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भाजपा को राज्य सभा में 'कामचलाऊ बहुमत', पार्टी के 75 सांसद के साथ 50 अन्य का समर्थन

By हरीश गुप्ता | Updated: June 25, 2019 07:11 IST

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ठळक मुद्देतेलुगू देशम के चार सांसदों के दलबदल से भाजपा का संख्याबल 75 तक पहुंच गया.गठबंधन एनडीए सहयोगियों और समर्थक दलों के 24 सांसदों के बल पर यह आंकड़ा 99 तक आ गया .

राज्य सभा में कामकाज पूरा कराने के लिए बहुमत हासिल करने को भाजपा एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है. यह कामना जल्दी पूरा न होते देख सत्तारूढ़ दल अब अन्य दलों में तोड़फोड़ की कोशिश में लगा है. उसकी यह रणनीति उस समय सफल होती नजर आई जब तेलुगू देशम पार्टी में विभाजन से इसे ऊपरी सदन में 'कामचलाऊ बहुमत' हासिल हो गया. तेलुगू देशम के चार सांसदों के दलबदल से भाजपा का संख्याबल 75 तक पहुंच गया.

गठबंधन एनडीए सहयोगियों और समर्थक दलों के 24 सांसदों के बल पर यह आंकड़ा 99 तक आ गया . इन 24 सांसदों में जद यू (6),शिवसेना(3),अकाली दल (3)और असम गण परिषद (एजीपी),बीपीएफ,नगा पीपुल्स फ्रंट(एनपीएफ),रिपब्लिकन पार्टी (आरपीआई)और एसडीएफ के 1-1,तीन नामजद और चार निर्दलीय शमिल हैं .

एनडीए के विस्तारित परिवार की सदस्य अन्ना द्रमुक के 13 सदस्यों को मिला कर 236 सदस्यीय सदन में यह संख्या 112 हो जाती है. वर्तमान में राज्यसभा में 9 स्थान रिक्त हैं ओडिसा में भाजपा को एक सीट भेंट करने वाले बीजू जनता दल के 5 सदस्यों के बाहर से समर्थन देने से भाजपा को अतिरिक्त ताकत मिली है. उसे वाईएसआर (दो सांसद) का महत्वपूर्ण अवसरों पर समर्थन हासिल होने का भी भरोसा है.

9 रिक्त सीटों के लिए निर्वाचन के समय पांच सीटें भाजपा एवं उसके सहयोगी दलों को मिलना तय है. इस प्रकार उसका संख्याबल 124 का हो जाएगा. टी आर एस के छह सांसद भी भाजपा का साथ दे सकते हैं. भाजपा की चिंता यह है कि इन समर्थक दलों में से जद यू ,टी आर एस और वाई एस आर जैसे कुछ दल तीन तलाक विधेयक जैसे संवेदनशील मसले पर राज्यसभा में मतदान के दौरान अलग रवैया अपना सकते हैं अन्यथा अन्य कामकाज निबटाने के मामले में वह एनडीए के साथ हैं.

पार्टी के सूत्रों का कहना है कि यह दल तीन तलाक विधेयक के खिलाफ मतदान करने की बजाय उस समय अनुपस्थित रह सकते हैं. राम जेठमलानी जैसे कुछ खिलाफती सांसद भी अनुपस्थित रह सकते हैं. राज्य सभा में 13 सदस्यीय तृणमूल कांग्रेस संसदीय दल में भी असंतोष की आहट सुनाई दे रही है. जद (एस) के एकलौते सांसद भी डगमगा रहे हैं . ऐसे में भाजपा अपने दम पर भले ही बहुमत हासिल न कर पाई हो लेकिन उसे कामकाजी बहुमत तो हासिल हो ही गया है.

टॅग्स :भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी)राज्य सभा
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