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कौन हैं जॉयदीप दत्ता?, नौकरी की तलाश में बिजनेस की और आज...

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: February 14, 2025 12:47 IST

Kolkata: 2020 में लॉकडाउन की वजह से बिजनेस बुरी तरह प्रभावित हुआ और उन्हें गांव लौटना पड़ा। कई महीनों तक काम ठप पड़ा रहा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।

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ठळक मुद्देखुद का बिजनेस शुरू किया और करोड़ों की कंपनी खड़ी कर दी!जॉयदीप दत्ता का जन्म 26 मार्च 1991 को माणबाजार, पश्चिम बंगाल में हुआ था।

Kolkata: आजकल अच्छी डिग्री लेने के बाद भी नौकरी मिलना आसान नहीं है। जॉयदीप दत्ता की कहानी हर उस इंसान के लिए एक सीख है, जो बेरोजगारी से जूझ रहा है। जब उन्हें MCA के बाद भी नौकरी नहीं मिली, तो उन्होंने खुद का बिजनेस शुरू किया और करोड़ों की कंपनी खड़ी कर दी!

शुरुआत से ही स्ट्रगल

जॉयदीप दत्ता का जन्म 26 मार्च 1991 को माणबाजार, पश्चिम बंगाल में हुआ था। उन्होंने Asansol Bidhan Chandra College से BCA और फिर MCA (2014) किया। पढ़ाई के बाद सोचा था कि कोई बड़ी MNC में नौकरी मिल जाएगी, लेकिन 50 से ज्यादा कंपनियों में अप्लाई करने के बाद भी हर जगह रिजेक्शन मिला। उन्होंने Capgemini के ऑफ-कैंपस में 90% स्कोर किया, लेकिन कम्युनिकेशन स्किल की वजह से इंटरव्यू में बाहर कर दिया गया। बड़ी कंपनियों में 60% throughout criteria की वजह से इंटरव्यू तक का मौका नहीं मिला।

जब नौकरी नहीं मिली, तो खुद का रास्ता बनाया

जब कोई कंपनी उन्हें जॉब देने को तैयार नहीं थी, तो उन्होंने खुद कुछ करने की ठानी। उन्होंने *ब्लॉगिंग और डिजिटल मार्केटिंग* की तरफ कदम बढ़ाया और खुद से सीखना शुरू किया। 2019 में दत्ता ने अपनी खुद की IT कंपनी Affnosys India शुरू की। शुरुआती दिनों में 131 वर्क-फ्रॉम-होम इंटर्न्स के साथ काम किया और धीरे-धीरे उनके पास 100+ क्लाइंट्स हो गए।

लॉकडाउन में सब खत्म, लेकिन हिम्मत नहीं हारी!

2020 में लॉकडाउन की वजह से बिजनेस बुरी तरह प्रभावित हुआ और उन्हें गांव लौटना पड़ा। कई महीनों तक काम ठप पड़ा रहा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। 2023 में उन्होंने फिर से अपने बिजनेस को नए सिरे से शुरू किया। उन्होंने डिजिटल मार्केटिंग सलाहकार, सोशल मीडिया मार्केटिंग, ब्रांड मैनेजमेंट की दुनिया में हाथ आजमाया। उनके पुराने क्लाइंट्स ने फिर से उन पर भरोसा किया और उनका बिजनेस दोबारा खड़ा हो गया।

आज करोड़ों की कंपनी के मालिक!

आज दत्ता का बिजनेस करोड़ों का सालाना टर्नओवर कर रहा है। वो *बड़े-बड़े ब्रांड्स और कंपनियों को डिजिटल मार्केटिंग की सर्विस दे रहे हैं और खुद एक ब्रांड बन चुके हैं!

इस कहानी से क्या सीख मिलती है?

दत्ता की कहानी उन सभी लोगों के लिए एक मोटिवेशन है, जो बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं। अगर नौकरी न मिले, तो *निराश होने से बेहतर है कि आप खुद कुछ करने की सोचें। अगर मेहनत और सही सोच हो, तो कामयाबी जरूर मिलती है!

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