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रहीस सिंह का ब्लॉग: मध्य-पूर्व में अमेरिका की ट्रम्प चाल

By रहीस सिंह | Updated: February 3, 2020 12:13 IST

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा 181 पृष्ठों वाले डाक्युमेंट में जिस इजराइल-फिलिस्तीन शांति का फारमूला पेश किया गया है, वह महाशक्तियों के ग्रेट गेम की वर्तमान कड़ी मात्र है.

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मध्य-पूर्व इतिहास के बहुत से पन्ने एक लंबे संघर्ष और साम्राज्यवादी षड्यंत्र की कहानी बयां करते हैं. इन पृष्ठों को गौर से देखा जाए तो सही अर्थो में मध्य-पूर्व साम्राज्यवादी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने वाली चालों के लिए एक प्ले-ग्राउंड सा लगता है. आज भी इजराइल और फिलिस्तीन वैश्विक शक्तियों के लिए बैलेंस ऑफ पॉवर की तरह हैं, फिर चाहे वह यूरोपीय शक्तियां रही हों, अमेरिका हो या रूस-चीन. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा 181 पृष्ठों वाले डाक्युमेंट में जिस इजराइल-फिलिस्तीन शांति का फारमूला पेश किया गया है, वह महाशक्तियों के ग्रेट गेम की वर्तमान कड़ी मात्र है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ बड़ी ही प्रसन्न मुद्रा के साथ और तालियों की गड़गड़ाहट के बीच 181 पृष्ठों वाली योजना 29 जनवरी को पेश की. इस दौरान फिलिस्तीनी नेता अनुपस्थित रहे. ट्रम्प ने इस योजना को पेश करते हुए कहा कि मैं छोटी चीजों के समाधान या बड़ी समस्याओं से दूर भागने के लिए नहीं चुना गया था. यानी वे बताना चाहते थे वे महान कार्यो को संपन्न करने के लिए ही अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में चुने गए थे. इसलिए उन्होंने घोषणा की ‘हम मिलकर पश्चिम एशिया में नई सुबह ला सकते हैं.’

ट्रम्प के ह्वाइट हाउस ने जिस प्रस्ताव योजना को जारी किया है, उसमें मुख्य बिंदु कुछ इस प्रकार हैं- यरुशलम शहर के पूर्व और उत्तर में संभावित फिलिस्तीनी राजधानी के साथ यरुशलम को इजराइल की अविभाजित राजधानी के रूप में स्थापित किया जाएगा. फिलिस्तीनी टेरिटरी में बड़ी संख्या में स्थापित इजराइली सैटलमेंट्स (बस्तियों) की पहचान इजराइल के हिस्से के रूप में की जाएगी. पश्चिमी तट (वेस्ट बैंक) में हुए लगभग 30 प्रतिशत नुकसान की भरपाई गाजा के निकट रेगिस्तानी हिस्से से की जाएगी. पश्चिमी तट और गाजा को हाई स्पीड रेल से जोड़ा जाएगा. जॉडर्न घाटी को मान्यता दी जाएगी, जो इजराइल के कब्जे वाले पश्चिमी तट का लगभग एक-तिहाई हिस्सा है. फिलिस्तीनी स्टेटहुड के लिए रास्ता तैयार किया जाएगा लेकिन यह कार्य सेना के और समुद्र के ऊपर सहित कुछ क्षेत्र में इजराइली सुरक्षा को खत्म किए बिना होगा.

इसके साथ ही इस योजना में शर्तो की श्रृंखलाबद्घ सीरीज भी शामिल है जो मूलत: फिलिस्तीनियों की स्वतंत्रता और हमास के विषय में प्रावधान करती है. इस योजना में फिलिस्तीन को भविष्य में देश का दर्जा दिए जाने का प्रावधान तो है लेकिन बेहद कड़ी शर्ते भी थोपी गई हैं जिनमें फिलिस्तीन का पूर्ण रूप से निशस्त्रीकरण और कब्जे वाली जमीन पर बनी बस्तियों पर इजराइली संप्रभुता को औपचारिक स्वीकृति देना भी शामिल है.  

कुल मिलाकर ट्रम्प और नेतन्याहू मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं. उन्हें जल्द ही अगला चुनाव लड़ना है. यह शांति योजना शायद इसी कार्य-कारण से निर्देशित है. यानी दोनोंे इसके जरिए आंतरिक राजनीति में पुनर्स्वीकृति चाहते हैं.

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