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अशोक खेमका को केंद्रीय नियुक्ति देने से इनकार, सरकार ने कहा- केंद्र के साथ काम का अनुभव नहीं है

By विशाल कुमार | Updated: October 7, 2021 09:48 IST

अतिरिक्त सचिव के रूप में पैनल में शामिल करने के लिए बार-बार आवेदन दाखिल करने के बाद, वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अशोक खेमका ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का रुख किया था. 24 अगस्त को हाईकोर्ट ने केंद्र को नए आवेदन पर 'बोलने का आदेश पारित' करने का निर्देश दिया था.

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ठळक मुद्देअतिरिक्त सचिव के रूप में पैनल में शामिल करने के लिए बार-बार आवेदन दाखिल करने के बाद, अधिकारी ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का रुख किया था.2 सितंबर को दाखिल आवेदन में खेमका ने कहा था कि मेरी ईमानदारी मेरा सबसे बड़ा पाप रहा है और मुझे इस पाप के लिए दंडित किया गया है.डीओपीटी ने आवेदन पर विचार किया लेकिन जवाब दिया कि चूंकि खेमका को केंद्र सरकार में काम करने का शून्य अनुभव था, इसलिए उस पर विचार नहीं किया जा सकता है.

चंडीगढ़: वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अशोक खेमका के केंद्रीय पैनल में शामिल होने के अनुरोध को कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने केंद्र सरकार के साथ उनके अनुभव की कमी का हवाला देते हुए ठुकरा दिया है. 1991 बैच के अधिकारी वर्तमान में हरियाणा के अभिलेखागार, पुरातत्व और संग्रहालय विभाग के प्रधान सचिव हैं.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, अतिरिक्त सचिव के रूप में पैनल में शामिल करने के लिए बार-बार आवेदन दाखिल करने के बाद, अधिकारी ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का रुख किया था. 24 अगस्त को हाईकोर्ट ने केंद्र को नए आवेदन पर 'बोलने का आदेश पारित' करने का निर्देश दिया था.

2 सितंबर को दाखिल आवेदन में खेमका ने कहा था कि मेरी ईमानदारी मेरा सबसे बड़ा पाप रहा है और मुझे इस पाप के लिए दंडित किया गया है. इस आवेदन के माध्यम से मैं आपसे विनम्रतापूर्वक अनुरोध करता हूं कि अतिरिक्त सचिव के रूप में मेरे पैनल में शामिल होने के लिए उचित और समय पर विचार करें.

डीओपीटी ने आवेदन पर विचार किया लेकिन जवाब दिया कि चूंकि खेमका को केंद्र सरकार में काम करने का शून्य अनुभव था, इसलिए उस पर विचार नहीं किया जा सकता है. खेमका ने अपने आवेदन में 40 मामलों का हवाला दिया था जिसमें केंद्र ने इस अनुभव मानदंड में ढील दी थी.

सचिवों की विशेष समिति ने 21 सितंबर को दर्ज किया था कि अतिरिक्त सचिव स्तर पर पैनल में शामिल होने पर विचार करने के लिए एक मानदंड यह है कि अधिकारी को उप सचिव और उससे ऊपर के स्तर पर कम से कम तीन साल की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर काम किया होना चाहिए.

समिति ने आगे कहा कि इसके अलावा, अप्रैल 2016 में सक्षम प्राधिकारी ने मंजूरी दी थी कि जिन अधिकारियों ने केंद्रीय प्रतिनियुक्ति का एक वर्ष पूरा नहीं किया है, लेकिन वर्तमान में केंद्र में सेवा कर रहे हैं, उन्हें अगले बैच के साथ पैनल में शामिल करने पर विचार किया जा सकता है.

उसने आगे कहा कि जिन अधिकारियों ने केंद्रीय प्रतिनियुक्ति का एक वर्ष पूरा नहीं किया है, लेकिन केंद्र में सेवा कर रहे हैं, उन्हें अगले बैच के साथ सूचीबद्ध करने पर विचार किया जा रहा है और केंद्र में एक वर्ष से अधिक समय तक सेवा करने वालों को उनके बैच के साथ पैनल में शामिल करने पर विचार किया जा रहा है. 

कमिटी ने पाया कि खेमका के पास 'शून्य' केंद्रीय अनुभव है क्योंकि उन्होंने कभी भी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर काम नहीं किया है.

बता दें कि, पिछले 28 सालों के प्रशासनिक सेवा के दौरान खेमका का कम से कम 53 बार तबादला हो चुका है.

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