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'कोरोना के कारण इस साल शून्य रह सकती है एशिया की वृद्धि दर', IMF ने चेताया

By भाषा | Updated: April 16, 2020 14:22 IST

पिछले 60 साल में कभी भी एशिया की वृद्धि दर गिरकर शून्य पर नहीं आयी। री ने कहा कि यह वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान के 4.7 प्रतिशत तथा एशियाई वित्तीय संकट के दौरान के 1.3 प्रतिशत से भी कम औसत होगा।

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ठळक मुद्देकोरोना की रोकथाम की दिशा में एशियाई देश अन्य क्षेत्रों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं एशिया की वृद्धि दर 2021 में बढ़कर 7.6 प्रतिशत हो जाने की उम्मीद है।

वाशिंगटन: कोरोना वायरस महामारी की रोकथाम की दिशा में एशियाई देश अन्य क्षेत्रों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं और ये देश तेजी से वापसी कर सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के एक शीर्ष अधिकारी ने यह टिप्पणी की। आईएमएफ के निदेशक (एशिया एवं प्रशांत विभाग) चांग योंग री ने कहा कि एशिया में कोरोना वायरस का असर हर क्षेत्र में होगा तथा गंभीर व अप्रत्याशित होगा।

उन्होंने कहा, ‘‘एशिया अभी भी अन्य क्षेत्रों की तुलना में बेहतर कर रहा है और तेज वापसी कर सकता है। एशिया की औसत वृद्धि दर अन्य क्षेत्रों की तुलना में अधिक है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमें 2020 में एशिया की वृद्धि दर शून्य रहने का अनुमान है। यह काफी बड़ी गिरावट है क्योंकि पिछले 60 साल में कभी भी एशिया की वृद्धि दर गिरकर शून्य पर नहीं आयी। री ने कहा कि यह वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान के 4.7 प्रतिशत तथा एशियाई वित्तीय संकट के दौरान के 1.3 प्रतिशत से भी कम औसत होगा।

चूंकि अन्य देशों की तुलना में वायरस का कहर एशिया में पहले शुरू हुआ, एशिया क्षेत्र वापसी की राह पर भी पहले लौट सकता है। एशिया की वृद्धि दर 2021 में बढ़कर 7.6 प्रतिशत हो जाने की उम्मीद है। उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन इसका यह मतलब नहीं हुआ कि पूरे नुकसान की भरपाई तुरंत हो जायेगी। वैश्विक अर्थव्यवस्था में गिरावट का एशिया पर असर होगा इससे पूरे 2021 के दौरान भी उत्पादन का स्तर महामारी के पहले के स्तर की तुलना में कम ही रह सकता है।

आईएमएफ अधिकारी ने एक सवाल के जवाब में कहा कि आईएमएफ के पूर्वानुमान काफी अनिश्चित हैं। उन्होंने कहा, ‘‘एशिया के लिये आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान लगाने में एक जो सबसे बड़ी दिक्कत है, वह है कि एशिया की अलग-अलग अर्थव्यवस्थाओं में महामारी अलग-अलग चरणों में है। अंतिम निष्कर्ष इस बात पर भी निर्भर करेगा कि रोकथाम के क्या उपाय किये गये तथा महामारी की दूसरी लहर आती है या नहीं।

ऐसे में अनुमान में सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पक्ष में बदलाव हो सकते हैं।’’ हालांकि उन्होंने कहा कि महामारी से जुड़ी अनिश्चितताओं को देखते हुए अनुमान का संतुलन नकारात्मक के पक्ष में ही है।

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