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ब्लॉग: क्रूरतम अपराध से कम नहीं है तेजाब से हमला

By लोकमत समाचार सम्पादकीय | Updated: September 8, 2023 10:02 IST

अदालत उस जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें आरोपी ने इस आधार पर जमानत दिए जाने का अनुरोध किया था कि इस अपराध के लिए न्यूनतम सजा 10 साल है और वह पहले ही नौ साल न्यायिक हिरासत में बिता चुका है. 

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ठळक मुद्देदिल्ली हाईकोर्ट का यह कहना बिल्कुल सही है कि तेजाब से हमला समाज में सबसे गंभीर अपराधों में से एक है.उच्च न्यायालय ने कहा कि आरोपी के लंबे समय तक कारावास में रहने को पीड़िता की प्रतीक्षा के समान ही देखा जाना चाहिए.वर्ष 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने भी एसिड अटैक के एक मामले में सुनवाई के दौरान कहा था कि ‘एसिड हमला, हत्या से भी बदतर है.’

दिल्ली हाईकोर्ट का यह कहना बिल्कुल सही है कि तेजाब से हमला समाज में सबसे गंभीर अपराधों में से एक है. यह एक ऐसा अपराध है जो पीड़ित को न सिर्फ शारीरिक बल्कि भावनात्मक तौर पर भी इतना गहरा जख्म देता है जो जिंदगीभर नहीं भर पाता. 

अदालत उस जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें आरोपी ने इस आधार पर जमानत दिए जाने का अनुरोध किया था कि इस अपराध के लिए न्यूनतम सजा 10 साल है और वह पहले ही नौ साल न्यायिक हिरासत में बिता चुका है. 

उच्च न्यायालय ने कहा कि आरोपी के लंबे समय तक कारावास में रहने को पीड़िता की प्रतीक्षा के समान ही देखा जाना चाहिए. वर्ष 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने भी एसिड अटैक के एक मामले में सुनवाई के दौरान कहा था कि ‘एसिड हमला, हत्या से भी बदतर है.’ 

पहले एसिड अटैक को लेकर अलग से कोई कानून नहीं था और ऐसे हमलों पर आईपीसी की धारा 326 के तहत गंभीर रूप से जख्मी करने का मामला ही दर्ज होता था लेकिन बाद में कानून में 326 ए और बी की धाराएं जोड़ी गईं जिसके तहत तेजाबी हमला करने के मामले को गैरजमानती अपराध माना गया और गुनहगार को कम से कम दस साल और ज्यादा से ज्यादा आजीवन कारावास की सजा देने का प्रावधान किया गया. 

दरअसल तेजाब हमला जख्म देने का कोई आम मामला नहीं है बल्कि इसके शिकार को जीवन भर तिल-तिल कर मरना पड़ता है. अपराधी का उद्देश्य शिकार के चेहरे को विकृत करना होता है ताकि जब वह आईने में चेहरा देखे तो खुद अपने आप से ही डर जाए. इसीलिए यह अपराध इतना भयानक बन जाता है कि अपराधी के प्रति कोई नरमी नहीं बरती जा सकती. 

वैसे तो देश में कहीं भी एसिड को खुले बाजार में नहीं बेचा जा सकता, 2013 से ही इसकी बिक्री पर रोक है, लेकिन जिस तरह से एसिड हमले के मामले बढ़ रहे हैं, उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि रोक के बावजूद किस तरह एसिड खुलेआम बेचा जाता है. केंद्र सरकार की एजेंसी नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2021 में देशभर में एसिड अटैक के 102 मामले सामने आए थे. 

जबकि 48 मामले एसिड अटैक की कोशिश के दर्ज हुए थे. लेकिन एसिड सर्वाइवर्स ट्रस्ट इंटरनेशनल (एएसटीआई) का मानना है कि भारत में एसिड अटैक के हर साल एक हजार से ज्यादा मामले सामने आते हैं. एएसटीआई के अनुसार एसिड अटैक के मामले में दुनिया में ब्रिटेन के बाद भारत दूसरे स्थान पर है और अदालतों में एसिड अटैक के मामले का निपटारा होने में औसतन 5 से 10 साल का समय लगता है. 

एसिड हमले के शरीर पर होने वाले असर को लेकर युगांडा में हुए एक अध्ययन के अनुसार ऐसे हमले में पीड़ित का शरीर औसतन 14 फीसदी तक जल जाता है. अध्ययन में 87 प्रतिशत पीड़िताओं ने चेहरा जलने की बात मानी थी. 67 प्रतिशत पीड़िताओं का सिर और गला भी जल गया था जबकि 54 प्रतिशत पीड़ितों की छाती तक जल गई थी. 31 प्रतिशत पीड़ित या तो पूरी तरह से अंधे हो गए थे या उनकी आंखों में धुंधलापन आ गया था. 

जाहिर है कि यह एक ऐसा क्रूर अपराध है जिसके दोषी के साथ कोई भी मुरव्वत नहीं की जा सकती बल्कि उसे कड़ी से कड़ी सजा दी जानी चाहिए ताकि आगे कोई इस तरह का अपराध करने की हिम्मत न जुटा सके.

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