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Covid-19 JN.1 variant: 12 राज्यों में चार जनवरी तक जेएन.1 केस 619, कर्नाटक में हालत गंभीर, 199 मामले दर्ज, जाने केरल , महाराष्ट्र, गोवा, गुजरात और आंध्र प्रदेश का हाल

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: January 5, 2024 17:48 IST

Covid-19 JN.1 variant: संक्रमित लोगों में से अधिकांश व्यक्ति घरेलू उपचार का विकल्प अपना रहे हैं जो मामूली रूप से बीमार होने का संकेत है।

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ठळक मुद्देक्रमित होने के मामले बढ़ रहे हैं और देश में जेएन.1 उपस्वरूप का पता चला है।जेएन.1 उपस्वरूप का पता चलने के मद्देनजर निरंतर निगरानी बनाए रखने के लिए कहा है। कोविड-19 के लिए संशोधित निगरानी रणनीति को लेकर जारी किये गये हैं।

Covid-19 JN.1 variant: कोविड-19 के नए उपस्वरूप जेएन -1 से संक्रमित होने के मामले 12 राज्यों में चार जनवरी तक बढ़कर 619 हो गए। अधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया गया कि इनमें से 199 मामले कर्नाटक में दर्ज किए गए।

 जबकि केरल में 148 , महाराष्ट्र में 110, गोवा में 47 , गुजरात में 30, आंध्र प्रदेश में 30, तमिलनाडु में 26, दिल्ली में 15, राजिस्थान में चार जबकि तेलंगाना, ओडिशा और हरियाणा में एक-एक मामले दर्ज किये गये हैं। अधिकारियों ने कहा कि संक्रमित होने के मामले बढ़ रहे हैं और देश में जेएन.1 उपस्वरूप का पता चला है।

लेकिन अभी चिंता की कोई बात नही है क्योंकि संक्रमित लोगों में से अधिकांश व्यक्ति घरेलू उपचार का विकल्प अपना रहे हैं जो मामूली रूप से बीमार होने का संकेत है। केंद्र ने पहले ही राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को देश में कोविड-19 के नये मामलों की संख्या में वृद्धि और जेएन.1 उपस्वरूप का पता चलने के मद्देनजर निरंतर निगरानी बनाए रखने के लिए कहा है।

राज्यों को केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से साझा किये गये विस्तृत दिशा-निर्देशों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है। ये दिशा-निर्देश कोविड-19 के लिए संशोधित निगरानी रणनीति को लेकर जारी किये गये हैं।

राज्यों से कहा गया है कि वे मामलों की बढ़ती प्रवृत्ति का जल्द पता लगाने के लिए सभी स्वास्थ्य सुविधा केंद्रों में इन्फ्लूएंजा और गंभीर श्वसन जैसी बीमारी से पीड़ित होने के के मामलों की नियमित रूप से निगरानी करें और जिला वार रिपोर्ट भेजें। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने तेजी से बढ़ते प्रसार को देखते हुए जेएन.1 को ‘अध्ययन के एक अलग प्रकार’ के रूप में वर्गीकृत किया है, लेकिन कहा है कि इससे वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य को कम खतरा है। 

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