लाइव न्यूज़ :

जयंतीलाल भंडारी का ब्लॉग: बढ़ती विकास दर के बीच मानव विकास की चिंताओं का ध्यान रखें

By डॉ जयंती लाल भण्डारी | Updated: September 23, 2022 14:24 IST

रिपोर्ट से यह भी मालूम होता है कि मानव विकास सूचकांक में जहां बांग्लादेश व चीन जैसे देश भारत से बेहतर स्थिति में हैं, वहीं मलेशिया और थाईलैंड जैसे एशियाई पड़ोसी देश भी आगे दिखाई दे रहे हैं।

Open in App
ठळक मुद्देपिछले दशक में देश में जिस तेजी से गरीबी और भूख की चुनौती में कमी आ रही थी, उसे अकल्पनीय कोरोना संकट ने बुरी तरह प्रभावित किया है।स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि कोविड-19 ने सबसे ज्यादा स्वास्थ्य सुविधाओं की चुनौती खड़ी की है।

विकास दर के मामले में भारत दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ते हुए दिखाई दे रहा है, लेकिन मानव विकास सूचकांक (एचडीआई) के मामले में हमारा देश अभी बहुत पीछे के पायदान पर है। जहां 16 सितंबर को उज्बेकिस्तान के समरकंद में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इस वर्ष 2022 में भारत की अर्थव्यवस्था में 7.5 फीसदी वृद्धि की आशा है जो विश्व की सभी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे अधिक होगी, वहीं हाल ही में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के द्वारा प्रकाशित मानव विकास सूचकांक 2022 में 189 देशों की सूची में भारत 132वें पायदान पर पाया गया है।

गौरतलब है कि पिछले वर्ष इस सूचकांक में भारत 131वें पायदान पर था। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड-19 के कारण 32 वर्षों में पहली बार दुनिया भर में मानव विकास ठहर सा गया है। रिपोर्ट के मुताबिक जीवन प्रत्याशा, स्वास्थ्य व शिक्षा की बड़ी चुनौतियों के बीच भी भारत के द्वारा कोरोना संकट का बेहतर तरीके से सामना किए जाने से भारत एचडीआई रैंकिंग में केवल एक पायदान पीछे हुआ है।

रिपोर्ट से यह भी मालूम होता है कि मानव विकास सूचकांक में जहां बांग्लादेश व चीन जैसे देश भारत से बेहतर स्थिति में हैं, वहीं मलेशिया और थाईलैंड जैसे एशियाई पड़ोसी देश भी आगे दिखाई दे रहे हैं।

नि:संदेह देश की तेज गति से बढ़ती और इस समय दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का तमगा हासिल करने वाले भारत में मानव विकास सूचकांक में कमी आना विचारणीय प्रश्न है। इसमें कोई दो मत नहीं है कि कोविड-19 ने भारत में गरीबी और भूख की चुनौती को बढ़ाया है। पिछले दशक में देश में जिस तेजी से गरीबी और भूख की चुनौती में कमी आ रही थी, उसे अकल्पनीय कोरोना संकट ने बुरी तरह प्रभावित किया है।

लेकिन कोविड-19 की चुनौतियों के बाद अब देश में लोगों के स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार और सार्वजनिक सेवाओं में सुधार के साथ-साथ उनके जीवनस्तर को ऊपर उठाने की दिशा में लंबा सफर तय करना है। स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि कोविड-19 ने सबसे ज्यादा स्वास्थ्य सुविधाओं की चुनौती खड़ी की है।

ज्ञातव्य है कि 2017 में नई राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति में 2025 तक स्वास्थ्य पर खर्च को सकल घरेलू उत्पाद का 2.5 प्रतिशत किया जाना निर्धारित किया गया था। फिर पंद्रहवें वित्त आयोग ने पहली बार स्वास्थ्य के लिए उच्च-स्तरीय कमेटी गठित की थी। इस कमेटी ने भी स्वास्थ्य पर सरकारी खर्च को 2।5 प्रतिशत तक बढ़ाने की बात कही है। इस मामले में देश अभी भी पीछे है।

टॅग्स :कोविड-19 इंडियाह्यूमन राइट्सभारतीय अर्थव्यवस्थासकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी)
Open in App

संबंधित खबरें

कारोबारमार्च जीएसटी संग्रहः 8.8% की वृद्धि, 200000 करोड़ रुपये से अधिक कमाई, झमाझम बरसे पैसा?

स्वास्थ्यकौन हैं डॉ. आरती किनिकर?, सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा में खास उपलब्धि के लिए लोकमत महाराष्ट्रीयन ऑफ द ईयर 2026 पुरस्कार

स्वास्थ्यLMOTY 2026: हजारों मरीजों के लिए आशा की किरण?, डॉ. गौतम भंसाली को 'लोकमत महाराष्ट्रीयन ऑफ द ईयर 2026' पुरस्कार

कारोबारअर्थव्यवस्था 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी, देश की रफ्तार तेज

कारोबार'ग्रोथ रेट में भारत, चीन और अमेरिका से आगे, वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा ने भारतीय अर्थव्यवस्था को जमकर सराहा

कारोबार अधिक खबरें

कारोबारपुणे के विशाल भुजबल हैदराबाद में राष्ट्रीय सम्मेलन में सम्मानित

कारोबारपश्चिम एशिया संघर्षः भारत मजबूती से उभरा और हालात का डटकर मुकाबला किया?, विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा- युद्ध से करोड़ों लोग परेशान, वीडियो

कारोबारITR Filing 2026: ITR दाखिल करने से पहले ये बातें जान लेना है बेहद जरूरी, जानें कब से शुरू हो रही है प्रक्रिया और कैसे बचाएं पेनाल्टी

कारोबारGold Rate Today: 4 अप्रैल 2026 को सोना हुआ सस्ता, 24 कैरेट सोने की कीमत ₹ 1,52,650 प्रति 10 ग्राम

कारोबारiPhone जैसा Selfie? Realme 16 5G आया मार्केट में 7000mAh बैटरी, जानें फीचर्स