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मोदी सरकार को एक और बड़ा झटका, मूडीज ने घटाया GDP ग्रोथ का अनुमान, कोरोना वायरस को बताया इसकी वजह

By अनुराग आनंद | Updated: February 17, 2020 12:54 IST

अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) ने भी भारत समेत वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर अपने रिपोर्ट में जीडीपी में सुस्ती की बात कही गई है। इसके साथ ही उसने व्यापार व्यवस्था में सुधार के बुनियादी मुद्दों को भी उठाया था।

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ठळक मुद्देमूडीज ने कहा कि कोरोना वायरस की वजह से भारत समेत दुनिया की अर्थव्यस्था में गिरावट आई है। मूडीज ने 2021 में जीडीपी बढ़त के अनुमान को भी 6.7 फीसदी से घटाकर 5.8 फीसदी कर दिया है।

ग्लोबल क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज ने अपनी रिपोर्ट में नरेंद्र मोदी सरकार को झटका दिया है। मूडीज ने कहा कि वर्तमान वित्तीय वर्ष में देश की जीडीपी में कमी आ सकती है। 

मूडीज ने अपने रिपोर्ट में दावा किया है कि अनुमानित जीडीपी 6.6 फीसदी से घटकर 5.4 फीसदी हो सकता है। इसके साथ ही मूडीज ने 2021 में जीडीपी बढ़त के अनुमान को भी 6.7 फीसदी से घटाकर 5.8 फीसदी कर दिया है।

द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक,  कि पिछले दो वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था में तेजी से गिरावट आई है। 2019 में पहली तिमाही में देश की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में अल्प 4.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी।

मूडीज ने कहा कि मौजूदा तिमाही में  भारतीय अर्थव्यवस्था बेहतर स्थिति में जाने की तरफ बढ़ सकती है, लेकिन यह पहले की अपेक्षा धीमी होगी। इसके साथ ही अपने रिपोर्ट में मूडीज ने इसके लिए कोरोना के कहर को जिम्मेदार बताया है। मूडीज ने कहा कि कोरोना की वजह से भारत समेत दुनिया की अर्थव्यस्था में गिरावट आई है। 

इसके पहले अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) ने भी भारत समेत वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिये वृद्धि को लेकर अपने अनुमान पेश किए थे। आईएमएफ की रिपोर्ट में भी देश की अर्थव्यस्था में सुस्ती की बात कही गई थी। इसके साथ ही उसने व्यापार व्यवस्था में सुधार के बुनियादी मुद्दों को भी उठाया था। 

आईएमएफ के ताजा अनुमान के अनुसार 2019 में वैश्विक वृद्धि दर 2.9 प्रतिशत, 2020 में 3.3 प्रतिशत और 2021 में 3.4 प्रतिशत रहेगी। वहीं मुद्राकोष ने भारत के आर्थिक वृद्धि के अनुमान को कम कर 2019 के लिये 4.8 प्रतिशत कर दिया है। जबकि 2020 और 2021 में इसके क्रमश: 5.8 प्रतिशत और 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है।

विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) के सालाना शिखर सम्मेलन के उद्घाटन से पहले मुद्राकोष की प्रबंध निदेशक क्रिस्टलीना जॉर्जिवा ने कहा कि कोष का नीति निर्माताओं को बस यही सरल सा सुझाव है कि वे वह सब करते रहें जो परिणाम दे सके जिसे व्यवहार में लाया जा सके।

उन्होंने आगाह करते हुए कहा कि अगर वृद्धि में फिर से नरमी आती है तो हर किसी को समन्वित तरीके से फिर से और ततकाल कदम उठाने के लिये तैयार रहना चाहिए। आईएमएफ ने कहा कि हम अभी बदलाव बिंदु पर नहीं पहुंचे हैं यही वजह है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिये वृद्धि परिदृश्य को मामूली कम किया जा रहा है।

टॅग्स :नरेंद्र मोदीइंडियासकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी)इकॉनोमी
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