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भरत झुनझुनवाला का ब्लॉग: वैश्वीकरण से पीछे हटता अमेरिका

By भरत झुनझुनवाला | Updated: September 23, 2018 08:10 IST

इस परिस्थिति में हमें तय करना है कि हम ग्लोबलाइजेशन को पकड़े रहेंगे अथवा हम भी अमेरिका की तरह इससे पीछे हटेंगे। वैश्वीकरण का दूसरा बिंदु नई तकनीकों पर पेटेंट कानून का 

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विश्व अर्थव्यवस्था का रूप बदल रहा है। विकसित देशों की प्रमुख अर्थव्यवस्था अमेरिका ने वैश्वीकरण से पीछे हटने के कदम उठाए हैं। हाल में अमेरिका ने भारत और चीन से आयातित स्टील पर आयात कर बढ़ा दिए थे जिससे कि अमेरिकी स्टील निर्माताओं को इनसे प्रतिस्पर्धा करने में आसानी हो जाए। 

इस परिस्थिति में हमें तय करना है कि हम ग्लोबलाइजेशन को पकड़े रहेंगे अथवा हम भी अमेरिका की तरह इससे पीछे हटेंगे। वैश्वीकरण का दूसरा बिंदु नई तकनीकों पर पेटेंट कानून का 

डब्ल्यूटीओ के वजूद में आने के पहले कोई भी देश किसी दूसरे देश में आविष्कार की गई तकनीक की नकल करके अपने देश में उसका उपयोग कर सकता था।  विकासशील देशों ने आकलन किया कि पेटेंट से हुए नुकसान की तुलना में व्यापार से और निर्यातों से उन्हें लाभ ज्यादा होगा।

 इसलिए उन्होंने भी डब्ल्यूटीओ का समर्थन किया था। बीते दशक में परिस्थिति में मौलिक अंतर आया है। आज विकसित देशों में नई तकनीकों का आविष्कार कम हो रहा है। जैसे कई वर्षों से माइक्रोसॉफ्ट द्वारा नए विन्डोज प्रोग्राम का आविष्कार नहीं हो सका है। 

इस परिस्थिति में वैश्वीकरण अमेरिका के लिए हानिप्रद हो गया है। पेटेंट कानून से उनकी आय कम हो गई है। जबकि मैन्यूफैक्चरिंग के बाहर जाने से वहां पर रोजगार के अवसर कम हो गए हैं। इसलिए आज अमेरिका वैश्वीकरण से पीछे हट रहा है।  यह स्पष्ट है कि यदि सभी देश वैश्वीकरण को अपनाएं तो आज भारत के लिए वैश्वीकरण लाभप्रद है। प्रश्न यह है कि यदि अमेरिका वैश्वीकरण से पीछे हट रहा है तो क्या हमें भी वैश्वीकरण से पीछे हटना चाहिए अथवा वैश्वीकरण को पकड़े रहना चाहिए? 

मेरे आकलन में यदि अमेरिका के वैश्वीकरण से पीछे हटने के बावजूद हम वैश्वीकरण को पकड़े रहते हैं तो हमें दोहरा नुकसान होगा। वैश्वीकरण को पकड़े रहने से हमारे पेटेंट कानूनों के कारण आय बाहर जाती रहेगी जैसे हम विंडो सॉफ्टवेयर की नकल नहीं कर सकेंगे। 

और वैश्वीकरण को पकड़े रहने के कारण हमारे निर्यात भी नहीं बढ़ेंगे क्योंकि अमेरिका द्वारा हमारे निर्यातों पर आयात कर बढ़ा दिए गए हैं जैसे स्टील पर। इसके विपरीत हमारे देश में आयात बढ़ते जाएंगे रूप से वैश्वीकरण आज हमारे लिए लाभप्रद है। 

लेकिन यह तब ही लाभप्रद है जब दूसरे देश भी इसको अपनाएं। यदि सभी देश वैश्वीकरण को अपनाते हैं तो आज नई तकनीकों का आविष्कार कम होने से हमें पेटेंट से नुकसान कम होगा जबकि विश्व व्यापार में अपने माल के निर्यात करने की सुविधा मिलने से निर्यातों से लाभ ज्यादा होगा।

 मेरे आकलन में हमें भी अमेरिका से आयातित माल पर ही नहीं बल्कि चीन से भी आयातित माल पर आयात कर बढ़ाना चाहिए अन्यथा हमारे उद्योग वैश्वीकरण से दोहरे नुकसान की चपेटे में आएंगे। 

बाहर का सस्ता माल अपने देश में आएगा और हमारा माल बाहर नहीं जा सकेगा और हमारे लिए वैश्वीकरण घाटे का सौदा हो जाएगा।

टॅग्स :अमेरिका
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