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रूस-यूक्रेन संकट से बढ़ सकती है भारत की आर्थिक चुनौती, जानें क्या होगा नुकसान

By मनाली रस्तोगी | Updated: February 24, 2022 09:14 IST

रूस और यूक्रेन के बीच तनाव जारी है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि रूस कभी भी यूक्रेन पर हमला कर सकता है। अगर ऐसा होता है तो इस युद्ध की वजह से वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ भारत की जेब पर भारी असर पड़ सकता है।

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ठळक मुद्देरूस और यूक्रेन के बीच तनाव जारी है।ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि रूस कभी भी यूक्रेन पर हमला कर सकता है। अगर रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध होता है तो इसकी वजह से वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ भारतीयों की जेब पर भारी असर पड़ सकता है।

नई दिल्ली:यूक्रेन और रूस के बीच तनाव जारी है, जिसपर दुनियाभर की नजरें टिकी हुई हैं। बता दें कि दोनों के बीच जंग के हालात बने हुए हैं। इसी क्रम में अगर रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध होता है तो इसकी वजह से वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ भारत के आम आदमी की जेब पर भारी असर पड़ सकता है। यही नहीं, आम आदमी के साथ इस जंग का असर देश की अर्थव्यवस्था पर भी देखने को मिलेगा। फिलहाल, भारतीय अर्थव्यवस्था अभी भी कोरोना वायरस महामारी से उबर रही है। ऐसे में अगर रूस यूक्रेन पर आक्रमण करता है तो इसका ग्लोबल और इंडियन इकॉनमी पर गलत असर पड़ सकता है।

बढ़ेगी नेचुरल गैस की कीमत

यूक्रेन-रूस संकट ने ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत को 96.7 डॉलर प्रति बैरल पर धकेल दिया है, जो सितंबर 2014 के बाद से सबसे अधिक है। रूस कच्चे तेल के सबसे बड़े उत्पादकों में से एक है। मौजूदा संकट से आने वाले दिनों में कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से अधिक तक जा सकती हैं। कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि का वैश्विक जीडीपी पर प्रभाव पड़ेगा। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, जेपी मॉर्गन के विश्लेषण में कहा गया है कि तेल की कीमतों में 150 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी से वैश्विक जीडीपी विकास दर घटकर सिर्फ 0.9 फीसदी रह जाएगी।

थोक मूल्य सूचकांक (WPI) बास्केट में कच्चे तेल से संबंधित उत्पादों की प्रत्यक्ष हिस्सेदारी 9 प्रतिशत से अधिक है। इसलिए, ब्रेंट क्रूड की कीमतों में वृद्धि, भारत की WPI मुद्रास्फीति में लगभग 0.9 प्रतिशत की वृद्धि करेगी। विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर रूस यूक्रेन पर आक्रमण करता है तो घरेलू प्राकृतिक गैस (सीएनजी, पीएनजी, बिजली) की कीमत 10 गुना बढ़ सकती है।

बढ़ सकती है एलपीजी, केरोसिन सब्सिडी

रूस और यूक्रेन के बीच जारी तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से एलपीजी और केरोसिन पर सब्सिडी बढ़ने की उम्मीद है। ऐसे में अगर दोनों देशों के बीच जंग होती है तो इससे एलपीजी और केरोसिन सब्सिडी में बढ़ोतरी हो सकती है।

पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ेंगी

पहले से ही कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने पूरे भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि में योगदान दिया है, जिसकी वजह से देश ने साल 2021 में ईंधन की कीमतों के मामले में रिकॉर्ड ऊंचाई देखी है। ऐसे में अगर रूस-यूक्रेन संकट जारी रहता है, तो भारत पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि देख सकता है। तेल भारत के कुल आयात का लगभग 25 प्रतिशत है। भारत अपनी जरूरत का 80 फीसदी से ज्यादा तेल आयात करता है। तेल की कीमतों में तेजी का असर चालू खाते के घाटे पर पड़ेगा।

बढ़ सकते हैं गेहूं के दाम

अगर ब्लैक सी क्षेत्र से अनाज के प्रवाह में रुकावट आती है तो विशेषज्ञों को डर है कि इसका कीमतों और ईंधन खाद्य मुद्रास्फीति पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है। रूस दुनिया का शीर्ष गेहूं निर्यातक है जबकि यूक्रेन गेहूं का चौथा सबसे बड़ा निर्यातक है। दोनों देशों का गेहूं के कुल वैश्विक निर्यात का लगभग एक चौथाई हिस्सा है।

संयुक्त राष्ट्र की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, आपूर्ति श्रृंखलाओं पर महामारी के प्रभाव के कारण बड़े पैमाने पर खाद्य कीमतें एक दशक से भी अधिक समय में अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। आने वाले दिनों में ऊर्जा और खाद्य कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा सकता है। परिणामी निवेशक भावना से दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं में निवेश और विकास को खतरा हो सकता है।

मेटल की कीमतें बढ़ेंगी

रूस पर प्रतिबंधों की आशंकाओं के बीच पैलेडियम (ऑटोमोटिव एग्जॉस्ट सिस्टम और मोबाइल फोन में इस्तेमाल होने वाला मेटल) की कीमत हाल के हफ्तों में बढ़ गई है। रूस पैलेडियम का दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक है।

 

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