US-Venezuela tension LIVE: नए साल के शुरू में वेनेजुएला पर अमेरिकी हमला और राष्ट्रपति मादुरो को पत्नी समेत उठा ले जाना विश्व शांति और सुरक्षा को गंभीर खतरे का ही इशारा है. सभ्य समाज और कानूनसम्मत व्यवस्था में कल्पना से भी परे होना चाहिए कि एक देश दूसरे देश पर हमला कर उसके राष्ट्रपति को इस तरह पत्नी समेत उठा ले जाए, लेकिन इक्कीसवीं शताब्दी में यह होते हुए पूरी दुनिया ने देखा. इसके बावजूद अधिकांश देशों की प्रतिक्रिया निजी हानि-लाभ से प्रेरित है तो समझना मुश्किल नहीं कि हम तेजी से ‘जंगल राज’ की ओर बढ़ रहे हैं, जिसमें ‘जिसकी लाठी’, ‘उसी की भैंस’ होती है.
अंतर्राष्ट्रीय कानून इस तरह किसी संप्रभु देश पर हमला करने की छूट दूसरे देश को नहींदेते हैं. तस्करी रोकने के बहुत सारे उपाय हैं. पाकिस्तान दशकों से आतंकवादी, ड्रग्स और नकली करेंसी भेज कर भारत में अस्थिरता और आतंकवाद फैला रहा है, लेकिन हमने उचित अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर उसे बेनकाब करते हुए दबाव बनाने का कूटनीतिक रास्ता अपनाया है.
सिर्फ आतंकवादी हमलों का जवाब ही सैन्य कार्रवाई से दिया गया है. अपनी सीमाओं पर चौकसी चाक-चौबंद करने के बजाय जिस देश से कथित रूप से तस्करी हो रही हो, उस पर हमला और उसके राष्ट्रपति को इस तरह गिरफ्तार कर लेना भविष्य के लिए खतरनाक मिसाल बन सकता है. अगर रूस इसी तरह यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की को उठा ले या फिर चीन भी ताइवान पर हमला कर ऐसा ही करे,
तब क्या विश्व व्यवस्था नाम की कोई चीज रह जाएगी? राजधानी कराकास पर हमले के बाद मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस को आतंकवादरोधी अमेरिकी बल ‘डेल्टा फोर्स’ जिस तरह बेडरूम से घसीटता हुआ ले गया, वह किसी अंडरवर्ल्ड गैंग की कार्रवाई ज्यादा लगती है. ऐसे मामलों के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय बेहतर मंच हैं.
वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले के मूल में भी उसकी असली मंशा पर पूरी दुनिया को संदेह है. कम आबादी और ज्यादा क्षेत्रफलवाला वेनेजुएला ‘मिस वर्ल्ड’ और ‘मिस यूनिवर्स’ देने के लिए ही नहीं जाना जाता, उसके पास विश्व का सबसे बड़ा तेल भंडार भी है.
तेल बेच कर मुनाफा कमाने का ट्रम्प का बयान भी चर्चा में है. बेशक बस ड्राइवर से वर्कर्स यूनियन नेता और फिर वेनेजुएला के राष्ट्रपति बननेवाले मादुरो संत नहीं हैं, पर अपना नेता और नियति चुनने का अधिकार तो सिर्फ वेनेजुएला के नागरिकों को होना चाहिए.