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Cash-for Query Case: लोकसभा सांसद नहीं महुआ मोइत्रा!, कहा- कमेटी ने ठीक से जांच नहीं की, गांधी प्रतिमा के सामने धरना, देखें वीडियो

By सतीश कुमार सिंह | Updated: December 8, 2023 15:46 IST

Cash-for Query Case: तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा को ‘पैसे लेकर सवाल पूछने’ के मामले में शुक्रवार को सदन की सदस्यता से निष्कासित कर दिया गया। संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने मोइत्रा के निष्कासन का प्रस्ताव पेश किया जिसे सदन ने ध्वनिमत से मंजूरी दे दी।

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ठळक मुद्दे विपक्ष के नेता गांधी प्रतिमा के सामने धरना पर बैठ गए हैं।लोकसभा की कार्यवाही 11 दिसंबर सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित हुई। "एथिक्स कमेटी के पास निष्कासित करने का कोई अधिकार नहीं है...यह आपके (बीजेपी) अंत की शुरुआत है।"

नई दिल्ली: 'कैश फॉर क्वेरी' मामले में टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा को लोकसभा से निष्कासित किया गया। एथिक्स कमेटी की रिपोर्ट आज सदन में पेश की गई। लोकसभा की कार्यवाही 11 दिसंबर सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित हुई। विपक्ष के नेता गांधी प्रतिमा के सामने धरना पर बैठ गए हैं।

मोइत्रा को टीएमसी सांसद के रूप में निष्कासित करने का प्रस्ताव पारित होने के बाद विपक्षी सांसद संसद परिसर से वॉकआउट कर गए। टीएमसी सांसद के रूप में अपने निष्कासन के बाद महुआ मोइत्रा ने कहा, "एथिक्स कमेटी के पास निष्कासित करने का कोई अधिकार नहीं है...यह आपके (बीजेपी) अंत की शुरुआत है।"

महुआ मोइत्रा ने सदन की सदस्यता से निष्कासित किए जाने के बाद कहा कि लोकसभा की आचार समिति, इसकी रिपोर्ट ने सभी नियमों को तोड़ा, यह हमें झुकने के लिए मजबूर करने का एक हथियार है। मुझे उस आचार संहिता के उल्लंघन का दोषी पाया गया है, जो अस्तित्व में ही नहीं है।

इससे पहले सदन में लोकसभा की आचार समिति की रिपोर्ट पर चर्चा के बाद उसे मंजूरी दी गई जिसमें मोइत्रा को निष्कासित करने की सिफारिश की गई थी। विपक्ष विशेषकर तृणमूल कांग्रेस ने आसन से कई बार यह आग्रह किया कि मोइत्रा को सदन में उनका पक्ष रखने का मौका मिले, लेकिन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने पहले की संसदीय परिपाटी का हवाला देते हुए इससे इनकार कर दिया।

भाजपा सांसद विनोद कुमार सोनकर की अध्यक्षता वाली आचार समिति ने गत नौ नवंबर को अपनी एक बैठक में मोइत्रा को ‘पैसे लेकर सदन में सवाल पूछने’ के आरोपों में लोकसभा से निष्कासित करने की सिफारिश वाली रिपोर्ट को स्वीकार किया था। समिति के छह सदस्यों ने रिपोर्ट के पक्ष में मतदान किया था।

इनमें कांग्रेस से निलंबित सांसद परणीत कौर भी शामिल थीं। समिति के चार विपक्षी सदस्यों ने रिपोर्ट पर असहमति नोट दिए थे। विपक्षी सदस्यों ने रिपोर्ट को ‘फिक्स्ड मैच’ करार देते हुए कहा था कि भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की जिस शिकायत पर समिति ने विचार किया, उसके समर्थन में ‘सबूत का एक टुकड़ा’ भी नहीं था।

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