लाइव न्यूज़ :

इस्लामी देशों के साथ भारत के घनिष्ठ संबंध, वेदप्रताप वैदिक का ब्लॉग

By वेद प्रताप वैदिक | Updated: December 8, 2020 17:26 IST

भारत का व्यापारिक लेन-देन अमेरिका और चीन के बाद सबसे ज्यादा यूएई और सऊदी अरब के साथ ही है. आजकल हमारे सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे इन देशों की चार दिवसीय यात्ना पर गए हुए हैं.

Open in App
ठळक मुद्देखाड़ी के इन प्रमुख देशों में हमारे प्रधानमंत्नी और विदेश मंत्नी भी जाते रहे हैं.अरब देश औपचारिक रूप से हमारे पड़ोसी देश नहीं हैं.

प्रमुख अरब देशों के साथ भारत के संबंध जितने घनिष्ठ आजकल हो रहे हैं, उतने पहले कभी नहीं हुए. यह ठीक है कि गुटनिरपेक्ष आंदोलन के जमाने में नेहरू, नासिर, एनक्रूमा के नारे लगाए जाते थे और भारत व मिस्र के संबंध काफी दोस्ताना थे.

लेकिन आजकल सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात-जैसे देशों के साथ भारत के आर्थिक और सामरिक संबंध इतने बढ़ रहे हैं कि जिसकी वजह से पाकिस्तान जैसे देशों की चिंता बढ़नी स्वाभाविक है. ईरान को भी बुरा लग सकता है, क्योंकि शिया ईरान और सुन्नी देशों में तलवारें खिंची हुई हैं. लेकिन संतोष का विषय है कि ईरान से भी भारत के संबंध मधुर हैं और भारत को अमेरिका ने ईरान पर लगे प्रतिबंधों से छूट दे रखी है.

इन इस्लामी देशों से नरेंद्र मोदी सरकार की घनिष्ठता भारत के कट्टरपंथी मुसलमानों के लिए पहेली बनी हुई है. सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात, दोनों ने मोदी को अपने सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किए हैं और कश्मीर व आतंकवाद के सवालों पर पाकिस्तान को अंगूठा दिखा दिया है.

पिछले छह वर्षों में भाजपा सरकार ने इन दोनों देशों से ही नहीं बहरीन, कुवैत, कतर, ओमान जैसे अन्य इस्लामी देशों के साथ भी अपने संबंध को नई ऊंचाइयां प्रदान की हैं. इस समय इन देशों में लगभग एक करोड़ भारतीय नागरिक कार्यरत हैं और वे करीब 50 बिलियन डॉलर बचाकर हर साल भारत भेजते हैं.

भारत का व्यापारिक लेन-देन अमेरिका और चीन के बाद सबसे ज्यादा यूएई और सऊदी अरब के साथ ही है. आजकल हमारे सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे इन देशों की चार दिवसीय यात्ना पर गए हुए हैं. खाड़ी के इन प्रमुख देशों में हमारे प्रधानमंत्नी और विदेश मंत्नी भी जाते रहे हैं.

ये अरब देश औपचारिक रूप से हमारे पड़ोसी देश नहीं हैं. इनकी भौगोलिक सीमाएं हमारी सीमाओं को हालांकि स्पर्श नहीं करती हैं लेकिन इन देशों के साथ सदियों से भारत का संबंध इतना घनिष्ठ रहा है कि इन्हें हम अपना पड़ोसी देश मानकर इनके साथ वैसा ही व्यवहार करें तो दोनों पक्षों का लाभ ही लाभ है.

इनमें से कुछ देशों में कई बार जाने और इनके जन-साधारण और नेताओं से निकट संपर्क के अवसर मुझे मिले हैं. मेरी सोच यह है कि इन देशों को भी मिलाकर यदि जन-दक्षेस या ‘पीपल्स सार्क’ जैसा कोई गैर-सरकारी संगठन खड़ा किया जा सके तो सिर्फ एक करोड़ नहीं, दस करोड़ भारतीयों को नए रोजगार मिल सकते हैं. सारे पड़ोसी देशों की गरीबी भी दूर हो सकती है.

टॅग्स :दिल्लीनरेंद्र मोदीसंयुक्त अरब अमीरातदुबईईरानइराकअमेरिकापाकिस्तानचीन
Open in App

संबंधित खबरें

विश्वकर्ज़ में डूबे पाकिस्तान के लिए भारी मुसीबत, यूएई ने इसी महीने 3.5 अरब डॉलर का लोन चुकाने को कहा

भारतघायल हूं इसलिए घातक हूं?, राघव ने एक्स पर किया पोस्ट, मैं बोलना नहीं चाहता था, मगर चुप रहता तो बार-बार दोहराया गया झूठ भी सच लगने लगता, वीडियो

कारोबारपश्चिम एशिया संघर्षः भारत मजबूती से उभरा और हालात का डटकर मुकाबला किया?, विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा- युद्ध से करोड़ों लोग परेशान, वीडियो

भारतLPG Cylinder Update: सिलेंडर के लिए अब लंबी वेटिंग खत्म! दिल्ली में बस ID कार्ड दिखाओ और 5KG सिलेंडर पाओ

ज़रा हटकेबनारस में सीएम यादव श्री राम भंडार में रुके और कचौड़ी, पूरी राम भाजी और जलेबी का स्वाद लिया?, वीडियो

भारत अधिक खबरें

भारततमिलनाडु चुनावों के लिए BJP का टिकट न मिलने के बाद अन्नामलाई ने दिया अपना स्पष्टीकरण

भारतलखनऊ सहित यूपी के 17 शहरों में कूड़े का अंबार?, मतदान करने असम गए हजारों सफाईकर्मी, 12 अप्रैल को लौंटेगे?

भारतबारामती विधानसभा सीटः सुनेत्रा पवार के खिलाफ प्रत्याशी ना उतारें?, सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा- निर्विरोध जिताएं, सभी दलों से की अपील

भारत'एकनाथ शिंदे और बलात्कार के आरोपी अशोक खरात के बीच 17 बार फोन पर बातचीत हुई', अंजलि दमानिया का आरोप

भारतमोथाबाड़ी में न्यायिक अधिकारी को किया अगवा और असली आरोपी फरार?, सीएम ममता बनर्जी ने कहा- निर्दोष लोगों को परेशान कर रही एनआईए