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ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम बिहार में राजद और जदयू की बढ़ाएगी परेशानी, थर्ड फ्रंट बनाने की तैयारी, कई दल हो सकते हैं शामिल

By एस पी सिन्हा | Updated: December 22, 2022 19:27 IST

एआईएमआईएम के बिहार प्रदेश अध्यक्ष और विधायक अख़्तरुल ईमान ने कहा कि बिहार में दो महत्वपूर्ण घटक हैं, पहला महागठबंधन और दूसरा भाजपा। लेकिन, हमारी लड़ाई मुख्य तौर पर भाजपा से है।

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ठळक मुद्देभाजपा को हराना है तो गैर भाजपा तमाम दल साथ आएं। नीतीश कुमार तो पंद्रह साल तक भाजपा के साथ रहकर सत्ता का सुख भोग रहे थे। एआईएमआईएम बिहार में बहुत जल्द सदस्यता अभियान की शुरुआत करने वाली है।

पटनाः सांसद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम बिहार में भाजपा और महागठबंधन को चुनौती देने के लिए तीसरे मोर्चे के निर्माण के दिशा में कदम बढ़ाने लगी है। एआईएमआईएम के बिहार प्रदेश अध्यक्ष व विधायक अख़्तरुल ईमान ने दावा किया है कि एआईएमआईएम बहुत जल्द बिहार में थर्ड फ्रंट बनाने जा रही है।

इसके लिए सामान विचार धारा की पार्टियों से बातचीत भी शुरू हो गई है। उन्होंने कहा कि बहुत जल्द इसका स्वरूप भी सामने आ जाएगा। अख़्तरुल ईमान ने कहा कि बिहार में दो महत्वपूर्ण घटक हैं, पहला महागठबंधन और दूसरा भाजपा। लेकिन, हमारी लड़ाई मुख्य तौर पर भाजपा से है।

अगर भाजपा को हराना है तो तमाम धर्म निरपेक्ष पार्टियों को एक साथ आना होगा। लेकिन बिहार में महागठबंधन हम पर आरोप लगाकर हमारे पार्टी को कमजोर करने की कोशिश में लगी हुई है। उन्होंने कहा कि हमारे विधायकों को तोड़ा गया। जब हमारे समर्थन की जरूरत थी, तब ले लिया और उसके बाद हमारी पार्टी को तोड़ दिया।

लेकिन एआईएमआईएम इससे कमजोर नहीं होगा। एआईएमआईएम बिहार प्रमुख का कहना है कि इन सबके बावजूद हमारा अभी भी प्रयास है कि भाजपा को हराना है तो गैर भाजपा तमाम दल साथ आएं। अगर ऐसा नहीं होता है तो एआईएमआईएम अपनी पूरी ताकत के साथ बिहार में थर्ड फ्रंट बनाएगा। जिसमे कई छोटी-छोटी पार्टियां साथ आएंगी।

उन्होंने कहा कि हम पर आरोप लगता है कि हम भाजपा की बी टीम है। लेकिन, नीतीश कुमार तो पंद्रह साल तक भाजपा के साथ रहकर सत्ता का सुख भोग रहे थे। आज उनके खिलाफ चले तो गए है, लेकिन आज भी उनसे बीजेपी की महक आती है। कल वो क्या करेंगे ये कौन जानता है?

जानकार बताते हैं कि एआईएमआईएम बिहार में बहुत जल्द सदस्यता अभियान की शुरुआत करने वाली है। पार्टी अल्पसंख्यक मतदाताओं के बीच यह संदेश देने में लगी हुई है कि अल्पसंख्यक समुदाय को सिर्फ वोट बैंक समझा गया है और एक मात्र पार्टी एआईएमआईएम ही है, जो अल्पसंख्यक समुदाय को उसका हक़ दिला सकती है।

ऐसे में राजनीति के जानकारों का कहना है कि एआईएमआईएम अगर तीसरा मोएचा बनाने में कामयाब हो जाती है तो अल्पसंख्यक वोट में बंटवारा होने की सम्भावना बढ़ जाएगी। जिसका सीधा घाटा महागठबंधन को होगा। वहीं भाजपा को इसका फ़ायदा मिलने की सम्भावना बढ़ जाएगी।

जानकारों के अनुसार एआईएमआईएम की नजर महागठ बंधन के वैसे नेताओं पर है, जिन्हें टिकट नहीं मिला तो उन्हें एआईएमआईएम टिकट देकर चुनाव मैदान में उतार सकता है। खासकर मिथिलांचल, कोसी और सीमांचल के नेताओं पर एआईएमआईएम की विशेष नजर रहेगी।

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