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सारंग थत्ते का ब्लॉगः चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ सैन्य ताकत का नया सितारा

By सारंग थत्ते | Updated: August 19, 2019 11:39 IST

कारगिल युद्ध की बीसवीं सालगिरह पर लाल किले से प्रधानमंत्नी ने इस पर आगे बढ़ने की बात अपने अंदाज में कही है. देश के सामने अब सीडीएस का सपना सच होता प्रतीत होता है.

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वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध में सेना और सरकार ने जहां एक तरफ अंतर्राष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान की हिमाकत को उजागर कर उसे मात देने का परचम लहराया था, वहीं इस युद्ध ने हमारी सेना की कमजोरियों से भलीभांति पहचान कराने को मजबूर किया था. इसी युद्ध के पराक्रम के बाद सरकार ने मंत्रियों के समूह का गठन किया था और के. सुब्रमण्यम के मार्गदर्शन में कारगिल रिव्यू कमेटी 2000 ने अपना काम शुरू किया था. इस समिति ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) बनाए जाने की अनुशंसा सर्वप्रथम की थी. इसके बाद सरकारी तंत्न ने 2001 और 2016 में सीडीएस बनाए जाने के लिए फिर से मंत्रियों के समूह की तर्ज पर दोबारा सिफारिश की थी. 

पहली बार रक्षा राज्य मंत्नी अरुण सिंह और तत्पश्चात लेफ्टिनेंट जनरल डी.बी. शेकटकर के नेतृत्व में सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित किया था. अब तीन साल के बाद, कारगिल युद्ध की बीसवीं सालगिरह पर लाल किले से प्रधानमंत्नी ने इस पर आगे बढ़ने की बात अपने अंदाज में कही है. देश के सामने अब सीडीएस का सपना सच होता प्रतीत होता है. हालांकि इस ओहदे पर कौन, कब आसीन होगा, इस बाबत खुलासा नहीं किया गया है, लेकिन  खबर ऐसी आ रही है कि सीडीएस के क्रियान्वयन के लिए एक समिति बनाई जा रही है और तकरीबन तीन महीने में खाका तैयार हो जाएगा. एक नए चार सितारे के अनुभवी फौजी अधिकारी की नियुक्ति इस साल के अंत तक होना तय है. कयास है कि तीनों सेना प्रमुखों में वरिष्ठ थल सेना प्रमुख विपिन रावत आने वाले समय में सीडीएस का ओहदा संभाल सकते हैं. वायुसेना प्रमुख सितंबर में सेवानिवृत्त हो रहे हैं, जबकि नौसेना प्रमुख ने हाल ही में अपना कार्यकाल शुरू किया है.

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) एक ऐसा पद होगा जो भारत सरकार के एकल-बिंदु सलाहकार के रूप में कार्य करेगा. संबंधित अधिकारी तीनों सेनाओं - थल सेना, नौसेना और वायु सेना - से संबंधित मामलों पर सरकार को सलाह देने की स्थिति में होगा, इस प्रकार भारत के सशस्त्न बलों को एकीकृत करेगा. सीडीएस बजट, उपकरण खरीद, प्रशिक्षण, संयुक्त सिद्धांतों और सैन्य अभियानों के नियोजन के संदर्भ में भी अंतर-सेवा संयुक्तता को बढ़ावा देने की भूमिका निभाएगा. सीडीएस भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए रक्षा खर्च को  प्राथमिकता देने के लिए एक बेहतर विकल्प बनेगा. 

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