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सस्ता टैटू बनवाना महंगा पड़ा, वाराणसी में एचआईवी से संक्रमित हुए दर्जन भर लोग

By शिवेंद्र राय | Updated: August 7, 2022 10:04 IST

वाराणसी में दर्जन भर लोग एचआईवी से संक्रमित पाए गए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से किसी में भी एचआईवी संक्रमण अक्षुरक्षित यौन संबंध या संक्रमित खून की वजह से नहीं फैला। सभी मरीजों में संक्रमण टैटू बनाने में प्रयोग की जानो वाली सूई की वजह फैला है।

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ठळक मुद्देवाराणसी में दर्जन भर लोग एचआईवी से संक्रमित पाए गएसस्ते टैटू के चक्कर में एचआईवी से संक्रमित हुएजिला अस्पताल के एंटी रेट्रो वायरल ट्रीटमेंट सेंटर में जारी है इलाज

वाराणसीवाराणसी में एचआईवी संक्रमण का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां कम पैसें में टैटू बनावने के चक्कर में दो लोग एचआईवी वायरस से संक्रमित हो गए हैं। इस मामले की जानकारी देते हुए पंडित दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल की एंटी रेट्रो वायरल ट्रीटमेंट सेंटर की डॉ प्रीति अग्रवाल ने बताया कि एक 20 वर्षीय पुरुष और एक 25 वर्षीय महिला सहित 14 लोग जांच क बाद एचआईवी संक्रमित पाए गए।

कैसे पता चला

वाराणसी में कुछ लोगों में पिछले कई दिनों से बुखार के लक्षण थे। इनका  वायरल टाइफाइड मलेरिया सहित कई प्रकार के परीक्षण किए गए लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। बाद में जब एचआईवी परीक्षण किया गया तो सभी बीमारों को एचआईवी संक्रमित  पाया गया। ये जानकारी आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात काउंसलिंग में सामने आई। जब इन मरीजों से बात की गई तो पता चला कि किसी में भी एचआईवी संक्रमण अक्षुरक्षित यौन संबंध या संक्रमित खून की वजह से नहीं फैला। जबकि सभी ने कहीं न कहीं अपने शरीर में टैटू बनवाए थे। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग को यही आशंका है कि ये सभी मरीज संक्रमित सुई से टैटू बनवाने के कारण एचआईवी की चपेट में आए हैं। सभी मरीजों का इलाज पंडित दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पताल के एंटी रेट्रो वायरल ट्रीटमेंट सेंटर में शुरू हो गया है। 

बता दें आजकल युवाओं में शरीर पर अलग-अलग तरह के टैटू बनवाने का फैशन है। टैटू बनाने के लिए सूई का प्रयोग किया जाता है जो सीधे खून के संपर्क में आती है। टैटू बनाने वाली सुई काफी महंगी होती है इसलिए कुछ टैटू बनाने वाले खर्चा बचाने के लिए एक ही सुई से कई लोगों का टैटू बनाते हैं। ये सस्ते भी होते हैं इसलिए कम पैसों में टैटू बनवाने के लिए कुछ लोग ऐसी जगहों पर पहुंच जाते हैं। ऐसे में अगर किसी एक व्यक्ति को एचआईवी संक्रमण है तो बाकी सभी दूसरे लोगों में भी उसी सुई से संक्रमण पहुंच जाता है। 

आपको यह भी बता दें कि एचआईवी ही वह वायरस है जिससे एड्स होता है। एचआईवी संक्रमित व्यक्ति अगर परामर्श के अनुरूप दवाएं न ले तो उन्हें एड्स होने कि सम्भावना बहुत बढ़ जाती है। बिना इलाज के एचआईवी अंततः प्रतिरक्षा प्रणाली में काम आने वाली CD4 कोशिकाओं की संख्या इतनी कम कर देता है कि प्रतिरक्षा प्रणाली बहुत कमजोर हो जाती है।

टॅग्स :एड्सवाराणसीHealth and Family Welfare Departmentउत्तर प्रदेश
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