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नीतीश कुमार 2025 में आश्रम खोल लें और तेजस्वी यादव को सत्ता सौंप दें, राजद नेता शिवानंद तिवारी के बयान के बाद महागठबंधन में रार

By एस पी सिन्हा | Updated: September 22, 2022 17:17 IST

बिहारः जदयू ने शिवानंद तिवारी के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उपेंद्र कुशवाहा ने पलटवार करते हुए कहा है कि नीतीश कुमार को जनता सत्ता के शिखर पर चाहती है और वो कोई आश्रम नहीं खोल रहे हैं।

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ठळक मुद्देनीतीश कुमार के राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलों का बाजार गर्म हो गया है।राजद के बड़े नेता शिवानंद तिवारी ने तेजस्वी यादव को सत्ता सौंप कर आश्रम जाने की सलाह दे दी है। नीतीश कुमार को आश्रम खोलने और वहां राजनीतिक प्रशिक्षण देने की सलाह भी दे दी है।

पटनाः केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बिहार दौरे के पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के संन्यास को लेकर राज्य की सियासत गरमाई हुई है। राजद ने जिस तरह नीतीश कुमार को सन्यास लेने की नसीहत दी है, उसके बाद नीतीश कुमार के राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलों का बाजार गर्म हो गया है।

नीतीश कुमार ने तेजस्वी यादव की तरफ इशारा कर उन्हें आगे बढ़ाने की बात कही थी। इसके बाद राजद के बड़े नेता शिवानंद तिवारी ने तेजस्वी यादव को सत्ता सौंप कर आश्रम जाने की सलाह दे दी है। उन्होंने नीतीश कुमार को आश्रम खोलने और वहां राजनीतिक प्रशिक्षण देने की सलाह भी दे दी है।

शिवानंद तिवारी ने कहा कि एक आश्रम खोला जाए। 2025 में नीतीश कुमार तेजस्वी को बिहार की कमान देकर आश्रम चलें। आश्रम में राजनीतिक प्रशिक्षण देने कलम किया जाएगा। मैं खुद भी आश्रम साथ चलूंगा। तिवारी के नीतीश कुमार को आश्रम सलाह दिए जाने के बाद चर्चा शुरू है कि क्या शिवानंद तिवारी ने नीतीश कुमार को राजनीतिक सन्यास लेने की सलाह दे दी है?

तिवारी का बयान ऐसे वक्त में आया है जब पिछले दिनों नीतीश कुमार ने खुद तेजस्वी की ओर इशारा करते हुए कहा था कि अब इन्हीं लोगों को आगे बढ़ाना है। ऐसे में शिवानंद तिवारी का तेजस्वी यादव को सत्ता सौंपने की बात कई मायनों में खास बन जाता है।

शिवानंद तिवारी के नीतीश को आश्रम जाने की सलाह के बाद मचे घमासान में जदयू ने शिवानंद तिवारी के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उपेंद्र कुशवाहा ने पलटवार करते हुए कहा है कि नीतीश कुमार को जनता सत्ता के शिखर पर चाहती है और वो कोई आश्रम नहीं खोल रहे हैं।

उन्होंने शिवानंद तिवारी को नसीहत थमा डाली है कि उन्हें जरूरत है तो वो कोई और आश्रम तलाश लें। आम जन-जीवन में आश्रम खोलने का मतलब संन्यास लेने से लगाया जाता है और नीतीश कुमार के मामले में ऐसा कहना शिवानंद तिवारी की राजनीतिक सेहत के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है।

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