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अभिलाष खांडेकर ब्लॉग: नये साल के नवसंकल्पों का समय!

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: January 3, 2025 06:47 IST

चूंकि विभिन्न देशों में प्रथा के अनुसार, जनवरी या वर्ष के अन्य महीनों में नये साल की शुरुआत को नये काम करने का सही समय माना जाता है, इसलिए इसे ‘संकल्प का मौसम’ भी कहा जाता है.

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नये साल के संकल्प, जिन्हें हम में से कई लोग हर साल एक जनवरी से लागू करने की कोशिश करते हैं, हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग होते हैं. ऐसे संभावित संकल्पों की सूची बनाना एक बहुत बड़ा काम हो सकता है. भले ही यह पश्चिमी अवधारणा या खास तौर पर अमीर लोगों का शौक लगता हो, लेकिन यह कहा जा सकता है कि इस परंपरा ने कई दशकों से आधुनिक भारतीय समाज में अपना पर्याप्त स्थान बनाया हुआ है.

ऐतिहासिक रूप से पता चलता है कि नये साल के लिए संकल्प लेने की प्रथा चार हजार साल से भी ज्यादा पुरानी है. लेकिन इसकी उत्पत्ति स्पष्ट रूप से ज्ञात या स्थापित नहीं है क्योंकि यह कोई व्यापक सामाजिक प्रथा नहीं थी बल्कि एक स्वैच्छिक व्यक्तिगत इच्छा थी या कुछ हद तक, समान विचारधारा वाले लोगों के छोटे समूहों तक सीमित थी. लेकिन शायद ही कभी अनिवार्य थी.

इन ‘संकल्पों’ या व्रतों में स्वस्थ जीवनशैली अपनाने से लेकर अलग-अलग तरीकों से अपने ज्ञान को बढ़ाने, पिछले साल के अधूरे कामों को पूरा करने, किताबें लिखने, लंबी छुट्टियों की योजना बनाने या दान-पुण्य करने आदि के लिए उठाए जाने वाले कदम शामिल थे. युवा और बुजुर्ग; पुरुष और महिलाएं; व्यवसायी और पेशेवर - सभी कुछ संकल्प लेने की कोशिश करते हैं और अगले ३६५ दिनों में उन्हें हासिल करने के लिए गंभीर प्रयास करते हैं.

बेशक, भारतीय राजनेताओं के बारे में बहुत कम जानकारी है. क्या वे अपनी मौजूदा स्थिति से बेहतर बनने का संकल्प करते हैं? क्या वे कभी भ्रष्टाचार में लिप्त न होने का फैसला करते हैं? या क्या उनमें से कुछ लोग यह शपथ ले सकते हैं कि वे कुछ भारी-भरकम रकमों के लिए ‘बिकेंगे’ नहीं और निष्पक्ष रूप से चुनी गई सरकार को गिराने का कारण नहीं बनेंगे? हम लोग इसका अनुमान शायद ही लगा सकते है! चूंकि विभिन्न देशों में प्रथा के अनुसार, जनवरी या वर्ष के अन्य महीनों में नये साल की शुरुआत को नये काम करने का सही समय माना जाता है, इसलिए इसे ‘संकल्प का मौसम’ भी कहा जाता है.

मेरे कई दोस्त पिछले नवंबर से ही कुछ ऐसा करने की योजना बना रहे थे जिसे वे वर्ष २०२५ में अपने परिवार के सदस्यों और दोस्तों के समर्थन के साथ जारी रख सकें. उनमें से कुछ ने धूम्रपान छोड़ने का फैसला किया - जो लंबे समय से एक बहुत ही आम संकल्प है. दूसरों ने अपनी जीवनशैली को बेहतर बनाने के लिए सुबह जल्दी उठकर लंबी सैर करने के संकल्पों पर चर्चा की. बाकी बचे कुछ और लोगों ने शराब पीने की आदत को कम करने का भी निश्चय किया. जो मित्र साहित्य में रुचि रखते थे, उनके मन में एक नई पुस्तक लिखने के बारे में विचार आते रहे, जिसका वे सपना देखते थे, लेकिन वे कभी कागज और कलम नहीं निकाल पाते थे... या फिर लैपटॉप खोलकर माउस घुमाकर अपने विचार कीबोर्ड पर नहीं टंकित कर पाते थे.

दुर्भाग्य से, अधिकांश ‘संकल्पों’ के साथ व्यावहारिक समस्या यह रही है कि वे वस्तुतः क्षणभंगुर साबित हुए हैं. बहुत कम मामलों में, नये साल के संकल्प उस वर्ष के दिसंबर तक पहुंच पाए हैं. एक सर्वेक्षण के अनुसार, कुछ प्रतिज्ञाएं जनवरी महीने के लगभग १०-१५ दिनों तक चलती हैं, जबकि अन्य नये साल के पहले महीने के अंत तक ही समाप्त हो जाती हैं. कुछ मार्च के अंत तक चलती हैं, लेकिन उससे शायद आगे नहीं.

फिर भी, नये साल की पूर्व संध्या पर (या कुछ मामलों में किसी के जन्मदिन पर), अनेक लोग खुद को एक अच्छी या नई दिशा में बढ़ने में मदद करने के लिए शुरुआत करने के बारे में सोचते हैं. शपथ भगवान या किसी ऐसे व्यक्ति के नाम पर ली जाती है जिसे आप प्यार करते हैं या सिर्फ अपनी संतुष्टि के लिए और दबावों का सामना करने की अपनी क्षमता का परीक्षण करने के लिए भी.

चुनौतीपूर्ण समय में, विशेष रूप से कोविड महामारी के बाद, लोग नये साल के लिए फिटनेस को अपना मुख्य एजेंडा बनाते हुए पाए गए हैं. यद्यपि संकल्पों की अवधि सामान्यतः अधिक नहीं होती, फिर भी किसी महत्वपूर्ण दिन की पूर्व संध्या पर योजना बनाना सहायक होता है.

हमारे जैसे बहुलतावादी समाज के लिए, एक भारतीय के रूप में २०२५ के लिए कुछ प्रतिज्ञाएं लेना उचित ही होगा.आइए हम सभी मिलकर जल की बर्बादी रोकने के बारे में सोचें, क्योंकि आगे चलकर वैश्विक स्तर पर जलसंकट और भी अधिक गंभीर होने वाला है.

हमने पिछले कुछ वर्षों में काफी सामाजिक संघर्ष और तनाव देखा है और २०२५ में बेहतर भारत के लिए सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक मतभेदों को खत्म करना आवश्यक होगा. क्या हम इस हेतु उचित संकल्प करें? हमारे जैसे देश और समाज के लिए नये साल पर हम सभी को महिलाओं के खिलाफ अत्याचारों को हर कीमत पर रोकने का भी संकल्प लेना चाहिए क्योंकि केवल कानून से काम नहीं चलेगा!

पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण कम करना, नदियों की रक्षा करना, शिक्षा और स्वास्थ्य मानकों में सुधार करना तथा भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना वे सामूहिक संकल्प हो सकते हैं जिन्हें हम भारत को रहने के लिए एक बेहतर स्थान बनाने के लिए ले सकते हैं.

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