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सड़क का शिलान्यास, उद्घाटन हो रहा है और विधायक को पता ही नहीं, बीजेपी नेता ने नीतीश कुमार पर लगाया आरोप, मिला ये जवाब

By एस पी सिन्हा | Updated: December 1, 2021 16:38 IST

बुधवार विधानसभा में सरकार की भारी फजीहत हो गई। ग्रामीण कार्य विभाग, श्रम संसाधन विभाग में हो रही गड़बड़ी को लेकर सत्ता पक्ष व विपक्ष के विधायक साथ हो गए। इस दौरान मंत्री की भारी फजीहत हुई...

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ठळक मुद्देझंझारपुर से भाजपा विधायक नीतीश मिश्रा ने नीतीश सरकार पर आरोप लगाया कि विधायकों को कोई सूचना नहीं दी जातीमिश्रा ने कहा, क्षेत्र में सड़क का शिलान्यास, उद्घाटन हो रहा फिर भी कोई जानकारी नहीं दी जाती

पटनाबिहार विधानसभा में आज तीसरे दिन सरकार की भारी किरकिरी हुई। सत्ता पक्ष और विपक्षी सदस्यों ने सुशासन सरकार की पोल खोल कर रख दिया। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही राजद ने बेरोजगारी के सवाल पर सदन में शोर-शराबा शुरू किया तो भाकपा माले ने राज्यपाल फागू चौहान को लेकर सदन में हंगामा किया।

राज्यपाल को बर्खास्त करने की उठी मांग

विपक्षी सदस्यों ने राजभवन में भ्रष्टाचार का आरोप लगा राज्यपाल को बर्खास्त करने की मांग की। विपक्षी विधायक बैनर-पोस्टर लेकर सदन पहुंचे थे। ऐसे में विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि राज्यपाल महामहिम हैं और वे इस विधायिका के अंग हैं। उन पर इस तरह के आरोप लगाना उचित नहीं।

दरअसल, विश्वविद्यालयों में लगातार गड़बड़ी की शिकायतों के बीच विपक्षी सदस्य इस बात की मांग कर रहे थे कि राज्यपाल फागू चौहान को बर्खास्त किया जाए। हालांकि विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा ने इसपर सख्त एतराज जताया। उन्होंने कहा कि राज्यपाल संवैधानिक अंग है और उनके ऊपर इस तरह की टीका टिप्पणी ठीक नहीं है। इस मामले को लेकर काफी देर तक सदन में शोर-शराबा होता रहा। इस बीच एआईएमआईएम के विधायकों ने सीमांचल के सवाल पर सदन में प्रदर्शन शुरू कर दिया। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने किसी तरह विधायकों को शांत कराया।

 वहीं मंगलवार को विधानसभा परिसर में दो विधायकों की अभद्रता को लेकर अध्यक्ष ने कहा कि पूरे देश में इसी की चर्चा हो रही है। इससे हमारी प्रतिष्ठा गिरी है। इसलिए हम सब की जिम्मेदारी है कि लोकतंत्र की गरिमा को बरकरार रखें। बता दें, मंगलवार को राजद विधायक वीरेन्द्र और भाजपा विधायक संजय सरावगी के बीच विवाद हुआ था। इसके बाद भाई वीरेन्द्र ने बीजेपी विधायक को अपशब्द बोले थे।

बीजेपी विधायक ने नीतीश पर साधा निशाना

वहीं बुधवार विधानसभा में सरकार की भारी फजीहत हो गई। ग्रामीण कार्य विभाग, श्रम संसाधन विभाग में हो रही गड़बड़ी को लेकर सत्ता पक्ष व विपक्ष के विधायक साथ हो गए। इस दौरान मंत्री की भारी फजीहत हुई। भाजपा के झंझारपुर से विधायक नीतीश मिश्रा ने कहा कि ग्रामीण कार्य विभाग क्षेत्र में बन रही या बनने वाली सड़कों के बारे में कोई जानकारी ही नहीं देता है। क्षेत्र में सड़क का शिलान्यास, उद्घाटन हो रहा फिर भी कोई जानकारी नहीं दी जाती। सूचना मांगने के बाद भी ग्रामीण कार्य विभाग के इंजीनियर सूची नहीं देते। आखिर विधायकों को सूचना नहीं देने के पीछे वजह क्या है, यह स्पष्ट होना चाहिए। 

नीतीश मिश्रा के इस सवाल पर पूरा सदन एक साथ हो गया। आसन पर बैठे विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि यह तो विधायकों के मर्यादा से जुड़ा सवाल है। विधायकों को जानकारी मिलनी ही चाहिए। इसके बाद संसदीय कार्य मंत्री ने पहले आश्वस्त किया कि उद्घाटन शिलान्यास के बारे में जानकारी हर हाल में मिलनी चाहिए। वहीं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि हमने ही यह व्यवस्था की थी सभी विधायकों का नाम शिलान्यास-उद्घाटन के शिलापट्ट पर लगनी चाहिए। फिर भी कहीं कोई कमी है तो उसे बतायें। वहीं सदन में भाजपा विधायक नीतीश मिश्रा के सवाल से परेशान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि आप का भाषण सुन रहे थे, आप भी तो मंत्री रहे ही हैं। आपके समय में क्या काम होता था, अब नहीं हो रहा है? कहीं कोई कमी है तो बता दीजिएगा। मुख्यमंत्री ने तल्ख अंदाज में भाजपा विधायक नीतीश मिश्रा को कहा....समझ गये न?

वहीं, भाजपा विधायक संजय सरावगी ने सदन ने उठाया कि दरभंगा के आरईओ के अधीक्षक अभियंता पैसे के साथ अघस्त महीने में ही मुजफ्फरपुर पुलिस के हाथों पकडे़ गये थे। उनके ठिकानों पर छापेमारी हुई और 67 लाख रू बरामद हुआ। फिर भी वे दो माह तक पद पर बने रहे। अधीक्षक अभियंता की ऊपर तक पहुंच थी। इसी वजह से कोई कार्रवाई नहीं की गई। जवाब देने ग्रामीण कार्य विभाग के मंत्री जयंत राज उठे। लेकिन उन्हें जवाब नहीं जुटा। मंत्री कहते रहे कि वे छुट्टी पर चले गये थे। अभियंता के खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू की गई है। यह जवाब सुनते ही विधानसभा अध्यक्ष भी चौंक गये। उन्होंने कहा कि आप तुरंत उस अधिकारी पर कार्रवाई करिये। सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्य इस मुद्दे पर एक साथ हो गये। अध्यक्ष ने सदन के सदस्यों की भावना को अवगत कराते हुए नियमन दे दिया कि सदन की संयुक्त कमिटि पूरे मामले की जांच करेगी। तब जाकर सदन में हंगामा शांत हुआ।

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