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मुहर्रम के मौके पर राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने घर पर बुलवाया ताजिया जुलूस, इमाम हुसैन की शहादत को याद किया

By एस पी सिन्हा | Updated: July 29, 2023 17:14 IST

ताजिया जुलूस में शामिल लोगों ने कहा कि लालू यादव हमेशा से आपसी भाईचारा को बढ़ावा देते रहे हैं। वे पहले भी ताजिया जुलूस को अपने यहां आमंत्रित करते रहे हैं। इस बार भी उन्होंने सबको बुलाया।

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ठळक मुद्देलालू प्रसाद यादव ने अपने आवास पर ताजिया जुलूस बुलायाशोक के इस जुलूस में सबके साथ इमाम हुसैन की शहादत को याद कियाशोक जताने के मौके पर लालू यादव ने काला कपड़ा पहन रखा था

पटना: मुहर्रम के मौके पर राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने अपने आवास पर ताजिया जुलूस बुलाया। पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के आवास पर ताजिया जुलुस लेकर बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। इस दौरान लालू यादव ने खुद आगे आकर सभी का स्वागत किया। इमाम हुसैन की शहादत पर ताजिया लेकर शोक जताने के मौके पर लालू यादव ने काला कपड़ा पहन रखा था। काले रंग का हाफ पैंट और काले रंग की टी-शर्ट में लालू यादव कुर्सी पर बैठे हुए थे।

राबड़ी देवी के आवास में शेखपुरा से ताजिया पहुंचते ही वे मुस्लिम समुदाय से मिलने पहुंच गए और शोक के इस जुलूस में सबके साथ इमाम हुसैन की शहादत को याद किया। इस मौके पर राबड़ी देवी भी मौजूद थीं। इस दौरान तलवार और लाठी-डंडे के साथ लोग ताजिया जुलूस में पहुंचे थे। लालू ने इस दौरान उनका प्रदर्शन भी देखा। 

दरअसल, मुहर्रम का महीना इस्लाम धर्म में शोक के रूप में जाना जाता है। इस महीने में उत्सव नहीं होता है। इमाम हुसैन की शहादत पर शोक व्यक्त करते हुए शिया मुस्लिम काले कपड़े पहनकर जुलूस निकालते हैं। इस दिन को कुर्बानी के रूप में याद किया जाता है, साथ ही इस दिन ताजिया निकाले जाते हैं। लालू यादव भी कुछ उसी अंदाज में दिखे। वह कुर्सी पर बैठकर ताजिया लेकर पहुंचे लोगों से मिले और शोक के इस जुलूस में सबके साथ इमाम हुसैन की शहादत को याद किया।

 ताजिया जुलूस में शामिल लोगों ने कहा कि लालू यादव हमेशा से आपसी भाईचारा को बढ़ावा देते रहे हैं। वे पहले भी ताजिया जुलूस को अपने यहां आमंत्रित करते रहे हैं। इस बार भी उन्होंने सबको बुलाया। उल्लेखनीय है कि लालू यादव वर्ष 1990 में बिहार के मुख्यमंत्री बने थे, तब से उन्होंने बिहार में खुद को अल्पसंख्यक समाज विशेषकर अल्पसंख्यक के सर्वमान्य नेता के तौर पर पेश करने की कोशिश की है। यहां तक कि लालू यादव अपने वोटों के एम-वाई (मुस्लिम-यादव ) समीकरण के लिए भी जाने जाते हैं। धर्मनिरपेक्ष राजनीति के पैरोकार रहे लालू यादव ने एक बार फिर से उसी दिश में मोहर्रम जुलुस को अपने आवास पर बुलाकर सबको एक संदेश देने की कोशिश की है।

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