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पायलटों पर न पड़े मनोवैज्ञानिक दबाव

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: June 20, 2025 07:15 IST

हमेशा मुस्कुराती रहने वाली हवाई सुंदरियां, पायलटों की तरह ही लगभग हर रोज अपनी जान जोखिम में डालती हैं.

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अभिलाष खांडेकर

अहमदाबाद के दिल दहलाने वाले विमान हादसे को हमारी सामूहिक यादों से मिटने में कई सप्ताह लग जाएंगे. यह केवल उन भारतीयों या विदेशियों के बारे में नहीं है जो दुर्भाग्य से एयर इंडिया ड्रीमलाइनर की भीषण दुर्घटना में मारे गए, बल्कि उन सभी लोगों के बारे में भी है जो नियमित रूप से दुनिया भर में उड़ान भरते रहते हैं.

सभी यात्रियों के अब मन में एक गहरा डर बना रहेगा, भले ही वे समय बचाने के लिए एक जगह से दूसरी जगह उड़ान भरकर अपने पेशेवर या पारिवारिक दायित्वों का पालन करना जारी रखें. लेकिन यह हवाई यात्रियों और उनके परिवारों को यह याद दिलाने का भी समय है कि वे वर्षों से यात्रा कर रहे थे और प्रशिक्षित पायलट और चालक दल उनका ध्यान रख रहे थे तथा उन्हें सुरक्षित घर पहुंचा रहे थे.

हालांकि, विमानन क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय नागरिक विमानन संगठन (आईसीएओ) और अमेरिका के विमानन नियामक संघीय विमानन प्रशासन (एफएए) ने भारत द्वारा अपनाए जा रहे उड़ान-योग्यता मानकों के आधार पर भारत को बहुत ऊंचा (वैश्विक औसत से ऊपर) दर्जा दिया है. रिपोर्ट के अनुसार, जहां 2018 में सुरक्षा रैंकिंग में भारत का रिकॉर्ड 69.95 प्रतिशत था, वहीं 2022 में यह 85.65 प्रतिशत हो गया, जब भारत सरकार की डीजीसीए (नागरिक उड्डयन महानिदेशक) संस्था का विश्व निकाय द्वारा निरीक्षण किया गया.

संयुक्त राष्ट्र निकाय के पास कई पैरामीटर हैं जिनके आधार पर हवाई सुरक्षा का निर्धारण किया जाता है. इनमें यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक अन्य निर्धारित प्रक्रियाओं के अलावा उड़ान योग्यता, कानून (भारत 100 प्रतिशत अनुपालन करता है), हवाई अड्डे और विविध संचालन शामिल हैं.

भारत सबसे तेजी से बढ़ता विमानन बाजार है और इसलिए इसमें सभी शीर्ष श्रेणी के कड़े सुरक्षा उपाय होने चाहिए. सरकार 2017 से ‘उड़ान’ जैसी योजनाओं को आगे बढ़ा रही है, जिससे इस क्षेत्र पर और बोझ बढ़ रहा है क्योंकि 90 अंतर्देशीय हवाई अड्डों को जोड़ने वाले 600 से अधिक हवाई मार्ग चालू हो चुके हैं.

अमेरिका और चीन के बाद तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाजार होने के नाते, भारत के, खासकर अहमदाबाद जैसी दिल दहला देने वाली दुर्घटनाओं के बाद, हर पहलू में बहुत अधिक सावधान रहने और तकनीकी रूप से मजबूत होने की जरूरत है.

यद्यपि दो अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियां अपने-अपने अंकेक्षण से संतुष्ट हैं - एफएए ने 2021 में भारत को श्रेणी 1 में रखा था - ‘अहमदाबाद’ हमें अधिक सतर्क रहने की याद दिलाता है; किसी भी मानव-जनित या मशीन से संबंधित दोषों को खारिज करते हुए सभी मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) का सख्ती से पालन करवाना होगा.

इतना कहने के बाद, यह हम सभी के लिए सैकड़ों पायलटों, सह-पायलटों, चालक दल, ग्राउंड स्टाफ, एयरोनॉटिक्स इंजीनियरों और एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) आदि में काम करने वाले लोगों का मनोबल बढ़ाने का भी समय है. आखिर पायलट भी इंसान ही हैं! हमेशा मुस्कुराती रहने वाली हवाई सुंदरियां, पायलटों की तरह ही लगभग हर रोज अपनी जान जोखिम में डालती हैं.

अगर यात्रियों को किसी दुर्घटना का डर है, तो पायलट और चालक दल हर समय कहीं ज्यादा तनावपूर्ण परिस्थितियों में उड़ते रहते हैं. क्या हम कल्पना कर सकते हैं कि मे-डे कॉल के बाद कैप्टन सुमित सभरवाल के दिमाग में क्या चल रहा होगा?

‘अहमदाबाद’ के बाद अब पायलटों और चालक दल पर अतिरिक्त मनोवैज्ञानिक दबाव कतई नहीं डालना चाहिए. सरकारी और निजी एयरलाइनों को और अधिक प्रयास करने चाहिए ताकि तकनीकी रूप से विमान किसी भी दुर्घटना के प्रति पूरी तरह सुरक्षित रहें. पायलटों और चालक दल को पूरी तरह से तनावमुक्त व खुश रखना आज की अहम जरूरत है.

टॅग्स :विमान दुर्घटनाहवाई जहाजएयर इंडिया
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