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किशनगंज, अररिया, पूर्णिया, कटिहार के साथ ही मिथिलांचल और चंपारण पर नजर, तेजस्वी यादव-राहुल गांधी को असदुद्दीन ओवैसी देंगे झटका, 50 सीट पर लड़ने की तैयारी

By एस पी सिन्हा | Updated: May 3, 2025 14:48 IST

Bihar Elections 2025: सीमांचल के जिलों किशनगंज, अररिया, पूर्णिया, कटिहार आदि में मुस्लिम बहुल इलाके माने जाते हैं।

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ठळक मुद्देBihar Elections 2025: एआईएमआईएम के 4 विधायकों को तोड़कर शामिल कर लिया था।Bihar Elections 2025: 50 सीटों विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की पार्टी की तैयारी है।Bihar Elections 2025: पिछले चुनाव की तुलना में ज्यादा सीटों पर उम्मीदवार उतारेंगे।

पटनाः एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के 2 दिवसीय बिहार दौरा पर आने के बाद सूबे में सियासी हलचल तेज हो गई है। ओवैसी शनिवार को किशनगंज पहुंचे हैं, जहां बहादुरगंज में एक जनसभा को संबोधित करने के बाद 4 मई को मोतिहारी के ढाका में दूसरी बैठक करेंगे और उसी दिन उनका गोपालगंज में भी कार्यक्रम है। बिहारविधानसभा चुनाव को देखते हुए असदुद्दीन ओवैसी के बिहार दौरे को बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दरअसल, बिहार के मुस्लिम बहुल जिले किशनगंज, अररिया, पूर्णिया और कटिहार के साथ ही उनकी नजर मिथिलांचल और चंपारण क्षेत्र की कुछ विधानसभा सीटों पर भी है।

एआईएमआईएम सूत्रों के अनुसार बिहार में 50 सीटों विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की पार्टी की तैयारी है, लेकिन अभी इस पर अंतिम फैसला होना बाकी है। लेकिन, ओवैसी के बिहार दौरे से बिहार की राजनीतिक फिजा में गर्माहट आ गई है और खास तौर पर महागठबंधन खेमे में सियासी टेंशन अधिक है।

ओवैसी का बिहार दौरा राज्य में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए एआईएमआईएम का चुनावी आगाज माना जा रहा है। असदुद्दीन ओवैसी ने पहले ही घोषणा की है कि वे इस बार बिहार में पिछले चुनाव की तुलना में ज्यादा सीटों पर अपनी पार्टी से उम्मीदवार उतारेंगे। साथ ही बिना राजद का नाम लिए उन्होंने कहा कि सीमांचल और बिहार के लोग उन दलों को सबक सिखाएंगे।

जिन्होंने उनके विधायकों को चुराया था। ओवैसी का इशारा राजद की ओर था जिसने एआईएमआईएम के चार विधायकों को तोड़कर अपनी पार्टी में शामिल कर लिया था। जानकारों के अनुसार असदुद्दीन ओवैसी अपनी नजरें विधानसभा सीटों पर टिकाए हुए हैं। बता दें कि 2020 के विधानसभा चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ने 18 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिन में 5 पर विजय प्राप्त की थी।

इसके साथ ही कई सीटों पर राजद के उम्मीदवारों की हार का कारण असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ही बनी थी। लेकिन, बाद के समय में ओवैसी के पांच विधायकों में से चार विधायक राजद में शामिल हो गए थे, जिसकी टीस असदुद्दीन ओवैसी को अभी है। अब जब पूरी तैयारी के साथ बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर असदुद्दीन ओवैसी अपनी तैयारी कर रहे हैं तो 18 फीसदी आबादी वाली बिहार प्रदेश के मुस्लिम सियासत में हलचल मचनी तय मानी जा रही है। सीमांचल के जिलों किशनगंज, अररिया, पूर्णिया, कटिहार आदि में मुस्लिम बहुल इलाके माने जाते हैं।

किशनगंज में करीब 67 फीसदी मुस्लिम आबादी मानी जाती है। पिछले विधानसभा चुनाव में भी असदुद्दीन औवेसी को इस इलाके में बड़ी सफलता मिली थी। सियासी जानकारों का मानना है कि बिहार में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी के मजबूत होने से सबसे बड़ा झटका राजद और कांग्रेस को लगेगा।

एआईएमआईएम को लेकर हमेशा से माना जाता है कि वह मुस्लिम समुदाय की प्रमुखता से नुमाइंदगी करते हैं। ऐसे में इस बार अगर असदुद्दीन ओवैसी फिर से बिहार में मजबूत होते हैं तो यह राजद और कांग्रेस के लिए बड़ा झटका रहेगा। उल्लेखनीय है कि लालू यादव की पार्टी राजद का शुरू से एम-वाई यानी मुस्लिम-यादव समीकरण का हिसाब रहा है।

अगर मुस्लिम वोटरों ने राजद का साथ छोड़ा तो राजद को कई सीटों पर मुश्किलों का सामना करता होगा। इसी तरह कांग्रेस को भी ओवैसी का मजबूत होना मुश्किल में डालेगा। लोकसभा चुनाव में किशनगंज और कटिहार से कांग्रेस के दो सांसद मुस्लिम समुदाय से ही जीते थे, जिनकी जीत में मुस्लिम मतदाताओं की गोलबंदी प्रमुख मानी गई। ओवैसी इस बार इन इलाकों में कांग्रेस को बड़ा नुकसान दे सकते हैं।

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