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One Nation, One Subscription plan: 1 जनवरी 2025 से शुरू?, 1.8 करोड़ छात्र को फायदा, माता-पिता को इसके बारे में जानने की जरूरत...

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: December 10, 2024 21:32 IST

One Nation, One Subscription plan: 451 राज्य सार्वजनिक विश्वविद्यालय, 4,864 कॉलेज और 172 राष्ट्रीय महत्व के संस्थान उन 6,380 उच्च शिक्षा और अनुसंधान संस्थानों में शामिल होंगे।

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ठळक मुद्दे30 प्रकाशकों द्वारा प्रकाशित शीर्ष पत्रिकाओं तक पहुंच प्राप्त होगी।निजी शैक्षणिक संस्थानों तक विस्तारित करने की योजना बना रही है।संस्थानों को 13,400 शोध पत्रिकाओं तक पहुंच प्राप्त होगी।

One Nation, One Subscription plan: सरकार द्वारा वित्तपोषित विश्वविद्यालयों और आईआईटी समेत देशभर के उच्च शिक्षण संस्थानों के करीब 1.8 करोड़ छात्र एक जनवरी से दुनिया भर की शीर्ष पत्रिकाओं में प्रकाशित शोध पत्रों तक पहुंच बना सकेंगे। छात्रों को यह लाभ केंद्र सरकार की ‘एक राष्ट्र, एक सदस्यता’ (वन नेशन, वन सब्सक्रिप्शन) पहल के तहत मिलेगा। केंद्र सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार ए. के. सूद ने मंगलवार को एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए बताया कि 'एक राष्ट्र, एक सदस्यता' योजना के पहले चरण के तहत विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, चिकित्सा, गणित, प्रबंधन, सामाजिक विज्ञान और मानविकी पर 13,400 से अधिक अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाएं शोधकर्ताओं के लिए उपलब्ध कराई जाएंगी।

सूद ने बताया कि इस पहल के तहत 451 राज्य सार्वजनिक विश्वविद्यालय, 4,864 कॉलेज और 172 राष्ट्रीय महत्व के संस्थान उन 6,380 उच्च शिक्षा और अनुसंधान संस्थानों में शामिल होंगे, जिन्हें एल्सेवियर, स्प्रिंगर नेचर और विले सहित 30 प्रकाशकों द्वारा प्रकाशित शीर्ष पत्रिकाओं तक पहुंच प्राप्त होगी।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग सचिव अभय कराडीकर ने कहा, ‘‘इससे पहले, आईआईटी (भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान) या केंद्रीय विश्वविद्यालय जैसे संस्थान विशिष्ट विषयों से संबंधित पत्रिकाओं के एक छोटे समूह की सदस्यता (सब्सक्रिप्शन) लेते थे, लेकिन ‘एक राष्ट्र, एक सदस्यता’ (ओएनओएस) के तहत, सभी संस्थानों को 13,400 शोध पत्रिकाओं तक पहुंच प्राप्त होगी।’’

उन्होंने कहा कि ओएनओएस (वन नेशन, वन सब्सक्रिप्शन) पहल एक जनवरी को शुरू की जाएगी और इसके तहत छात्रों को अगले तीन वर्षों तक शीर्ष पत्रिकाओं तक पहुंच उपलब्ध रहेगी। ओएनओएस के दूसरे चरण के तहत सरकार सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के माध्यम से इस पहल को निजी शैक्षणिक संस्थानों तक विस्तारित करने की योजना बना रही है।

तीसरे चरण में सार्वजनिक पुस्तकालयों में निर्दिष्ट पहुंच बिंदुओं के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं तक सार्वभौमिक पहुंच प्रदान की जाएगी। इस पहल को तीन वर्ष की अवधि के लिए 6,000 करोड़ रुपये की लागत से केन्द्रीय क्षेत्र की योजना के रूप में पेश किया गया है।

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