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अर्थव्यवस्था की ताकत सेवा क्षेत्र, 55 फीसदी योगदान और 30 फीसदी को रोजगार

By डॉ जयंती लाल भण्डारी | Updated: November 18, 2025 05:14 IST

NITI Aayog Service Sector: वाणिज्य मंत्रालय के द्वारा प्रकाशित आंकड़ों के मुताबिक चालू वित्त वर्ष 2025-26 में अप्रैल से सितंबर 2025 के बीच भारत का सेवा निर्यात 193.18 अरब डॉलर के ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है.

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ठळक मुद्देदेश में बढ़ता हुआ सेवा क्षेत्र बढ़ते हुए सेवा निर्यात (सर्विस एक्सपोर्ट) का आधार है. कोई दो मत नहीं है कि भारतीय अर्थव्यवस्था का अहम पहलू सेवा निर्यात बन गया है. चालू वित्त वर्ष के अंत तक 475 अरब डॉलर की रिकॉर्ड नई ऊंचाई पर पहुंच जाएगा.

NITI Aayog Service Sector: हाल ही में प्रकाशित नीति आयोग की सेवा क्षेत्र (सर्विस सेक्टर) से संबंधित रिपोर्ट में कहा गया है कि देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में सेवा क्षेत्र का योगदान 55 फीसदी से अधिक है और लगभग 18.8 करोड़ लोगों या देश के कार्यबल के लगभग 30 फीसदी को रोजगार देता है. रिपोर्ट दर्शाती है कि सेवा क्षेत्र ने पिछले छह वर्षों में 4 करोड़ अतिरिक्त रोजगार पैदा किए हैं. देश का सेवा निर्यात 14.8 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक दर से बढ़ रहा है. यह वस्तु निर्यात के 9.8 प्रतिशत से कहीं ज्यादा है. ऐसे में यह उभरकर दिखाई दे रहा है कि देश के वस्तु निर्यात की चुनौतियों के बीच सेवा क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था की ताकत बन गया है. गौरतलब है कि देश में बढ़ता हुआ सेवा क्षेत्र बढ़ते हुए सेवा निर्यात (सर्विस एक्सपोर्ट) का आधार है.

इसमें कोई दो मत नहीं है कि भारतीय अर्थव्यवस्था का अहम पहलू सेवा निर्यात बन गया है. इनसे न केवल विदेश व्यापार घाटे को थामे रखने में मदद मिल रही है बल्कि देश में रोजगार निर्माण में भी सहारा मिल रहा है. हाल ही में वाणिज्य मंत्रालय के द्वारा प्रकाशित आंकड़ों के मुताबिक चालू वित्त वर्ष 2025-26 में अप्रैल से सितंबर 2025 के बीच भारत का सेवा निर्यात 193.18 अरब डॉलर के ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है.

उम्मीद है कि यह इस चालू वित्त वर्ष के अंत तक 475 अरब डॉलर की रिकॉर्ड नई ऊंचाई पर पहुंच जाएगा. यह बात ध्यान में रखी जानी होगी कि अब सेवा निर्यात के क्षेत्र में भी लगातार प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है. ऐसी स्थिति में भारत से सेवा निर्यात में तेजी से वृद्धि के लिए सेवाओं की गुणवत्ता, दक्षता, उत्कृष्टता तथा सुरक्षा को लेकर और अधिक प्रयास करना होंगे.

भारत को अपने सेवा निर्यात में विविधता लाने और अन्य उभरते क्षेत्रों पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है. अब हमें सॉफ्टवेयर निर्यात के लिए अमेरिकी बाजार पर निर्भरता कम करके सेवा निर्यात की संभावनाओं वाले अन्य देशों में भी कदम बढ़ाना होंगे. अब हमें नई पीढ़ी को सेवा निर्यात की नए दौर की शिक्षा देने के लिए समुचित निवेश की व्यवस्था करना होगी.

हमें नए दौर की तकनीकी जरूरतों और इंडस्ट्री की अपेक्षाओं के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण से नई पीढ़ी को सुसज्जित करना होगा. भारत की आईटी सेवा कंपनियों को गैर-अंग्रेजी भाषी देशों में कारोबार में आगे बढ़ने के लिए कार्मिकों को संबंधित देशों की भाषाओं में प्रशिक्षण देने पर निवेश किया जाना होगा,

ताकि इन देशों के बाजारों तक भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स की पहुंच बनाई जा सके. हम उम्मीद करें कि ऐसे प्रयासों से देश का सेवा क्षेत्र और सेवा निर्यात रफ्तार से बढ़ेगा और इससे देश को विकसित देश बनाने का लक्ष्य हासिल करने में मदद मिल सकेगी.

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