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ब्लॉग: हिंदी में शपथ प्रतीकात्मक, लेकिन संदेश बहुत गहरे

By लोकमत समाचार सम्पादकीय | Updated: June 13, 2024 09:43 IST

2009 में सरकार के शपथ समारोह में लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष पीए संगमा की बेटी अगाथा संगमा की हिंदी ने मेहमानों का ध्यान अपनी ओर खिंचा था।

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ठळक मुद्देएनडीए सरकार के शपथ समारोह में अगाथा संगमा की हिंदी ने मेहमानों का ध्यान अपनी ओर खिंचाजब शपथ ग्रहण समारोह में अंग्रेजी का बोलबाला रहता था, हिंदी भाषा में शपथ लेना बड़ी बात थीइस बार के एनडीए सरकार में 55 मंत्री ऐसे रहे, जिन्होंने हिंदी में शपथ ली

स्थान राष्ट्रपति भवन, साल 2009 की गर्मियां...मंत्रिमंडल का शपथ ग्रहण चल रहा था। मंत्रियों के शपथ लेते ही तालियां बजतीं, और थम जातीं। इसी बीच एक युवा नेता को राष्ट्रपति ने शपथ दिलाई। शपथ वाले शब्द जैसे ही थमे...राष्ट्रपति भवन तालियों से गूंज उठा।

बाकी मंत्रियों की तुलना में इस बार ताली कुछ ज्यादा तेज और देर तक बजी। वह युवा मंत्री थीं अगाथा संगमा। मेघालय के पूर्व मुख्यमंत्री और लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष पी.ए. संगमा की बेटी की ओर मेहमानों का ध्यान खींचने की वजह बनी उनकी हिंदी।

ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि अगाथा उत्तर पूर्व की नेता थीं। तब शपथ ग्रहण में अंग्रेजी का बोलबाला रहता था. हिंदी भाषी क्षेत्रों के पढ़े-लिखे समझे जाने वाले ज्यादातर नेताओं को हिंदी में शपथ लेना हेठी की बात लगती थी लेकिन मोदी राज में हालात बदल गए हैं।

नौ जून की शाम को राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ 71 मंत्रियों ने शपथ ली। इनमें 55 मंत्री ऐसे रहे, जिन्होंने हिंदी में शपथ ली. स्वतंत्र भारत के इतिहास में शायद यह पहला शपथ ग्रहण रहा, जिसमें दो तिहाई मंत्रियों ने भारत की अपनी भाषा में राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्य के निर्वहन का संकल्प लिया।

आलोचना लोकतंत्र का आभूषण है। इस नाते लोकतांत्रिक व्यवस्था में आलोचना के परे कोई सरकार नहीं हो सकती। मोदी सरकार के कई फैसलों पर उसके विरोधियों की आलोचनात्मक निगाहें हो सकती हैं लेकिन एक क्षेत्र ऐसा है, जिसमें मोदी सरकार के परोक्ष और प्रत्यक्ष कदमों की आलोचना उसके कट्टर विरोधी भी नहीं कर सकते। भारतीय भाषाओं, विशेषकर हिंदी के प्रति मोदी सरकार का अनुराग ऐसा ही मुद्दा है।

चूंकि भारत के शीर्ष नेतृत्व का ज्यादातर हिस्सा हिंदी बोलने-लिखने में सहज है, लिहाजा हिंदी का महत्व मोदी सरकार में पहले की सरकारों की तुलना में बढ़ा है। प्रधानमंत्री मोदी हों या गृह मंत्री अमित शाह या फिर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, तीनों बड़े नेताओं की प्राथमिक भाषा अपनी लोकभाषा या हिंदी ही है। मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में बतौर कृषि मंत्री शामिल शिवराज सिंह चौहान भी हिंदी में ज्यादा सहज हैं।

सरकार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे नितिन गडकरी मराठी, हिंदी और अंग्रेजी तीनों में सहज हैं। भारतीय भाषाओं और अपनी लोकभाषा जैसे गुजराती, मराठी, राजस्थानी आदि में सहज ज्यादातर नेताओं की कामकाज की भाषा चूंकि हिंदी है, शायद यही वजह है कि शपथ ग्रहण समारोह में उन्होंने हिंदी को ही तवज्जो दिया।

हिंदी में ज्यादातर मंत्रियों का शपथ लेना हो या तंत्र के शीर्ष का हिंदी में बढ़ता व्यवहार हो, इनसे नीचे तक संदेश जाता है। हिंदी में शपथ लोकभाषाओं के प्रति सामान्य जन को स्नेह और सम्मान के लिए प्रेरित तो करती ही है, लोकभाषा-भाषियों को नए सौंदर्य और गर्वबोध से भी भरती है। भारत की सांस्कृतिक और भाषायी विरासत से प्यार करना सिखाती है।

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