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72 साल के हुए पीएम, जानिए पहली बार कब छपा था नरेंद्र मोदी का अखबार में नाम?

By अनिल शर्मा | Updated: September 17, 2022 17:15 IST

साल 1988 में नरेंद्र मोदी का नाम पहली बार द टाइम्स ऑफ इंडिया के पन्नों में एक राजनेता के रूप में सामने आया था। वह भी किसानों की मांगों पर कांग्रेस विरोधी रास्ता रोको आंदोलन के आयोजक के रूप में।

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ठळक मुद्देसाल 1978 में नरेंद्र मोदी का नाम पहली बार अखबार में छपा था।दूसरी बार साल 1979 में टाइम्स ऑफ इंडिया में नरेंद्र मोदी के नाम की उपस्थिति हुई।

नई दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज 72 साल के हो गए। इन 72 वर्षों में अपने जीवन का लंबा हिस्सा आरएसएस और फिर भाजपा के लिए समर्पित कर दिया। अक्टूबर 2001 में पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री बने तो बाद के 21 वर्षों तक वह संवैधानिक पद पर बने रहे। गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर उन्होंने 13 वर्षों तक शासन किया और फिर 2014 में प्रधानमंत्री बने और पिछले 8 सालों से इस संवैधानिक पद पर बने हुए हैं। 

माना जाता है कि नरेंद्र मोदी मौजूदा दौर के सबसे लोकप्रिय जन नेता हैं। देश विदेश तक के अखबारों की सुर्खियां बनते हैं। यूक्रेन युद्ध को लेकर रूस के राष्ट्रपति पुतिन से ये कह- आधुनिक दौर युद्ध का युग नहीं है, अमेरिकी मीडिया में छाए हुए हैं। लेकिन क्या ये जानना दिलचस्प नहीं होगा कि पीएम मोदी का पहली बार अखबारों में कब नाम छपा?

गौरतलब बात है कि नरेंद्र मोदी एक जन नेता बनने से पहले वह वर्षों तक एक आरएसएस प्रचारक थे। नलिन मेहता ने अपनी किताब (The New BJP: Modi and the Making of the World’s Largest Political Party) में इस बात का जिक्र किया है। इसके साथ ही नलिन ने इस किताब में यह भी उजागर किया है कि नरेंद्र मोदी का नाम पहली बार अखबार में कब छपा? 

साल 1978 में नरेंद्र मोदी का नाम पहली बार अखबार में छपा था

नलिन की किताब के मुताबिक, साल 1978 में नरेंद्र मोदी का नाम पहली बार अखबार में छपा था और वह अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया था। यह समय आपातकालीन के समाप्त होने के बाद का था। मोदी की अखबारी कागज में पहली उपस्थिति आपातकाल के हटने के कुछ महीनों बाद आई। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि मोदी ने 'आपातकाल के दौरान युवा संघर्ष' पर एक टेलीविजन कार्यक्रम, युवादर्शन में हिस्सा लिया था। 

अलका देसाई द्वारा संचालित, टीवी चर्चा में युवा नरेंद्र मोदी के साथ प्रवीण टैंक और कीर्तिदा मेहता भी थे। यह कार्यक्रम 23 मई 1978 को रात 830 बजे प्रसारित हुआ था। इसका जिक्र टाइम्स ऑफ इंडिया के एक खंड- 'टेलीविजन' में छपा था। देखेंः

दूसरी बार साल 1979 में मोदी का नाम अखबार में छपा

वहीं पीएम मोदी की दूसरी बार अखबार में उपस्थिति साल 1979 में होती है। टाइम्स ऑफ इंडिया में ही। पीएम मोदी एक प्रचारक और बाढ़ राहत कार्यकर्ता के रूप में 11 अगस्त 1979 को गुजरात में माचू बांध की विफलता से मोरबी में हुई भारी तबाही और सैकड़ों मौतों के लिए राहत कार्यों में लगे हुए थे। हादसे ने गुजरात में एक विशाल क्षेत्र को जलमग्न कर दिया। इसे गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में इतिहास में सबसे खराब बांध विफलता के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।

यह भारत की सबसे खराब आपदाओं में से एक थी और मोदी संगठन की ओर से राहत प्रयासों के समन्वयक आरएसएस प्रचारक के रूप में अपनी तत्कालीन भूमिका में TOI के पन्नों में दिखाई दिए। खबर के अंदर लिखा गया था- आरएसएस द्वारा गठित पुर पिदित सहायता समिति (बांध पीड़ितों की मदद के लिए समिति) के नरेंद्र मोदी को मोरबी के आसपास के प्रभावित इलाकों में राहत कार्य के लिए आरएसएस के महाराष्ट्र विंग से 5 लाख रुपये का चेक मिला। पीएम मोदी की अध्यक्षता वाली समिति ने राहत कार्य के लिए 14 लाख रुपये जुटाए थे जो मुफ्त चिकित्सा सहायता  और आपदा से प्रभावित लोगों के लिए खाद्यान्न और वस्त्र वितरण में खर्च किए गए।

1988 में मोदी पहली बार एक राजनेता के रूप में उभरे

साल 1988 में नरेंद्र मोदी का नाम पहली बार द टाइम्स ऑफ इंडिया के पन्नों में एक राजनेता के रूप में सामने आया था। वह भी किसानों की मांगों पर कांग्रेस विरोधी रास्ता रोको आंदोलन के आयोजक के रूप में। वह आरएसएस से भाजपा में गुजरात में पार्टी के महासचिव के रूप में शामिल हुए थे और उनका नाम अमरसिंह चौधरी की तत्कालीन कांग्रेस सरकार के खिलाफ किसानों की मांगों के समर्थन में अहमदाबाद में आयोजित एक रास्ता रोको के संबंध में सामने आया था। उस समय राज्य के बाहर बहुत से लोगों ने मोदी के बारे में नहीं सुना था। उसी वक्त मोदी ने दावा किया कि विरोध प्रदर्शन के हिस्से के रूप में राज्य भर में 50,000 से अधिक भाजपा कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया था। 

मोदी को 1991 में मिली व्यापक पहचान

वहीं साल 1991 में मोदी को पहली व्यापक पहचान तब मिली जब वे 1990 में लालकृष्ण आडवाणी द्वारा आयोजित सोमनाथ-से-अयोध्या रथ यात्रा के गुजरात चरण के प्रमुख आयोजक बने।

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