में एक पन्ना है है जो पाठकों को सावरकर द्वारा लिखित पुस्तकों के बारे में बताता है।

टॅग्स :Veer Savarkarविजय गोयलVijay Goelअटल बिहारी वाजपेयीAtal Bihari Vajpayee
Open in App

संबंधित खबरें

कारोबारकेरलम विधानसभा चुनावः वृद्ध आबादी 16.5 प्रतिशत?, पेंशन, स्वास्थ्य सुविधाएं और सुरक्षा सबसे बड़े चुनावी मुद्दे?, देखिए किस दल ने क्या दिया तोहफा?

भारतराघव चड्ढा पर आतिशी का बड़ा आरोप, 'BJP से डरते हैं, अगला कदम क्या होगा?'

ज़रा हटकेVIDEO: असम में योगी का बड़ा बयान, 'घुसपैठियों को बाहर करना ही होगा'

भारतTamil Nadu Polls: बीजेपी कैंडिडेट्स की लिस्ट में अन्नामलाई का नाम नहीं, 'सिंघम' किए गए साइडलाइन या नई जिम्मेदारी की तैयारी

भारतश्रीपेरंबुदूर से उम्मीदवार तमिलनाडु कांग्रेस अध्यक्ष सेल्वापेरुन्थगई, 27 उम्मीदवार घोषित, देखिए

भारत अधिक खबरें

भारतलखनऊ सहित यूपी के 17 शहरों में कूड़े का अंबार?, मतदान करने असम गए हजारों सफाईकर्मी, 12 अप्रैल को लौंटेगे?

भारतबारामती विधानसभा सीटः सुनेत्रा पवार के खिलाफ प्रत्याशी ना उतारें?, सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा- निर्विरोध जिताएं, सभी दलों से की अपील

भारत'एकनाथ शिंदे और बलात्कार के आरोपी अशोक खरात के बीच 17 बार फोन पर बातचीत हुई', अंजलि दमानिया का आरोप

भारतमोथाबाड़ी में न्यायिक अधिकारी को किया अगवा और असली आरोपी फरार?, सीएम ममता बनर्जी ने कहा- निर्दोष लोगों को परेशान कर रही एनआईए

भारतघायल हूं इसलिए घातक हूं?, राघव ने एक्स पर किया पोस्ट, मैं बोलना नहीं चाहता था, मगर चुप रहता तो बार-बार दोहराया गया झूठ भी सच लगने लगता, वीडियो