डॉ. महेश परिमल
पतंग उड़ाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले चाइनीज मांजे अब जीवनदीप बुझाने का काम कर रहे हैं. सरकार ने चाइनीज धागे पर प्रतिबंध लगाया है, पर यह प्रतिबंध सब जगह प्रभावी दिखाई नहीं देता. सरकार ने तो गुटखे एवं अन्य कई चीजों पर भी प्रतिबंध लगाया है, पर ये चीजें भी बेखौफ बेची जा रही हैं. इसे सरकार का नाकारापन कहा जाए या कानून का मखौल उड़ाने वालों का दुस्साहस, सरकार इन पर कोई भी कार्रवाई करने से आखिर बचती क्यों है? मकर संक्रांति आने में अभी दस दिन का समय है, लेकिन पिछले एक महीने से देश में खतरनाक धागों की कई खेप पकड़ी जा चुकी है.
पतंग के शौकीन अपने आनंद के लिए किसी भी तरह चीनी डोर हासिल करने पर अड़े रहते हैं. चीनी डोर इंसानों और पक्षियों के लिए कितनी घातक है, इस पर सोचने का उनके पास समय नहीं होता. बात उत्तरायण की नहीं है, बल्कि हर उत्तरायण पर चीनी डोर घातक बनकर लोगों की गर्दनें काटती रही है. चीनी डोर की बिक्री पर एक दशक से प्रतिबंध है,
फिर भी यह सच्चाई स्वीकार करनी होगी कि हमारे यहां प्रतिबंधित वस्तुओं का बड़ा बाजार मौजूद है. खतरनाक मांजा बनाने के उपकरण मिलने अब बंद हो गए हैं, लेकिन डोर अब भी मिल रही है. जब तक चीनी डोर खरीदने वाले मौजूद हैं, तब तक बेचने वाले भी रहेंगे. जब तक लोग स्वयं इस घातक चीनी डोर का इस्तेमाल बंद नहीं करेंगे, तब तक इसका कारोबार रुकने वाला नहीं है.
हर साल सैकड़ों लोग और अनगिनत जानवर चीनी डोर का शिकार बनते हैं, फिर भी इसे खरीदने वाला एक वर्ग मौजूद है. यह वर्ग किसी की पतंग नहीं काटता, बल्कि जाने-अनजाने किसी के जीवन की डोर काट देता है. घातक डोर के कारण आकाश में उड़ते पक्षी या तो मारे जाते हैं या घायल होते हैं. चीनी डोर की तरह अधिक कांच की मात्रा वाली डोर भी खतरनाक साबित हो रही है.
चीनी डोर प्लास्टिक-लेपित होती है, इसलिए पतंग लड़ाते समय वह सामने वाले की डोर को आसानी से काट देती है. कुछ लोग पचास प्रतिशत से अधिक कांच मिली डोर रंगवाते हैं. ज्यादा पतंग काटकर वे खुशी से चिल्लाते हैं, लेकिन उन्हें उन मूक पक्षियों की चीखें सुनाई नहीं देतीं. चीनी डोर या कांच लगी डोर का मामूली-सा स्पर्श भी किसी मासूम पक्षी की जिंदगी खत्म कर देता है.
सरकार ने प्रतिबंध लगाया है, फिर भी चीनी डोर की तस्करी जारी है, क्योंकि इसे खरीदने वाले मौजूद हैं. यदि मांग ही न हो, तो कोई व्यापारी प्रतिबंधित सामान नहीं मंगाएगा. किसी की पतंग काटकर चिल्लाने की खुशी केवल एक दिन की होती है, लेकिन जिनकी गर्दन कटती है, उनके घरों में शोक हमेशा के लिए बस जाता है. किसी का शौक किसी और के लिए मौत बन जाता है.
दोपहिया वाहन चालकों के लिए कुछ कंपनियां अपने खर्च पर स्टीयरिंग के पास सुरक्षा के रूप में लोहे की सलाखें लगाकर देती हैं. उत्तरायण के दिनों में सुरक्षा देने वाली ‘यू’ आकार की सलाखें भी महत्वपूर्ण हैं. ये सलाखें डोर को चालक की गर्दन तक पहुंचने से रोकती हैं. पतंग के त्यौहार का संबंध आनंद और उल्लास से है, किसी के बुझते हुए जीवन-दीप से नहीं.