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ईडी डायरेक्टर का कार्यकाल फिर बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, सुनवाई 27 जुलाई को

By शिवेन्द्र कुमार राय | Updated: July 26, 2023 13:26 IST

ईडी के डायरेक्टर संजय कुमार मिश्रा को इससे पहले भी सेवा विस्तार मिल चुका है और 11 जुलाई को अपने एक अहम फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के निदेशक के कार्यकाल विस्तार को अवैध करार दिया था।

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ठळक मुद्देईडी के डायरेक्टर संजय कुमार मिश्रा का कार्यकाल फिर बढ़ सकता हैकार्यकाल बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कीमामले पर 27 जुलाई को 3:30 बजे सुनवाई की जाएगी

नई दिल्ली: ईडी के डायरेक्टर संजय कुमार मिश्रा का कार्यकाल बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। संजय कुमार मिश्रा का कार्यकाल 31 जुलाई को खत्म हो रहा है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस संबंध में शीर्ष अदालत में अर्जी लगाई जिस पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के लिए तैयार हो गया है। मामले पर 27 जुलाई को  3:30 बजे सुनवाई की जाएगी।

बता दें कि ईडी के डायरेक्टर संजय कुमार मिश्रा को इससे पहले भी सेवा विस्तार मिल चुका है और 11 जुलाई को अपने एक अहम फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के निदेशक के कार्यकाल विस्तार को अवैध करार दिया था। देश की शीर्ष अदालत ने अपने निर्णय में कहा था कि ईडी निदेशक संजय कुमार मिश्रा का कार्यकाल विस्तार अवैध है, लेकिन वह 31 जुलाई 2023 तक इस पद पर बने रहेंगे।

बता दें कि केंद्र सरकार के केंद्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम में हालिया संशोधन और ईडी के डायरेक्टर संजय कुमार मिश्रा के कार्यकाल को बढाए जाने को लेकर आपत्ति जताते हुए कांग्रेस नेता जया ठाकुर, रणदीप सिंह सुरजेवाला, तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा और साकेत गोखले ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली थी। इस पर न्यायमूर्ति बीआर गवई, न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संजय करोल की तीन न्यायाधीशों की पीठ ने सुनवाई की थी।

अपने फैसले में शीर्ष अदालत ने  संजय कुमार मिश्रा के कार्यकाल विस्तार को अवैध करार दिया था। हालांकि शीर्ष अदालत ने डीएसपीई और सीवीसी अधिनियम में संशोधन की पुष्टि की, जिससे केंद्र को सीबीआई प्रमुख और ईडी निदेशक के कार्यकाल को उनके अनिवार्य दो साल के कार्यकाल से संभावित तीन साल तक बढ़ाने की शक्ति मिल गई। 

सर्वोच्च अदालत ने कहा था कि कानून पर न्यायिक समीक्षा का दायरा बहुत सीमित है, अदालत ने इन संशोधनों को बरकरार रखा, यह मानते हुए कि पर्याप्त सुरक्षा उपाय हैं। अदालत ने कहा कि जनहित में और लिखित कारणों के साथ उच्च स्तरीय अधिकारियों को विस्तार दिया जा सकता है।

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