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डॉ. जयंतीलाल भंडारी का ब्लॉग: अब कृषि विकास की नई रणनीति जरूरी

By डॉ जयंती लाल भण्डारी | Updated: November 27, 2021 07:40 IST

सरकार के द्वारा स्थायी राष्ट्रीय कृषि आयोग बनाया जा सकता है, जो किसानों की समस्याओं और उनके समाधान को लगातार सरकार तक पहुंचाता रहे। सरकार के द्वारा अनुबंध खेती के नियम में मानकीकरण सुनिश्चित करने के लिए बदलाव किया जा सकता है।

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23 नवंबर को लोकसभा बुलेटिन में तीन नए कृषि कानूनों को रद्द करने के लिए संसद के शीतकालीन सत्र में विधेयक प्रस्तुत किए जाने हेतु ‘द फार्म लॉज रिपील बिल, 2021’ सूचीबद्ध किया गया है। केंद्रीय कैबिनेट ने 24 नवंबर को इन कानूनों की वापसी के विधेयक को मंजूरी दे दी है। इस विधेयक को 29 नवंबर से शुरू हो रहे शीत सत्र के पहले दिन ही पेश करने की तैयारी है।

हाल ही में 19 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम संबोधन में कृषि कानूनों की वापसी का ऐलान किया। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री मोदी के द्वारा तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने के ऐलान के बाद भी आंदोलन से पीछे न हटते हुए आंदोलनकारी किसानों ने 22 नवंबर को लखनऊ में महापंचायत करके सरकार के सामने आंदोलन समाप्त करने के लिए कई मांगें रख दीं। इनमें न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को लेकर कानूनी गारंटी, बिजली संशोधन बिल वापसी, पराली जलाने पर जुर्माने के प्रावधानों को समाप्त करना आदि शामिल हैं। 

इस समय कृषि कानूनों की वापसी के बाद देश में कृषि एवं ग्रामीण विकास की मजबूती के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने के कई महत्वपूर्ण रणनीतिक आधार उभरकर दिखाई दे रहे हैं। यह बात महत्वपूर्ण है कि प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कृषि को प्रभावी बनाने, विकास की नई रणनीति और जीरो बजट खेती की तरफ प्रभावी कदम बढ़ाने के लिए एक कमेटी के गठन का फैसला भी घोषित किया है।

उन्होंने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, देश की बदलती आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर क्रॉप पैटर्न के वैज्ञानिक तरीके, एमएसपी को और अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने जैसे विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर भविष्य को ध्यान में रखते हुए नई कमेटी के द्वारा प्रभावी निर्णय लिए जाने की बात कही। नि:संदेह कृषि संबंधी मसलों के समाधान के लिए समिति बनाने के सरकार के फैसले से किसानों की मुश्किलों को दूर करने में मदद मिलेगी।

इससे सरकार को किसानों की आय के स्तर को बढ़ाने के लिए पर्याप्त कृषि नीति बनाने में मदद मिलेगी। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि किसानों की फसल का अच्छा मूल्य देंगे। सरकारी खरीद की प्रक्रिया जारी रहेगी, लेकिन किसान संगठन कानूनी गारंटी की मांग कर रहे हैं। स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि एमएसपी पर गारंटी कानून बना दिया जाए, तब भी इसे पूरा करना संभव नहीं है।

कानून बनने के बाद भी सरकार पूरा अनाज खरीद पाने में सक्षम नहीं होगी। सब्सिडी का ढांचा ढह जाएगा और निजी व्यापारी भी उसे खरीदने के लिए आगे नहीं आएंगे। यदि कोई ऐसा नियम बन भी जाए तो निजी व्यापारी ऐसा करके घाटा उठाने के बजाय अनाज के आयात को प्राथमिकता दे सकते हैं। जहां कृषि क्षेत्र को उभरते बाजार और मांग की परिस्थितियों के साथ भी तालमेल बिठाने की आवश्यकता है। 

वहीं सरकार को सब्सिडी के लिए विश्व व्यापार संगठन की सीमाओं को भी ध्यान में रखने की जरूरत है। निश्चित तौर पर कृषि कानूनों की वापसी के बाद कृषि क्षेत्र में आगे बढ़ने का सबसे अच्छा तरीका यही होगा कि राज्य सरकारों को नेतृत्व करने दिया जाए। इससे पहले भी केंद्र राज्यों को अलग-अलग स्तर की सफलता के साथ अपने कृषि विपणन कानूनों में सुधार के लिए प्रोत्साहित करने के लिए बार-बार प्रयास कर चुका है। 

जहां तक किसानों को लाभकारी मूल्य उपलब्ध कराने की बात है, इसके लिए कई तरह के उपाय अपनाने होंगे। ऐसे उपायों के तहत सरकारी खरीद का जारी रहना इसका एक हिस्सा हो सकता है। सरकार किसानों को कम मूल्य मिलने की भरपाई के लिए उपयुक्त योजना के साथ सामने आ सकती है। इसके साथ-साथ सरकार सहकारिता या किसान उत्पादकों को मूल्य श्रृंखला में भागीदारी के लिए भी प्रेरित कर सकती है। 

सरकार के द्वारा स्थायी राष्ट्रीय कृषि आयोग बनाया जा सकता है, जो किसानों की समस्याओं और उनके समाधान को लगातार सरकार तक पहुंचाता रहे। सरकार के द्वारा अनुबंध खेती के नियम में मानकीकरण सुनिश्चित करने के लिए बदलाव किया जा सकता है। इसके साथ-साथ किसानों के लिए ऋण बीमा तक पहुंच में सुधार और फसल कटाई के बाद बर्बादी को कम करने के लिए उत्पादकता में सुधार के वास्ते बुनियादी ढांचे की उपलब्धता पर ध्यान केंद्रित किया जा सकता है।

हम उम्मीद करें कि सरकार के द्वारा तीन नए कृषि कानूनों की वापसी के बाद सभी किसान संगठन  सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति छोड़कर कृषि विकास के लिए हरसंभव योगदान देंगे। हम यह भी उम्मीद करें कि सरकार भी विभिन्न नए कृषि विकास कार्यक्रमों और खाद्यान्न, तिलहन व दलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए लागू की गई नई योजनाओं के साथ-साथ डिजिटल कृषि मिशन के कारगर क्रियान्वयन की डगर पर इस तरह तेजी से आगे बढ़ेगी कि छोटे किसानों को अधिक से अधिक लाभान्वित किया जा सके। 

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