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डब्ल्यूएचओ ने कहा, "कोविड के कारण पैदा हुई भयावह स्थिति से तत्काल निपटने की जरूरत है"

By आशीष कुमार पाण्डेय | Updated: April 6, 2023 19:08 IST

डब्ल्यूएचओ की दक्षिण-पूर्व एशिया की क्षेत्रीय निदेशक डॉक्टर पूनम खेत्रपाल सिंह ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन कोरोना के बाद उपजे हालात में सभी नागरिकों को सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (यूएचसी) के माध्यम से अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।

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ठळक मुद्देडब्ल्यूएचओ ने कोरोना महामारी से उत्पन्न हुए भयावन स्थिति से निपटने के लिए वैश्विक आह्वान कियाडब्ल्यूएचओ की क्षेत्रीय निदेशक डॉक्टर पूनम खेत्रपाल सिंह ने कहा कि कोरोना के बाद चुनौतियां बढ़ी हैंलेकिन डब्ल्यूएचओ सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के जरिये अच्छी स्वास्थ्य सुविधा देने को प्रतिबद्ध है

दिल्ली: विश्व स्वास्थ्य दिवस की पूर्व संध्या पर डब्ल्यूएचओ ने कोरोना महामारी से उत्पन्न हुए भयावन स्थिति से निपटने के लिए सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के जरिये बुनियादी  स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत बनाने का आह्वान किया है। डब्ल्यूएचओ की दक्षिण-पूर्व एशिया की क्षेत्रीय निदेशक डॉक्टर पूनम खेत्रपाल सिंह ने गुरुवार को कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन कोरोना के बाद उपजे हालात में सभी नागरिकों को सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (यूएचसी) के माध्यम के जरिये अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन विश्व स्वास्थ्य दिवस के मौके पर विश्विक स्तर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य और कल्याण में सुधार के 75 साल पूरे होने का जश्न मना रहा है। दशकों से विश्व स्वास्थ्य संगठन का इस दिशा में प्रयास है कि सभी के लिए गुणवत्तापूर्ण, सस्ती और व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल (पीएचसी) सुलभ हो और इसके लिए लगातार प्रयास जारी हैं।

डॉक्टर पूनम खेत्रपाल सिंह ने कहा कि वैश्विक स्तर पर यूएचसी का लक्ष्य हासिल करने के लिए लगभग-लगभग एक दशक से सतत प्रयास चल रहा है और 2014 से यह विश्व स्वास्थ्य संगठन की आठ प्रमुख प्राथमिकताओं में से एक रहा है।

साल 2010 और 2019 के बीच में यूएचसी सेवा कवरेज सूचकांक को 47 से बढ़ाकर 61 कर दिया, जबकि 2000 और 2017 के बीच यूएचसी ने स्वास्थ्य पर अच्छा ख़र्च करके गरीब परिवारों की संख्या को 30 फीसदी से घटाकर छह फीसदी कर दिया। 2014 से यूएचसी क्षेत्र में डॉक्टरों, नर्सों और दवाइयों के लिहाज से भी 30 फीसदी से अधिक का सुधार हुआ है।

उन्होंने कहा कि यूएचसी के जरिये पांच देशों ने पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों और नवजात मृत्यु दर के सतत विकास लक्ष्य को हासिल कर लिया गया है और साल 2000 और 2020 के बीच इस क्षेत्र ने टीबी के क्षेत्र में व्यापक कार्य किया है, जिसके कारण टीबी मरीजों के दर में 34 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।

लेकिन इसके साथ ही डॉक्टर पूनम खेत्रपाल सिंह ने यह भी कहा, "स्वास्थ्य के क्षेत्र में अभी कई कार्य करने शेष हैं। आज कोविड-19 के संकट भरे माहौल में अब भी लगभग 40 फीसदी ऐसे लोग हैं, जो आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच से काफी पीछे हैं।" (समाचार एजेंसी पीटीआई के इनुट के साथ)

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