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17th Lok Sabha: 17वीं लोकसभा में 222 कानून पारित, अंतिम बैठक शनिवार को समाप्त, अनुच्छेद 370 हटाने और महिला आरक्षण से सहित कई महत्वपूर्ण विधेयक पारित, देखें

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: February 10, 2024 18:53 IST

17th Lok Sabha: ‘‘17वीं लोकसभा इसलिए भी विशेष है कि भारत के अमृतकाल में संसद के पुराने भवन और नये भवन दोनों में अपने संसदीय दायित्वों को हमने निभाया।’’

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ठळक मुद्देकई ऐतिहासिक विधेयक इस लोकसभा में पारित किए गए।शून्यकाल में सरकार ने सकारात्मक उत्तर देकर नई परंपरा शुरू की।17वीं लोकसभा में कुल मिलाकर 222 कानून पारित किए गए।

17th Lok Sabha: संसद की कार्यवाही शनिवार को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी गयी और इसके साथ ही बजट सत्र का समापन हो गया। इस दौरान अंतरिम आम बजट, जम्मू कश्मीर के अंतरिम बजट, परीक्षा पत्र लीक होने के विरुद्ध लाये गये विधेयक सहित कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित किया गया तथा अर्थव्यवस्था के बारे में सरकार द्वारा लाये गये श्वेत पत्र एवं अयोध्या में राम मंदिर निर्माण व रामलला की प्राण प्रतिष्ठा पर भी चर्चा की गयी। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सत्रहवीं लोकसभा के अंतिम सत्र को अनिश्चित काल के लिए स्थगित करने से पहले अपने पारंपरिक संबोधन में इस दौरान विभिन्न विधेयक पारित करवाने में विभिन्न दलों के सहयोग का उल्लेख किया। राज्यसभा में सभापति जगदीप धनखड़ ने उच्च सदन की बैठक को अनिश्चित काल के लिए स्थगित किए जाने से पहले इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि सत्र के दौरान उच्च सदन ने कई दिन निर्धारित समय से अधिक बैठकर विधायी एवं अन्य सूचीबद्ध कामों को पूरा किया।

वर्तमान लोकसभा की अंतिम बैठक शनिवार को समाप्त हुई और निचले सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। इस 17वीं लोकसभा में कामकाज की उत्पादकता 97 प्रतिशत रही और अनुच्छेद 370 हटाने और महिला आरक्षण से संबंधित कई महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए गए।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 17वीं लोकसभा में बजट सत्र के अंतिम दिन अपने संबोधन में कहा कि इस लोकसभा में 97 प्रतिशत उत्पादकता रही जिसमें विशेष रूप से महिला सांसदों की भागीदारी रही। सदन की बैठक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी और विभिन्न दलों के नेता उपस्थित थे।

बिरला ने कहा, ‘‘यह हमारे लिए गर्व का विषय रहा कि इस सत्र में नारी वंदन विधेयक पारित हुआ...यह महिला सशक्तीकरण में अभूतपूर्व उपलब्धि थी।’’ उन्होंने कहा कि कई ऐतिहासिक विधेयक इस लोकसभा में पारित किए गए।

बिरला का कहना था, ‘‘हमने भारतीय चिंतन को आगे बढ़ाने के लिए कानून पारित किए।’’ उन्होंने कहा, ‘‘17वीं लोकसभा इसलिए भी विशेष है कि भारत के अमृतकाल में संसद के पुराने भवन और नये भवन दोनों में अपने संसदीय दायित्वों को हमने निभाया।’’ उन्होंने कहा कि इस लोकसभा में पहली बार शून्यकाल में सरकार ने सकारात्मक उत्तर देकर नई परंपरा शुरू की।

बिरला ने भावुक होते हुए कहा कि संसद के सभी सदस्यों से उनका जुड़ाव हो गया है और सभी परिवार की तरह बन गए हैं। उन्होंने अपने कार्यकाल में कुछ सदस्यों को अनुशासनहीनता के लिए निलंबित किये जाने जैसे फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि वह व्यक्तिगत रूप से कभी इस तरह के कदम उठाने के पक्षधर नहीं रहे और उन्हें इस तरह के फैसलों का दुख हुआ।

बिरला ने कहा कि भविष्य में सभी सदस्य इस सदन की मर्यादा और गरिमा को बनाकर रखेंगे, वह ऐसी आशा रखते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘इस सदन की उच्च परंपरा, परिपाटियां और प्रतिष्ठा रही हैं। मैंने भी पूर्ववर्ती अध्यक्षों की तरह इन्हें बनाकर रखने का प्रयास किया है।’’ उन्होंने कहा कि 17वीं लोकसभा में कुल मिलाकर 222 कानून पारित किए गए।

दोनों सदनों को अनिश्चित काल के स्थगित किये जाने के समय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दोनों सदनों में मौजूद थे। बजट सत्र 31 जनवरी को राष्ट्रपति द्वारा संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करने के साथ शुरू हुआ। नये संसद भवन में यह राष्ट्रपति का पहला अभिभाषण था। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक फरवरी को अंतरिम बजट पेश किया।

दोनों सदनों में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा हुई और जिसका जवाब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दिया। इसी के साथ दोनों सदनों में अंतरिम बजट एवं जम्मू कश्मीर के अंतरिम बजट पर चर्चा कर उन्हें मंजूरी दी गयी। बजट सत्र के दौरान, परीक्षापत्रों को लीक होने से रोकने के मकसद से लाये गये लोक परीक्षा अनुचित साधनों का निवारण विधेयक 2024, विभिन्न जातियों को अनुसूचित जाति एवं जनजाति की सूची में डालने से संबंधित विधेयक सहित प्रमुख विधेयक पारित किये गये।

इस सत्र के दौरान अर्थव्यवस्था की स्थिति के बारे में सरकार द्वारा लाये गये श्वेत पत्र तथा अयोध्या में ‘श्रीराम मंदिर के ऐतिहासिक मंदिर निर्माण और श्री रामलला की प्राण प्रतिष्ठा’ के बारे में भी चर्चा हुई। सत्र नौ फरवरी तक प्रस्तावित था किंतु बाद में इसे एक दिन के लिए बढ़ा दिया गया।

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